भारतीय नौसेना विभिन्न सहयोगी देशों के साथ सी ड्रैगन 2026 अभ्यास (Exercise Sea Dragon 2026) में भाग ले रही है। यह एक बहुराष्ट्रीय पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) अभ्यास है जिसका संचालन अमेरिकी नौसेना द्वारा किया जाता है।
अभ्यास का स्वरूप
- सी ड्रैगन एक वार्षिक सैन्य अभ्यास है जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और सहभागी देशों के बीच सहयोग व समन्वय को बढ़ाना है।
- इसका आयोजन वर्ष 2019 से लगातार एंडरसन वायु सेना बेस, गुआम में किया जा रहा है जो पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित एक महत्वपूर्ण सामरिक स्थल है।
- इस अभ्यास में भाग लेने वाले देश लंबी दूरी के समुद्री निगरानी विमानों, जैसे पी-8 पोसीडॉन (P-8 Poseidon) का उपयोग करते हैं।
- यह अभ्यास समान प्रकार के सैन्य प्लेटफॉर्म संचालित करने वाले देशों के बीच समन्वय (Interoperability) को परखने का अवसर प्रदान करता है। इसके तहत डेटा संचार प्रणाली, सामरिक प्रक्रियाएँ और परिचालन मानकों का सामंजस्य स्थापित किया जाता है जो वास्तविक संयुक्त अभियानों में अत्यंत उपयोगी होता है।
सी ड्रैगन 2026 में भागीदारी
- इस वर्ष के अभ्यास में निम्नलिखित देशों की सैन्य इकाइयाँ शामिल हैं —
- अमेरिकी नौसेना
- भारतीय नौसेना
- रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फ़ोर्स
- जापान मैरीटाइम सेल्फ़-डिफ़ेंस फ़ोर्स
- रॉयल न्यूज़ीलैंड एयर फ़ोर्स
- इस अभ्यास के दौरान प्रतिभागियों की कार्यकुशलता का मूल्यांकन उनकी गति, सटीकता और सामूहिक मिशन संचालन की क्षमता के आधार पर किया जाता है। इससे पनडुब्बी रोधी युद्ध कौशल में सुधार होता है और विभिन्न सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होता है।
- अभ्यास के प्रशिक्षण चरण में वायुसेना दलों की दक्षता को क्रमिक रूप से विकसित किया जाता है। पहले काल्पनिक लक्ष्यों पर अभ्यास कराया जाता है और बाद में वास्तविक पनडुब्बियों की पहचान एवं ट्रैकिंग कराई जाती है।
- अभ्यास के प्रत्येक चरण का आकलन किया जाता है और कुल मिलाकर सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले देश को प्रतिष्ठित ‘ड्रैगन बेल्ट’ सम्मान प्रदान किया जाता है।