पिछले ग्यारह वर्षों में, डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने शासन व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता में व्यापक परिवर्तन किया है- जिससे वे अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बन गए हैं। यह परिवर्तन शहरों से आगे बढ़कर ग्रामीण भारत तक पहुँच चुका है, जहाँ तकनीक अब आर्थिक सशक्तिकरण, आजीविका को मजबूती प्रदान करने और समुदाय-आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।
इस पूरे परिदृश्य में, ई-सरस (सरस आजीविका) सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक बनकर उभरा है। इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत विकसित किया गया है।
ई-सरस (eSARAS) प्लेटफॉर्म के बारे में
ई-सरस डीएवाई-एनआरएलएम का आधिकारिक ऑनलाइन बाज़ार है, जिसे विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों और उनके महासंघों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए विकसित किया गया है।
यहाँ उपलब्ध बेहतरीन और चुनिंदा हस्तशिल्प उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं- जैसे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध चंदेरी साड़ियों के बुनकरों से लेकर राजस्थान के संगमरमर शिल्पकारों तक, तथा जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों में बसे पश्मीना उत्पाद तैयार करने वाले कारीगरों तक।
ई-सरस पर उपलब्ध प्रत्येक उत्पाद अपने साथ एक अनूठी कहानी समेटे हुए है, और आपकी प्रत्येक खरीदारी सीधे उस शिल्पकार से जुड़ने का एक माध्यम है जिसने इसे तैयार किया है।
प्रमुख श्रेणियों में उपलब्ध स्थानीय उत्पाद:
घर एवं गृह-सज्जा
महिलाओं के परिधान एवं सहायक सामग्री
पुरुषों के परिधान एवं सहायक सामग्री
व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद
खाद्य उत्पाद
बच्चों के खिलौने एवं सहायक सामग्री
प्लेटफार्म की विशेषताएँ:
ई-सरस के माध्यम से 8.62 करोड़ से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों के पास एक डिजिटल स्टोरफ्रंट है, जिनमें से फरवरी 2024 तक 85% सीधे ग्रामीण विकास मंत्रालय के नेटवर्क से जुड़े हैं।
यह प्लेटफॉर्म उन्हें न सिर्फ एक बाज़ार उपलब्ध कराता है, बल्कि विपणन, ब्रांडिंग और परिवहन व आपूर्ति के लिए संस्थागत सहायता भी प्रदान करता है।
ई-सरस ओएनडीसी, उमंग और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों के साथ लगातार बढ़ते एकीकरण के माध्यम से, ग्रामीण उत्पादकों को भारत की शिल्प विरासत को संरक्षित रखते हुए बड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार कर रहा है। जैसे-जैसे यह इकोसिस्टम आगे बढ़ रहा है, इसके स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करने और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।
वस्तुतः ई-सरस इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे डिजिटल इंडिया महिलाओं को सशक्त बना रहा है, भारत की समृद्ध हस्तशिल्प विरासत को संरक्षित कर रहा है और महिला-नेतृत्व वाले समावेशी ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान कर रहा है।