चर्चा में क्यों ?
चेन्नई में AI और डेटा सेंटर परियोजनाओं में तेजी से बढ़ रहे निवेश के बीच इनकी बढ़ती बिजली और पानी की मांग तथा शहर की पर्यावरणीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

AI और डेटा सेंटरों की बढ़ती ऊर्जा खपत
- पारंपरिक डेटा सेंटर मुख्यतः डेटा स्टोरेज और सामान्य कंप्यूटिंग के लिए बनाए जाते थे, लेकिन AI डेटा सेंटर उच्च क्षमता वाले ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) पर आधारित होते हैं, जिनकी बिजली खपत कई गुना अधिक होती है।
- AI-रेडी सर्वर रैक को पारंपरिक सर्वरों की तुलना में कहीं अधिक बिजली, उन्नत कूलिंग सिस्टम और निरंतर बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इसके चलते विश्वभर में ऊर्जा योजनाओं पर दबाव बढ़ रहा है।
- चेन्नई में गर्मियों के दौरान पहले ही एयर कंडीशनिंग और औद्योगिक गतिविधियों के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में ऊर्जा-गहन AI डेटा सेंटरों की संख्या बढ़ने से बिजली ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। डेटा सेंटरों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए बड़े बैटरी सिस्टम और डीजल जनरेटर भी लगाने पड़ते हैं, जिससे लागत और पर्यावरणीय प्रभाव दोनों बढ़ते हैं।
पानी की बढ़ती चुनौती
- डेटा सेंटरों के लिए केवल बिजली ही नहीं, बल्कि पानी भी एक महत्वपूर्ण संसाधन है। सर्वरों से निकलने वाली गर्मी को नियंत्रित करने के लिए कई डेटा सेंटर इवैपोरेटिव कूलिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करते हैं, जिसमें बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है।
- चेन्नई पहले ही जल संकट का सामना कर चुका है। वर्ष 2019 में शहर लगभग 'डे-ज़ीरो' की स्थिति में पहुंच गया था, जब पानी की आपूर्ति के लिए विशेष ट्रेनों का सहारा लेना पड़ा। यद्यपि बाद के वर्षों में मानसून से जलाशयों का स्तर बढ़ा, फिर भी शहर आज भी वर्षा, समुद्री जल विलवणीकरण संयंत्रों और भूजल पर काफी हद तक निर्भर है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण कभी भीषण बाढ़ तो कभी लंबे सूखे की स्थिति बनने से भविष्य में औद्योगिक जल मांग का अनुमान लगाना और कठिन होता जा रहा है।
- कुछ आधुनिक डेटा सेंटर एयर कूलिंग, लिक्विड कूलिंग और उपचारित अपशिष्ट जल (Treated Wastewater) का उपयोग कर मीठे पानी की खपत कम कर रहे हैं, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं अपने वास्तविक जल उपयोग का सार्वजनिक विवरण उपलब्ध नहीं करातीं। विशेषज्ञ पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील शहर
- चेन्नई का भौगोलिक स्थान इसे विशेष रूप से जलवायु जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाता है। बंगाल की खाड़ी के निकट स्थित होने के कारण शहर समुद्र-स्तर वृद्धि, चक्रवात, तूफानी लहरों, भीषण गर्मी और शहरी बाढ़ जैसी चुनौतियों का सामना करता है।
- 2015 की विनाशकारी बाढ़ ने दिखाया कि अनियोजित शहरीकरण, आर्द्रभूमियों का क्षरण और कमजोर जल निकासी व्यवस्था प्राकृतिक आपदाओं को और गंभीर बना सकती है।
- डेटा सेंटरों के लिए बड़े भू-भाग, विद्युत उपकेंद्र, ट्रांसमिशन नेटवर्क और परिवहन अवसंरचना की आवश्यकता होती है। यदि इनका विकास उचित योजना के बिना हुआ तो यह आवास, पारिस्थितिकी संरक्षण और बाढ़ प्रबंधन जैसी शहरी प्राथमिकताओं से टकरा सकता है।
रोजगार बनाम संसाधनों की खपत
- डेटा सेंटर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, क्लाउड कंप्यूटिंग, ई-गवर्नेंस, AI और दूरसंचार के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनके माध्यम से निर्माण, विद्युत उपकरण, फाइबर नेटवर्क और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश बढ़ता है।
- लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपरस्केल डेटा सेंटर बड़ी मात्रा में भूमि, बिजली और पानी का उपयोग करते हैं, जबकि उनकी तुलना में दीर्घकालिक रोजगार के अवसर सीमित होते हैं।
- इसी कारण तमिलनाडु सरकार अपनी डेटा सेंटर प्रोत्साहन नीति की समीक्षा कर रही है। अब व्यापक सब्सिडी के बजाय ऐसे प्रोत्साहनों पर जोर दिया जा रहा है जो नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और उपयुक्त स्थान चयन को बढ़ावा दें।
क्या नवीकरणीय ऊर्जा समाधान बन सकती है ?
- कई वैश्विक आईटी कंपनियां अपने डेटा सेंटरों को 100% नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित करने का लक्ष्य रख रही हैं। तमिलनाडु पहले से ही सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल है।
- फिर भी केवल नवीकरणीय ऊर्जा पर्याप्त नहीं होगी, क्योंकि AI डेटा सेंटरों को 24×7 निरंतर बिजली चाहिए, जबकि सौर और पवन ऊर्जा मौसम पर निर्भर होती हैं।
- इसलिए बैटरी स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड, बेहतर ट्रांसमिशन नेटवर्क और लचीले बिजली प्रबंधन तंत्र विकसित करना आवश्यक होगा।
आगे की राह
- विशेषज्ञों का मानना है कि चेन्नई की डिजिटल महत्वाकांक्षा पर्यावरणीय स्थिरता की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं-
- डेटा सेंटरों के बिजली और पानी की खपत का अनिवार्य खुलासा।
- कूलिंग के लिए उपचारित अपशिष्ट जल का अधिक उपयोग।
- नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना।
- नियमित पर्यावरणीय रिपोर्टिंग और संचयी प्रभाव आकलन।
- डेटा सेंटरों को शहर की जलवायु अनुकूलन रणनीति का हिस्सा बनाना।
निष्कर्ष
भारत यदि वैश्विक AI शक्ति बनना चाहता है तो मजबूत डिजिटल अवसंरचना आवश्यक है, लेकिन उसका विकास सतत (Sustainable) भी होना चाहिए। चेन्नई आज उस चुनौती का प्रतीक बन चुका है जिसका सामना भविष्य में अनेक शहर करेंगे। शहर की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होगी कि