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यूथेलिया जुबींगरगी

संदर्भ 

  • हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के लेपराडा जिले के घने जंगलों से शोधकर्ताओं ने तितली की एक नई दुर्लभ प्रजाति की खोज की है, जिसका नाम असम के महान सांस्कृतिक प्रतीक और दिवंगत गायक जुबीन गर्ग के सम्मान में 'यूथेलिया जुबींगरगी' (Euthalia jubingargi) रखा गया है। 

यूथेलिया जुबींगरगी (Euthalia jubingargi) के बारे में   

  • यह तितली 600-750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अर्ध-सदाबहार जंगलों में पाई गई है। 
  • कई महीनों के कठिन शोध के बाद भी टीम केवल दो नर तितलियों को ही खोज पाई, जिनमें से एक का नमूना लिया गया। 
  • इससे यह स्पष्ट होता है कि यह प्रजाति या तो बहुत दुर्लभ है या फिर एक विशिष्ट स्थान तक ही सीमित है। 

विशेषताएँ 

  • वंश : यह यूथेलिया समूह से संबंधित है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पाया जाता है। 
  • दिखावट : इसके पंख हल्के धब्बों वाले भूरे रंग के होते हैं।
  • विशिष्टता : अपने समूह की अन्य 80 प्रजातियों की तुलना में इसके पंखों का पैटर्न और शारीरिक संरचना बिल्कुल भिन्न है, जो इसे एक स्वतंत्र प्रजाति सिद्ध करती है। 

व्यवहार और प्राकृतिक आवास

  • क्षेत्रीय सर्वेक्षणों के अनुसार, यूथेलिया जुबींगरगी  ठंडे और छायादार वन क्षेत्रों को अधिक पसंद करती है। इसके व्यवहार के बारे में कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं : 
    • यह मुख्य रूप से दोपहर से पहले और शुरुआती दोपहर में सक्रिय रहती है। 
    • इसे पेड़ों का रस पीते और जलधाराओं के पास नम मिट्टी से खनिज (Mud-puddling) इकट्ठा करते देखा गया।
    • घने जंगलों की निचली वनस्पतियाँ इसके अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। 

खोज और शोध दल 

  • शोधकर्ताओं ने इस प्रजाति का सामान्य नाम 'बासर ड्यूक' (Basar Duke) प्रस्तावित किया है। यह खोज भारतीय एनजीओ एसोसिएशन फॉर एडवांसमेंट ऑफ एंटोमोलॉजी द्वारा प्रकाशित प्रतिष्ठित पत्रिका 'एंटोमोन' के नवीनतम अंक में सार्वजनिक की गई है। 

भविष्य की राह  

  • हालांकि इस प्रजाति की पहचान हो चुकी है, लेकिन वैज्ञानिक अभी भी इसके जीवन चक्र, प्रजनन के तरीके और उन विशिष्ट पौधों (Host plants) के बारे में अनभिज्ञ हैं जिन पर यह निर्भर करती है। वस्तुतः शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज से क्षेत्र की जैव-विविधता के संरक्षण को एक नई दिशा मिलेगी।

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