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FAO रिपोर्ट 2026: मत्स्य उत्पादन में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर

चर्चा में क्यों?

संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा जारी "द स्टेट ऑफ वर्ल्ड फिशरीज एंड एक्वाकल्चर 2026 (SOFIA 2026)" रिपोर्ट के अनुसार भारत वर्ष 2024 में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा जलीय जीव (Aquatic Animals) उत्पादक देश बन गया है। भारत ने वैश्विक उत्पादन में 9 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि चीन पहले स्थान पर रहा।

प्रमुख बिन्दु 

  • रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अंतर्देशीय (Inland) मत्स्य उत्पादन में विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया है तथा जलीय कृषि (Aquaculture) उत्पादन में भी दूसरा स्थान हासिल किया है। 
  • यह उपलब्धि भारत के बढ़ते मत्स्य क्षेत्र, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।

FAO की SOFIA 2026 रिपोर्ट क्या है ?

  • State of World Fisheries and Aquaculture (SOFIA) खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की प्रमुख वैश्विक रिपोर्ट है, जो विश्व में मत्स्य पालन, जलीय कृषि, खाद्य सुरक्षा, पोषण और समुद्री संसाधनों की स्थिति का आकलन करती है।
  • यह रिपोर्ट सरकारों और नीति-निर्माताओं को सतत मत्स्य प्रबंधन तथा जलीय खाद्य प्रणालियों के विकास के लिए दिशा-निर्देश प्रदान करती है।

भारत की प्रमुख उपलब्धियां

1. विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश

  • वर्ष 2024 में भारत ने वैश्विक जलीय जीव उत्पादन में लगभग 9 प्रतिशत योगदान दिया और चीन के बाद दूसरा स्थान प्राप्त किया।
  • यह उपलब्धि भारत के मत्स्य क्षेत्र में हुए निरंतर निवेश, तकनीकी प्रगति और सरकारी योजनाओं की सफलता को दर्शाती है।

2. अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में विश्व में प्रथम

  • भारत ने नदियों, झीलों, तालाबों और अन्य मीठे जल स्रोतों से 22 लाख टन (2.2 मिलियन टन) मत्स्य उत्पादन किया।
  • इस प्रकार भारत ने बांग्लादेश (1.4 मिलियन टन) को पीछे छोड़ते हुए अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया।
  • अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन का महत्व
    • ग्रामीण रोजगार का प्रमुख स्रोत
    • पोषण सुरक्षा में योगदान
    • किसानों की आय में वृद्धि
    • जल संसाधनों का बेहतर उपयोग

3. जलीय कृषि (Aquaculture) में दूसरा स्थान

  • भारत वैश्विक एक्वाकल्चर उत्पादन में 12 प्रतिशत योगदान के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
  • भारत, चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम और बांग्लादेश मिलकर विश्व के कुल 82 प्रतिशत फार्म-आधारित जलीय जीव उत्पादन का योगदान करते हैं।
  • यह दर्शाता है कि एशिया विश्व के जलीय कृषि क्षेत्र का केंद्र बन चुका है।

वैश्विक मत्स्य उत्पादन की स्थिति

  • रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में वैश्विक मत्स्य एवं जलीय कृषि उत्पादन बढ़कर 235 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
  • इसमें शामिल हैं -
    • 195 मिलियन टन जलीय जीव (Aquatic Animals)
    • 40 मिलियन टन शैवाल (Algae)
    • यह वर्ष 2022 की तुलना में लगभग 5.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

एक्वाकल्चर बना विकास का प्रमुख आधार

  • वैश्विक एक्वाकल्चर उत्पादन वर्ष 2024 में बढ़कर 142 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
  • यह पहली बार नहीं है जब जलीय कृषि ने मत्स्य क्षेत्र की वृद्धि को गति दी हो, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य में वैश्विक खाद्य मांग को पूरा करने में एक्वाकल्चर की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।

समुद्री संसाधनों पर बढ़ता संकट

  • जहां उत्पादन में वृद्धि हुई है, वहीं समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव भी बढ़ रहा है।
  • रिपोर्ट के अनुसार -
    • वर्ष 2021 में जैविक रूप से टिकाऊ (Biologically Sustainable) समुद्री मत्स्य भंडार का हिस्सा 64.5 प्रतिशत था।
    • वर्ष 2023 में यह घटकर 62.4 प्रतिशत रह गया।
    • यह संकेत देता है कि अत्यधिक मत्स्य दोहन (Overfishing) और समुद्री संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण दीर्घकालिक स्थिरता एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

कौन खा रहा है सबसे अधिक मछली ?

  • रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 90 प्रतिशत से अधिक जलीय खाद्य उत्पाद सीधे मानव उपभोग के लिए उपयोग किए जाते हैं।

प्रति व्यक्ति उपलब्धता (2024)

क्षेत्र

प्रति व्यक्ति उपलब्धता

एशिया

26.3 किलोग्राम

विश्व औसत

21.3 किलोग्राम

यूरोप

20-22 किलोग्राम

उत्तरी अमेरिका

20-22 किलोग्राम

ओशिनिया

20-22 किलोग्राम

लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन

10.1 किलोग्राम

अफ्रीका

9.1 किलोग्राम

  • एशिया में मछली और अन्य जलीय खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सर्वाधिक है, जबकि अफ्रीका में यह सबसे कम है।

भारत के लिए महत्व

  • भारत की उपलब्धियां केवल उत्पादन वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव हैं-

आर्थिक महत्व

  • मत्स्य निर्यात में वृद्धि
  • विदेशी मुद्रा अर्जन
  • ब्लू इकॉनमी को मजबूती
  • ग्रामीण एवं तटीय अर्थव्यवस्था का विकास

सामाजिक महत्व

  • पोषण सुरक्षा में सुधार
  • रोजगार सृजन
  • किसानों एवं मछुआरों की आय में वृद्धि
  • खाद्य सुरक्षा को मजबूती

रणनीतिक महत्व

  • ब्लू इकॉनमी मिशन को गति
  • सतत समुद्री संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा
  • भारत को वैश्विक मत्स्य बाजार में मजबूत स्थिति

चुनौतियां

  • हालांकि भारत ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, फिर भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं -
    • समुद्री मत्स्य संसाधनों पर बढ़ता दबाव
    • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
    • अत्यधिक मत्स्य दोहन (Overfishing)
    • जल प्रदूषण
    • कोल्ड चेन एवं भंडारण अवसंरचना की कमी
    • छोटे मछुआरों की आय सुरक्षा

निष्कर्ष

FAO की SOFIA 2026 रिपोर्ट भारत के मत्स्य क्षेत्र की उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करती है। विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक और अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन में प्रथम स्थान प्राप्त करना भारत की एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, इस सफलता को दीर्घकालिक बनाए रखने के लिए सतत मत्स्य प्रबंधन, समुद्री संसाधनों का संरक्षण, आधुनिक जलीय कृषि तकनीकों का विस्तार तथा ब्लू इकॉनमी आधारित विकास रणनीति को और मजबूत करना आवश्यक होगा।

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