संदर्भ
- भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) केवल एक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह दोनों महान लोकतांत्रिक देशों के बीच भविष्योन्मुखी, सुदृढ़, नवाचार-आधारित और जन-केंद्रित आर्थिक साझेदारी की आधारशिला है।
- वैश्विक परिदृश्य में तेजी से बदलते आर्थिक समीकरणों के बीच यह समझौता दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक ऐतिहासिक मोड़ पर लेकर आया है। शुल्क रियायतों, बेहतर बाजार पहुंच और व्यापार उदारीकरण के माध्यम से आर्थिक एकीकरण को नया आयाम देने वाला यह समझौता भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए तैयार है।
मजबूत आर्थिक आधारशिला और द्विपक्षीय व्यापार
वर्ष 2025 के आंकड़े दोनों अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक ताकत को प्रदर्शित करते हैं। इस अवधि में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 3.96 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि यूनाइटेड किंगडम की अर्थव्यवस्था 3.84 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज की गई। वस्तुतः दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत हैं, जिसे सीईटीए और अधिक गति प्रदान करेगा:
- वस्तु व्यापार (2025–26) : दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 25.12 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत ने यूके को 13.44 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया, जबकि आयात 11.68 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसके परिणामस्वरूप भारत को 1.76 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) प्राप्त हुआ।
- सेवा व्यापार (2024) : सेवा क्षेत्र में द्विपक्षीय व्यापार 35.44 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 21.66 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 13.78 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया। इसके चलते भारत को सेवाओं के क्षेत्र में 7.88 अरब अमेरिकी डॉलर का महत्वपूर्ण अधिशेष प्राप्त हुआ।
राष्ट्रीय हितों की रक्षा और संतुलित बाजार पहुंच
सीईटीए की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मुक्त व्यापार और भारत के रणनीतिक हितों के बीच एक उत्कृष्ट संतुलन स्थापित करता है। भारत ने अपनी 89.5% टैरिफ लाइनों पर शुल्क रियायतें दी हैं, जिसके तहत यूके के 91% निर्यात को कवर किया गया है। भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कई विशेष प्रावधान किए गए हैं:
- संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण : दुग्ध उत्पाद, दालें, सेब, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, सब्जियां और अनाज जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है। इसके अलावा सोना, प्रयोगशाला में निर्मित हीरे, स्मार्टफोन और ऑप्टिकल फाइबर जैसे उच्च-मूल्य वाले उत्पादों का भी संरक्षण किया गया है।
- घरेलू विनिर्माण और पीएलआई को बढ़ावा : जिन क्षेत्रों में मेक इन इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत घरेलू क्षमता विकसित की जा रही है, वहां शुल्क रियायतें 5, 7 या 10 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएंगी।
- ऑटोमोबाइल और ईवी क्षेत्र : भारत ने एक संतुलित कोटा-आधारित उदारीकरण रणनीति अपनाई है। प्रतिवर्ष 37,000 यात्री वाहनों (सीबीयू) के आयात हेतु कोटा-आधारित चरणबद्ध बाजार पहुंच दी गई है। भारतीय विनिर्माताओं के हितों की रक्षा के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर रियायतें केवल छठे वर्ष से लागू होंगी, ताकि घरेलू कंपनियों को अपनी तकनीक और प्रतिस्पर्धात्मकता सुधारने का पर्याप्त समय मिल सके।
प्रमुख क्षेत्रों को होने वाले क्षेत्रवार लाभ
सीईटीए के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था के श्रम-प्रधान और विनिर्माण क्षेत्रों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की उम्मीद है :
वस्त्र और परिधान उत्पाद
- यूके प्रतिवर्ष 28.8 अरब अमेरिकी डॉलर के वस्त्रों का आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी वर्तमान में केवल 1.79 अरब डॉलर (6.1%) है।
- इस समझौते के तहत भारत को 1,143 टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी।
- इससे बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
- रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल और हस्तशिल्प जैसे रोजगार-परक क्षेत्रों को इससे सीधे लाभ होगा।
कृषि, बागान और खाद्य प्रसंस्करण
- कृषि क्षेत्र की 1,437 टैरिफ लाइनों को शुल्क-मुक्त किया गया है। अगले तीन वर्षों में भारत के कृषि निर्यात में 50% से अधिक की वृद्धि होने का अनुमान है, जिससे आंध्र प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों के किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
- इसके अतिरिक्त, प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र की 985 टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच दी गई है। बागान क्षेत्र के तहत इंस्टेंट कॉफी को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय निर्यातक यूरोपीय देशों के प्रतिस्पर्धियों का डटकर मुकाबला कर सकेंगे।
चमड़ा, फुटवियर और खेल सामग्री
- यूके के 8.9 अरब अमेरिकी डॉलर के चमड़ा और फुटवियर बाजार में भारतीय निर्यातकों के लिए नए रास्ते खुले हैं।
- शुल्क-मुक्त पहुंच की बदौलत भारत का इस क्षेत्र में निर्यात 90 करोड़ अमेरिकी डॉलर को पार करने की संभावना है, जिससे उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के क्लस्टर्स में ग्रामीण और अर्ध-शहरी रोजगार बढ़ेगा।
- खेल सामग्री और खिलौना उद्योग में 15% की वृद्धि के साथ वर्ष 2030 तक निर्यात को 18.69 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स
- यूके के 193.52 अरब अमेरिकी डॉलर के इंजीनियरिंग आयात बाजार में भारत की हिस्सेदारी वर्तमान में केवल 4.28 अरब डॉलर है।
- समझौते के तहत 1,659 टैरिफ लाइनों पर 18% तक के शुल्कों को समाप्त कर दिया गया है, जिससे वर्ष 2029-30 तक भारत का इंजीनियरिंग निर्यात दोगुना होकर 7.5 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। स्मार्टफोन, ऑप्टिकल फाइबर और आईटी उत्पादों के निर्यात में भी भारी उछाल की उम्मीद है।
औषध (फार्मास्युटिकल्स) और रसायन क्षेत्र
- दवाओं के लिए 56 टैरिफ लाइनों और सर्जिकल व डायग्नोस्टिक उपकरणों पर शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं।
- ब्रेक्सिट के बाद चीन पर निर्भरता कम करने की यूके की नीति के बीच भारतीय जेनेरिक दवाएं वहां के बाजार में किफायती और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरेंगी।
- रसायन क्षेत्र के लिए भी 1,206 टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान की गई है।
रत्न एवं आभूषण
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यूके के 4 अरब अमेरिकी डॉलर के आभूषण बाजार में शुल्क छूट मिलने से अगले 2-3 वर्षों में भारत का आभूषण निर्यात दोगुना होने की उम्मीद है, जिससे सूरत, जयपुर और मुंबई के शिल्पकारों को बड़े पैमाने पर काम मिलेगा।
सेवा क्षेत्र, पेशेवरों की आवाजाही और एमआरए
सेवा क्षेत्र भारत-यूके आर्थिक साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ है। सीईटीए के अंतर्गत भारत ने यूके के सभी 12 प्रमुख सेवा क्षेत्रों और 137 उप-क्षेत्रों में अभूतपूर्व बाजार पहुंच सुनिश्चित की है :
- पारस्परिक मान्यता समझौते (MRA) : दोनों देश नर्सिंग, लेखांकन (अकाउंटेंसी) और वास्तुकला (आर्किटेक्चर) जैसी व्यावसायिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता के लिए समझौता लागू होने के 12 महीनों के भीतर एमआरए को आगे बढ़ाएंगे।
- आवाजाही में सुगमता : यूके ने भारतीय पेशेवरों के प्रवेश पर किसी भी प्रकार की संख्यात्मक सीमा या आर्थिक आवश्यकता परीक्षण (ENT) न लगाने पर सहमति जताई है। संविदात्मक सेवा प्रदाताओं के लिए प्रतिवर्ष 1,800 पदों का समर्पित कोटा निर्धारित किया गया है। पेशेवरों के अस्थायी प्रवास की समय सीमा भी स्पष्ट कर दी गई है:
- ठहरने की अवधि
- व्यावसायिक आगंतुक (BV) किसी भी 6 माह की अवधि में 90 दिन
- अंतर-कंपनी स्थानांतरित कर्मचारी (ICT) साथियों और आश्रितों सहित 3 वर्ष
- संविदात्मक सेवा प्रदाता (CSS) 33 उप-क्षेत्रों में किसी भी 24 माह की अवधि में 12 माह
- स्वतंत्र पेशेवर (IP) 16 उप-क्षेत्रों में किसी भी 24 माह की अवधि में 12 माह
- डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (DCC) : यह समझौता एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत अल्पकालिक नियुक्तियों (60 माह तक) पर जाने वाले भारतीय पेशेवरों को अब यूके की राष्ट्रीय बीमा प्रणाली में दोहरा सामाजिक सुरक्षा योगदान (वेतन का लगभग 23%) नहीं देना होगा। इससे लगभग 75,000 पेशेवरों और 900 कंपनियों को सीधे लाभ होगा और प्रतिवर्ष 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की बचत होगी।
रणनीतिक साझेदारी, निवेश और प्रवासी समुदाय का प्रभाव
आर्थिक संबंधों से परे, भारत और यूके के बीच जन-से-जन का जुड़ाव बहुत गहरा है :
- निवेश साझेदारी : यूके भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने सितंबर 2024 तक 35 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। इसके विपरीत यूके में भारत का निवेश 19 अरब अमेरिकी डॉलर है। यूके में सक्रिय 971 भारतीय कंपनियां वहां 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं, जबकि भारत में कार्यरत 667 ब्रिटिश कंपनियां 5 लाख से अधिक भारतीयों को रोजगार दे रही हैं।
- आवाजाही साझेदारी और युवा पेशेवर योजना : प्रवासन एवं आवाजाही साझेदारी (MMP) के तहत दोनों देशों के बीच संबंधों को गति दी गई है। यंग प्रोफेशनल स्कीम के तहत 18 से 30 वर्ष के स्नातकों को एक-दूसरे के देश में 2 साल तक रहने और काम करने के लिए प्रतिवर्ष 3,000 वीजा जारी किए जाते हैं।
- भारतीय प्रवासियों की भूमिका : यूके में रहने वाले लगभग 18.64 लाख भारतीय मूल के प्रवासी (वहां की आबादी का 2.6%) वहां की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के अनुसार, यूके में 65,000 से अधिक कंपनियों का स्वामित्व भारतीय प्रवासियों के पास है।
सीईटीए के अंतर्गत अवसर
आगे की राह : भारत–यूनाइटेड किंगडम के बीच अधिक सशक्त आर्थिक साझेदारी की ओर
- भारत–यूनाइटेड किंगडम सीईटीए दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है। यह बेहतर बाज़ार पहुँच के साथ व्यापार, निवेश, नवाचार और पेशेवरों की आवाजाही के नए अवसर प्रदान करता है।
- इस समझौते से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ समावेशी और सतत् विकास को भी बढ़ावा मिलने की अपेक्षा है। यह समझौता भारत–यूनाइटेड किंगडम के बीच एक सुदृढ़, लचीली और भविष्य के लिए तैयार साझेदारी की आधारशिला रखता है।