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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 : मुख्य बिंदु

संदर्भ 

29 जनवरी, 2026 को केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कुल 16 अध्यायों को शामिल किया गया है। इसकी मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-

1.अर्थव्यवस्था की स्थिति: विकास-सीमा का विस्तार 

  • वैश्विक वातावरण अभी भी भंगुर बना हुआ है, विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है किंतु बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विखंडन व वित्तीय संवेदनशील के कारण जोखिम बढ़ गए हैं। इन आघातों का प्रभाव कुछ समय बाद ही दिखाई दे सकता है।
  • इस पृष्ठभूमि में भारत का प्रदर्शन उल्लेखनीय है। प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में वास्तविक जी.डी.पी. वृद्धि 7.4% और सकल लाभ वृद्धि 7.3% रहने का अनुमान है जो लगातार चौथे वर्ष भारत को सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करता है।
  • वित्त वर्ष 2026 में निजी अंतिम उपभोग व्यय में 7% की वृद्धि हुई है जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 61.5% रहा है जो वर्ष 2012 के बाद से उच्चतम स्तर है (वित्त वर्ष 2023 में भी 61.5% हिस्सेदारी दर्ज की गई थी)। यह वृद्धि निम्न मुद्रास्फीति, स्थिर रोजगार और बढ़ती वास्तविक क्रय शक्ति के कारण संभव हुई है। कृषि क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन ने ग्रामीण उपभोग को बढ़ावा दिया है जबकि कर युक्तिकरण के कारण शहरी उपभोग में सुधार व्यापक मांग की गति को दर्शाता है।

  • वित्त वर्ष 2026 में निवेश गतिविधि में मजबूती आई, सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 7.8% की वृद्धि हुई और जी.डी.पी. में इसकी हिस्सेदारी 30% पर स्थिर रही है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में निरंतरता और निजी निवेश गतिविधि में पुनरुत्थान से इस गति को बल मिला, जैसा कि कंपनियों की घोषणाओं से स्पष्ट है।
  • आपूर्ति पक्ष में सेवाएँ विकास का मुख्य चालक बनी हुई हैं। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में सेवाओं के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में 9.3% की वृद्धि हुई, जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए अनुमानित वृद्धि 9.1% है। यह प्रवृत्ति इस क्षेत्र में व्यापक विस्तार का संकेत देती है।

2. राजकोषीय घटनाक्रम: विश्वसनीय समेकन के माध्यम से स्थिरता को सुदृढ़ करना

  • राजकोषीय प्रबंधन ने भारत के व्यापक आर्थिक व राजकोषीय ढांचे की विश्वसनीयता को मजबूत किया है। मॉर्निंगस्टार डीबीआरएस, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स और रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इंफॉर्मेशन (R&I), इंक. द्वारा 2025 में तीन संप्रभु क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड किए गए।
  • केंद्र सरकार की राजस्व प्राप्ति वित्त वर्ष 2016-2020 में सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 8.5% के औसत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में सकल घरेलू उत्पाद के 9.2% (PA) हो गई। यह सुधार गैर-कॉर्पोरेट कर संग्रह में तेजी के कारण हुआ, जो महामारी से पहले सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 2.4% से बढ़कर महामारी के बाद लगभग 3.3% हो गया।
  • प्रत्यक्ष कर आधार में लगातार वृद्धि हुई है, आयकर रिटर्न दाखिल करने की संख्या वित्त वर्ष 2022 में 6.9 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 9.2 करोड़ हो गई है। रिटर्न दाखिल करने में वृद्धि बेहतर अनुपालन, कर प्रशासन में तकनीक के अधिक उपयोग और आय में वृद्धि के साथ कर के दायरे में आने वाले व्यक्तियों की बढ़ती संख्या को दर्शाती है।
  • अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान कुल जी.एस.टी. संग्रह 17.4 लाख करोड़ रहा है जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.7% की वृद्धि दर्शाता है। जी.एस.टी. राजस्व वृद्धि मोटे तौर पर मौजूदा सांकेतिक जी.डी.पी. वृद्धि के अनुरूप है। उच्च आवृत्ति वाले संकेतक मजबूत लेनदेन विस्तार का संकेत देते हैं जिसमें अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान संचयी ई-वे बिल की मात्रा में साल-दर-साल 21% की वृद्धि हुई है। 
  • केंद्र सरकार का प्रभावी पूंजीगत व्यय महामारी से पहले की अवधि में जी.डी.पी. के औसतन 2.7% से बढ़कर महामारी के बाद लगभग 3.9% हो गया और वित्त वर्ष 25 में जी.डी.पी. के 4% के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
  • राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए विशेष सहायता (SASCI) के माध्यम से केंद्र ने राज्यों को वित्त वर्ष 25 में सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 2.4% पर पूंजीगत व्यय बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया है।

  • महामारी के बाद की अवधि में राज्य सरकारों का संयुक्त राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 2.8% पर स्थिर रहा, जो महामारी से पहले के स्तर के समान था किंतु हाल के वर्षों में वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 3.2% हो गया है जो राज्य के वित्त पर उभरते दबावों को दर्शाता है।
  • भारत ने सार्वजनिक निवेश का उच्च स्तर बनाए रखते हुए भी वर्ष 2020 से अपने सामान्य सरकारी ऋण-से-जी.डी.पी. अनुपात को लगभग 7.1% अंक तक कम कर दिया है।

3. मौद्रिक प्रबंधन और वित्तीय मध्यस्थता: नियामक दृष्टिकोण को परिष्कृत करना

मौद्रिक पहलू

भारत के मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्रों ने वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-दिसंबर 2025) में मजबूत प्रदर्शन किया है जो रणनीतिक नीतिगत कार्रवाइयों व वित्तीय मध्यस्थता चैनलों में संरचनात्मक लचीलेपन द्वारा समर्थित है।

बैंकिंग क्षेत्र का प्रदर्शन

  • अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) की परिसंपत्ति गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है, जैसा कि सितंबर 2025 में उनके जी.एन.पी.ए. अनुपात के 2.2% और निवल एन.पी.ए. अनुपात के 0.5% होने से स्पष्ट है जो क्रमशः कई दशकों के निम्न स्तर व रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुँच गया है।
  • 31 दिसंबर, 2025 तक एस.सी.बी. द्वारा बकाया ऋण में साल-दर-साल वृद्धि दिसंबर 2024 में 11.2% की तुलना में बढ़कर 14.5% हो गई।

वित्तीय समावेशन

  • वर्ष 2014 में शुरू की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत मार्च 2025 तक 55.02 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं जिनमें से 36.63 करोड़ ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। इससे बैंकिंग सुविधाओं से वंचित आबादी के लिए मूलभूत बचत और लेनदेन अवसंरचना स्थापित की गई है।
  • स्टैंड-अप इंडिया योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को नए उद्यम स्थापित करने के लिए 10 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक के बैंक ऋण प्रदान करती है।
  • पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) विनिर्माण, व्यापार, सेवाओं व संबद्ध कृषि गतिविधियों में लगे सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को वित्तपोषण प्रदान करती है। अक्टूबर 2025 तक इस योजना के तहत 55.45 करोड़ ऋण खातों में 36.18 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी थी।

वित्तीय क्षेत्र के अन्य पहलू

  • वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर 2025 तक) के दौरान 235 लाख डीमैट खाते जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 21.6 करोड़ से अधिक हो गई। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सितंबर 2025 में अद्वितीय निवेशकों की संख्या का 12 करोड़ का आंकड़ा पार करना था, जिनमें से लगभग एक-चौथाई महिलाएँ थीं।
  • म्यूचुअल फंड उद्योग का भी विस्तार हुआ, जिसमें दिसंबर 2025 के अंत तक 5.9 करोड़ अद्वितीय निवेशक थे, जिनमें से 3.5 करोड़ (नवंबर 2025 तक) नॉन-टियर-I और टियर-II शहरों से थे, जो पारंपरिक शहरी केंद्रों से परे वित्तीय भागीदारी के प्रसार को रेखांकित करता है।
  • गिफ्ट सिटी में भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने और उसे सही दिशा में लगाने के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है।  

इस क्षेत्र के लिए दृष्टिकोण

  • नियामक गुणवत्ता में प्रणालीगत वृद्धि को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता आई.एम.एफ. और विश्व बैंक द्वारा संयुक्त रूप से 2025 में आयोजित वित्तीय क्षेत्र मूल्यांकन कार्यक्रम (FSAP) के माध्यम से प्राप्त हुई है। 
  • दोनों रिपोर्ट्स में एक तेजी से लचीली, विविध व समावेशी वित्तीय प्रणाली का उल्लेख किया गया है जिसमें कुल वित्तीय क्षेत्र की परिसंपत्ति कैलेंडर वर्ष (CY) 2024 में जी.डी.पी. के लगभग 187% तक पहुंच गई है और पूंजी बाजार कैलेंडर वर्ष 2017 में जी.डी.पी. के 144% से बढ़कर 2024 में 175% हो गया है। आकलन में पाया गया है कि बैंकों एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFCs) के पास गंभीर तनाव की स्थितियों में भी पर्याप्त पूंजी भंडार मौजूद है।

4.वैदेशिक क्षेत्र: दूरगामी लक्ष्य की तैयारी

  • कैलेंडर वर्ष 2005 से कैलेंडर वर्ष 2024 के बीच वैश्विक वस्तु निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी होकर 1% से 1.8% हो गई, जबकि वैश्विक वाणिज्यिक सेवाओं के निर्यात में इसकी हिस्सेदारी दोगुनी से अधिक होकर 2% से 4.3% हो गई।
  • अंकटाड (UNCTAD) की व्यापार एवं विकास रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत व्यापार साझेदार विविधीकरण में अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है, वैश्विक दक्षिण में तीसरे स्थान पर है और वैश्विक उत्तर की सभी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उच्च व्यापार विविधता स्कोर दर्ज करता है।
  • भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 825.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में 6.1% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण सेवा निर्यात में मजबूत वृद्धि थी।
  • वित्त वर्ष 2025 में गैर-पेट्रोलियम निर्यात ऐतिहासिक रूप से 374.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जबकि गैर-पेट्रोलियम, गैर-रत्न एवं आभूषण निर्यात कुल माल निर्यात का लगभग चार-पांचवां हिस्सा था।
  • वित्त वर्ष 2025 में सेवाओं का निर्यात सर्वकालिक उच्च स्तर 387.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें 13.6% की वृद्धि हुई, जिससे प्रौद्योगिकी एवं व्यावसायिक सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई।
  • सेवाओं के निर्यात और प्रेषण से प्राप्त मजबूत निवाल आवक के कारण भारत का चालू खाता घाटा मध्यम बना रहा, जिसने माल व्यापार घाटे की भरपाई की। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में भारत का चालू खाता घाटा, सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.3% था, जो कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर स्थिति में था।
  • वित्त वर्ष 2025 में भारत 135.4 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रेषण राशि के साथ विश्व का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता बना रहा, जिससे वैदेशिक मुद्रा खाते में स्थिरता बनी रही। विकसित अर्थव्यवस्थाओं से प्राप्त प्रेषण का हिस्सा बढ़ा है जो कुशल व पेशेवर श्रमिकों के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।

  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 जनवरी, 2026 तक बढ़कर 701.4 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जिससे लगभग 11 महीनों के आयात की भरपाई हो गई और वैदेशिक ऋण का 94% से अधिक हिस्सा कवर हो गया, जिससे वैदेशिक अस्थिरता के खिलाफ लचीलापन मजबूत हुआ।
  • वैश्विक निवेश की मंदी के बावजूद भारत ने पर्याप्त विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करना जारी रखा और अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह 64.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
  • भारत ने वर्ष 2024 में ग्रीनफील्ड निवेश घोषणाओं में वैश्विक स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया, जिसमें 1,000 से अधिक परियोजनाएँ शामिल थीं और 2020-24 के बीच ग्रीनफील्ड डिजिटल निवेश के लिए सबसे बड़े गंतव्य के रूप में उभरा।

5. मुद्रास्फीति: नियंत्रित एवं स्थिर 

  • भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला की शुरुआत के बाद से न्यूनतम मुद्रास्फीति दर दर्ज की गई है और अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान औसत समग्र मुद्रास्फीति दर 1.7% रही। खुदरा मुद्रास्फीति में यह कमी मुख्य रूप से खाद्य एवं ईंधन के मूल्यों में सामान्य अवमूल्यन प्रवृत्ति के कारण है जो मिलकर भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) बास्केट का 52.7% हिस्सा बनाते हैं।
  • प्रमुख उभरती एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (EMDEs) में भारत ने 2024 की तुलना में 2025 में हेडलाइन मुद्रास्फीति में सबसे तीव्र गिरावट दर्ज की है जो लगभग 1.8% अंक है।

6. कृषि और खाद्य प्रबंधन

  • वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2024 के बीच पशुधन क्षेत्र में मजबूत वृद्धि देखी गई, जिसमें सकल लाभ मूल्य (GVA) में लगभग 195% की वृद्धि हुई। मत्स्य पालन क्षेत्र ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है जिसमें 2014-2024 के दौरान मत्स्य उत्पादन में 2004-14 की तुलना में 140% से अधिक की वृद्धि हुई है। 
  • अच्छी मानसून फसल के चलते कृषि वर्ष (AY) 2024-25 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (LMT) तक पहुंचने का अनुमान है जो पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 लाख मीट्रिक टन अधिक है। यह वृद्धि चावल, गेहूँ, मक्का व मोटे अनाजों (श्री अन्ना) के अधिक उत्पादन के कारण हुई है।

  • खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि के बावजूद कृषि सकल मूल्य वृद्धि (GVA) में लगभग 33% का योगदान देने वाली ‘बागवानी’ कृषि विकास के प्रमुख चालक के रूप में उभरी है। 2024-25 में बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया, जो अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 357.73 एमटी से अधिक है।
  • कृषि विपणन एवं अवसंरचना में दक्षता सुधारने के लिए सरकार कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) उप-योजना को आई.एस.ए.एम. के अंतर्गत और कृषि अवसंरचना कोष (AIF) को लागू कर रही है ताकि किसान-द्वार सुविधाओं को मजबूत किया जा सके और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके। ई-एन.ए.एम. योजना के माध्यम से मूल्य निर्धारण को बेहतर बनाया गया है जिसके तहत 31 दिसंबर, 2025 तक लगभग 1.79 करोड़ किसान, 2.72 करोड़ व्यापारी और 4,698 किसान एवं पशु व्यवसाय संगठन (FPO) शामिल हो चुके हैं जो 23 राज्यों व 4 केंद्र शासित प्रदेशों की 1,522 मंडियों को कवर करते हैं।
  • किसानों की आय को अनिवार्य फसलों के लिए सुनिश्चित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और प्रधानमंत्री-किसान आय हस्तांतरण के माध्यम से सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PMKMY) पेंशन सहायता प्रदान करती है जिससे किसानों की आय सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण मजबूत होता है। 
  • पीएम-किसान योजना की शुरुआत से लेकर अब तक पात्र किसानों को 21 किस्तों में 4.09 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। 31 दिसंबर, 2025 तक पी.एम.के.एम.वाई. के तहत 24.92 लाख किसान पंजीकृत हैं।
  • सरकार ने विकसित भारत– रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम 2025 को अधिनियमित किया है जिसे विकसित भारत– जी-राम-जी अधिनियम, 2025 भी कहा जाता है। यह अधिनियम मनरेगा का व्यापक वैधानिक पुनर्गठन है जिसका उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047की दीर्घकालिक परिकल्पना के अनुरूप बनाना है। 
  • इसका उद्देश्‍य जवाबदेही को मजबूत करना, अवसंरचना परिणामों में सुधार करना तथा आय सुरक्षा को मजबूत करना है। यह ग्रामीण रोजगार नीति में भारत के निर्णायक बदलाव को दर्शाता है। 

7.सेवाएं: स्थिरता से लेकर नए आयामों तक

  • वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में जी.डी.पी. में सेवाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 53.6% हो गई। वित्त वर्ष 2026 के वित्तीय मूल्यांकन के अनुसार, सकल लाभ में सेवाओं की हिस्सेदारी अब तक के उच्चतम स्तर 56.4% पर पहुंच गई, जो आधुनिक, व्यापार योग्य व डिजिटल रूप से वितरित सेवाओं के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
  • भारत सेवाओं का विश्व का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक है और वैश्विक सेवा व्यापार में इसकी हिस्सेदारी 2005 में 2% से बढ़कर 2024 में 4.3% हो गई है जो दोगुने से भी अधिक है।
  • सेवा क्षेत्र विदेशी प्रत्यक्ष निवेश प्रवाह का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है जो वित्त वर्ष 23-25 ​​के दौरान कुल एफ.डी.आई. का औसतन 80.2% है, जो महामारी से पहले की अवधि (वित्त वर्ष 16-20) में 77.7% से अधिक है।

8. उद्योग का अगला चरण : संरचनात्मक रूपांतरण और वैश्विक एकीकरण

  • वैश्विक स्तर पर लगातार बनी हुई प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में औद्योगिक गतिविधि मजबूत हुई और पहली छमाही में उद्योग के सकल बाजार मूल्य में 7.0% (वास्तविक रूप से) की वृद्धि हुई।
  • विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि तेज हुई, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 7.72% व दूसरी तिमाही में 9.13% की वृद्धि हुई है जो संरचनात्मक सुधार को दर्शाती है।
  • 14 क्षेत्रों में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने 20 लाख करोड़ रुपए से अधिक का वास्तविक निवेश आकर्षित किया है, जिससे सितंबर 2025 तक 18.7 लाख करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन/बिक्री और 12.6 लाख से अधिक नौकरियां सृजित हुई हैं।
  • भारत के नवाचार प्रदर्शन में लगातार मजबूती आई है और वैश्विक नवाचार सूचकांक में इसकी रैंकिंग 2019 में 66वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुँच गई है।
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने घरेलू क्षमताओं को बढ़ावा दिया है जिसके तहत 6 राज्यों में 10 सेमीकंडक्टर विनिर्माण और पैकेजिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें लगभग 1.60 लाख करोड़ का निवेश शामिल है।

9. निवेश और अवसंरचना: कनेक्टविटी, क्षमता तथा प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना

  • भारत सरकार का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2018 में 2.63 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 (BE) में 11.21 लाख करोड़ हो गया है जो लगभग 4.2 गुना वृद्धि दर्शाता है, जबकि वित्त वर्ष 2026 (BE) में प्रभावी पूंजीगत व्यय 15.48 लाख करोड़ है, जो बुनियादी ढांचे को एक प्रमुख विकास चालक के रूप में स्थापित करता है।
  • राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क लगभग 60% बढ़कर 91,287 किमी. (वित्त वर्ष 2014) से 1,46,572 किमी. (वित्त वर्ष 2026 दिसंबर तक) हो गया है और परिचालन में हाई-स्पीड कॉरिडोर में लगभग दस गुना वृद्धि हुई है जो 550 किमी (वित्त वर्ष 2014) से 5,364 किमी (वित्त वर्ष 2026, दिसंबर तक) हो गया है।
  • रेलवे अवसंरचना का विस्तार जारी रहा है और मार्च 2025 तक रेल नेटवर्क 69,439 रूट किलोमीटर तक पहुंच गया, वित्त वर्ष 2026 में 3,500 किलोमीटर के लक्षित अतिरिक्त मार्ग और अक्टूबर 2025 तक 99.1% विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल किया गया।
  • भारत घरेलू विमानन बाजार के रूप में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है जहां हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 से बढ़कर 2025 में 164 हो गई है।
  • विद्युत क्षेत्र में निरंतर क्षमता विस्तार दर्ज किया गया और 11.6% (वर्ष-दर-वर्ष) की वृद्धि के साथ नवंबर 2025 तक स्थापित क्षमता 509.74 गीगावाट हो गई और मांग-आपूर्ति का अंतर वित्त वर्ष 2014 में 4.2% से घटकर नवंबर 2025 तक शून्य हो गया।
  • वित्त वर्ष 2025 में पहली बार डिस्कॉम्स ने 2,701 करोड़ का कर पश्चात निवल लाभ (PAT) दर्ज किया। साथ ही, एटी एंड सी (AT&C) घाटे में भी कमी आई है जो वित्त वर्ष 2014 के 22.62% से घटकर वित्त वर्ष 2025 के 15.04% हो गया है। नवंबर 2025 तक कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान लगभग 49.83% है और भारत नवीकरणीय ऊर्जा व स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है।
  • टेली-डेंसिटी 86.76% तक पहुंच गई है और देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में अब 5G सेवाएँ उपलब्ध हैं। अक्टूबर 2025 तक जल जीवन मिशन के तहत 81% से अधिक ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ नल के जल की सुविधा उपलब्ध है।
  • अंतरिक्ष अवसंरचना में स्वायत्त उपग्रह डॉकिंग (SpaDeX) वाला चौथा देश बन गया है। साथ ही, स्वदेशी मिशनों का विस्तार हुआ है और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी है।

10. पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन: एक प्रतिरोधी, प्रतिस्पर्धी व विकासोन्मुखी भारत का निर्माण

वर्ष 2025-26 के दौरान (31 दिसंबर 2025 तक) देश में कुल 38.61 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई है, जिसमें 30.16 गीगावाट सौर ऊर्जा, 4.47 गीगावाट पवन ऊर्जा, 0.03 गीगावाट जैव-ऊर्जा और 3.24 गीगावाट जल विद्युत शामिल है।

11. शिक्षा और स्वास्थ्य: उपलब्धियाँ और भविष्य की रूपरेखा 

  • आज भारत में विश्व की सबसे बड़ी स्कूली प्रणालियों में से एक संचालित होती है जिसके अंतर्गत 14.71 लाख स्कूलों में 24.69 करोड़ छात्रों को शिक्षा प्रदान की जा रही है और इस व्यवस्था को 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक सहयोग प्रदान कर रहे हैं (UDISE+ 2024-25)।
  • भारत ने बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करके स्कूली नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की है। पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं से शिक्षा तक पहुंच व समानता को बढ़ावा मिला है। प्राथमिक स्तर (कक्षा I से V) पर सकल नामांकन अनुपात (GER) 90.9 है, उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा VI से VIII) पर 90.3 है, माध्यमिक स्तर (कक्षा IX और X) पर 78.7 है और उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा XI और XII) पर 58.4 है।

उच्च शिक्षा

  • उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) की संख्या 2014-15 में 51,534 से बढ़कर जून 2025 तक 70,018 हो गई है जिससे शिक्षा तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह वृद्धि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण हुई है। 
  • वर्ष 2014-15 से 2024-25 के बीच प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) की संख्या में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। अब इनकी संख्या 23 IIT, 21 IIM व 20 AIIMS है। साथ ही, ज़ांज़ीबार व अबू धाबी में दो अंतरराष्ट्रीय IIT परिसरों की स्थापना भी हुई है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत उच्च शिक्षा प्रणाली में कई सुधार किए गए हैं।
  • राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCRF) को 170 विश्वविद्यालयों द्वारा अपनाया गया है जिसका उद्देश्य अकादमिक और कौशल-आधारित शिक्षा को मिश्रित करना है।
  • एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के अंतर्गत 2660 संस्थान शामिल किए गए है जिसमें 4.6 करोड़ से अधिक आईडी जारी की गई हैं जिनमें क्रेडिट के साथ 2.2 करोड़ APAAR (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी का सृजन भी शामिल है।
  • 153 विश्वविद्यालयों ने वर्ष 2035 तक 50% जीईआर के एनईपी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लचीले प्रवेश-निकास मार्ग और द्विवार्षिक प्रवेश प्रक्रिया शुरू की है।

स्वास्थ्य

  • 1990 से भारत ने मातृ मृत्यु दर (MMR) में 86% की कमी की है जो वैश्विक औसत 48% से कहीं अधिक है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में 78% की गिरावट दर्ज की गई है जो वैश्विक औसत 61% से कहीं अधिक है। इसी तरह 1990-2023 के दौरान नवजात मृत्यु दर (NMR) में 70% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह गिरावट 54% रही।
  • शिशु मृत्यु दर (IMR) में पिछले दशक में 37% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है जो 2013 में प्रति हजार जीवित जन्मों पर 40 मौतों से घटकर 2023 में 25 हो गई है।

12. रोजगार और कौशल विकास: उन्नत कौशल की ओर 

  • वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में कुल 56.2 करोड़ लोग (15 वर्ष और उससे अधिक आयु के) कार्यरत थे, जो वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में लगभग 8.7 लाख नए रोजगारों के सृजन को दर्शाता है। 
  • संगठित विनिर्माण क्षेत्र को कवर करने वाले वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) के वित्त वर्ष 2024 के परिणाम विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को उजागर करते हैं जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में रोजगार में 6% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि वित्त वर्ष 2023 की तुलना में वित्त वर्ष 2024 में 10 लाख से अधिक नौकरियों का सृजन हुआ है।
  • श्रम संहिता ने औपचारिक रूप से गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों को मान्यता दी है जिससे सामाजिक सुरक्षा, कल्याण कोष व लाभों की सुवाह्यता का विस्तार हुआ है।
  • जनवरी 2026 तक ई-श्रम पोर्टल पर 31 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिकों का सफल पंजीकरण हो चुका है; कुल पंजीकृत लोगों में महिलाओं की संख्या 54% से अधिक है जिससे लिंग-केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच में काफी मजबूती आई है।
  • राष्ट्रीय कैरियर सेवा (NCS) एक एकीकृत मंच है जो रोजगार चाहने वालों, नियोक्ताओं व प्रशिक्षण प्रदाताओं को विभिन्न क्षेत्रों में 59 मिलियन से अधिक पंजीकृत रोजगार चाहने वालों और 5.3 मिलियन नौकरी प्रदाताओं से जोड़ता है तथा इस पर लगभग 80 मिलियन रिक्तियाँ हैं।

 कौशल प्रणाली

  • आई.टी.आई. के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय योजना के तहत 200 हब आई.टी.आई. और 800 स्पोक आई.टी.आई. सहित 1,000 सरकारी आई.टी.आई. को स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल सामग्री और उद्योग-अनुरूप दीर्घ एवं अल्पकालिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से उन्नत करने का प्रस्ताव है।

13. ग्रामीण विकास और सामाजिक प्रगति: भागीदारी से साझेदारी तक 

  • विश्व बैंक ने मुद्रा की क्रय शक्ति को 2021 की कीमतों के अनुसार समायोजित करते हुए गरीबी रेखा को 2.15 अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 3 अमेरिकी डॉलर प्रति दिन कर दिया है। संशोधित आईपीएल के अनुसार, 2022-23 में भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 5.3% और निम्न-मध्यम आय वर्ग की गरीबी की दर 23.9% थी।
  • वित्त वर्ष 2022 से सरकार के सामाजिक सेवा व्यय (SSE) में लगातार वृद्धि का रुझान देखा गया है। वित्त वर्ष 2025-26 (BE) में एस.एस.एस.ई. सकल घरेलू उत्पाद का 7.9% है जबकि 2024-25 (RE) में यह 7.7% और 2023-24 में 7% था।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति 

  • दिसंबर 2025 तक स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण लगभग 3.44 लाख अधिसूचित गाँवों के लक्ष्य के मुकाबले 3.28 लाख गांवों में पूर्ण किया जा चुका है।
  • लगभग 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। प्रमुख उर्वरक कंपनियों ने 2023-24 में अपने संसाधनों का उपयोग करके स्वयं सहायता समूह (SHG) की ड्रोन दीदियों को 1,094 ड्रोन वितरित किए, जिनमें से 500 ड्रोन नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत उपलब्ध कराए गए।

14. भारत में एआई पारिस्थितिकी तंत्र का विकास: आगे की दिशा 

  • विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किए गए छोटे, कार्य-विशिष्ट मॉडल नवाचार को अधिक समान रूप से फैलाने, कंपनियों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करने और भारत के आर्थिक परिदृश्य की विविधता के अनुरूप बेहतर ढंग से ढलने में मदद करते हैं। 
  • भारत में एआई की मांग काल्पनिक भविष्योन्मुखी उपयोगों के बजाय वास्तविक दुनिया की समस्याओं से उभर रही है। स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शहरी प्रबंधन, शिक्षा, आपदा प्रबंधन व सार्वजनिक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय हार्डवेयर पर चलने और कम संसाधनों वाले परिवेश में काम करने वाले एआई सिस्टम की मांग बढ़ रही है।

15. शहरीकरण: भारत के शहरी तंत्र को नागरिकोन्मुख बनाना

नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम इस बात का उदाहरण है कि किस प्रकार उच्च गति वाली क्षेत्रीय कनेक्टिविटी शहरी और अर्ध-शहरी श्रम बाजारों को नया रूप दे सकती है। शहरों और उनके आसपास के क्षेत्रों के बीच यात्रा के समय को काफी कम करके ऐसी प्रणालियाँ रोजगार के अवसरों को बढ़ाती हैं, बहुकेंद्रीय विकास को बढ़ावा देती हैं और प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों पर दबाव कम करती हैं। यह अनुभव महानगरीय क्षेत्रों में गतिशीलता, आवास एवं आर्थिक विकास को एकीकृत करने में क्षेत्रीय रेल की भूमिका को रेखांकित करता है।

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