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बिहार में पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र

(प्रारंभिक परीक्षा : राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र- 3: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि)

संदर्भ 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिहार में एक लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) आधारित राज्य के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र की घोषणा की है। यह संयंत्र केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत स्थापित किया जाएगा। 

प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बारे में 

  • स्थल : नवादा जिले के रजौली में 
  • संयंत्र की क्षमता : 2,000 मेगावाट 
  • विकासकर्ता : न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) के संयुक्त उद्यम के तहत विकसित
  • लाभ : 
    • यह संयंत्र बिहार को अधिकतम विद्युत् आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, जो औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
    • यह बिहार को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
    • पर्यावरणीय दृष्टिकोण से यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

परमाणु ऊर्जा मिशन के बारे मे 

  • लक्ष्य : लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देकर परमाणु ऊर्जा क्षमता को बढ़ावा देना 
    • इस मिशन के तहत वर्ष 2033 तक कम-से-कम पांच स्वदेशी रूप से विकसित लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों को चालू किया जाएगा।  
  • बजट आवंटन : 20,000 करोड़ 
  • संशोधन : इस मिशन के तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण एवं संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 तथा परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।  
  • महत्व : 
    • वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता एवं वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को पूर्ण करने के अनुरूप 
    • वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लगभग 75% के लिए कोयले जैसे पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर है। इसलिए यह मिशन परमाणु ऊर्जा को एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR)

  • परिचय : ये छोटे परमाणु रिएक्टर हैं जो प्राय: 300 मेगावाट से कम विद्युत् का उत्पादन करते हैं। 
    • इसके विपरीत पारंपरिक प्रेशराइज्ड हैवी वाटर परमाणु रिएक्टर (PHWR) प्राय: 500 मेगावाट या अधिक विद्युत् उत्पादन की क्षमता रखते हैं।
  • लाभ : ये अपेक्षाकृत सरल एवं माड्यूलर डिजाइन है जिसके कारण इनके घटकों को साइट पर निर्माण करने के बजाय कारखाने में ही असेम्बल किया जा सकता है। इसके अन्य लाभ निम्नलिखित हैं-  
    • पारंपरिक रिएक्टरों की तुलना में आकार में बहुत छोटे
    • लागत प्रभावी 
    • कारखाने में निर्माण 
    • कम स्थान घेरना 
    • लचीला परिचालन 
  • विकास : वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 80 वाणिज्यिक एस.एम.आर. डिज़ाइन पर काम चल रहा है जिसमें भारत का अपना भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर भी शामिल है।
    • वर्तमान सरकार ने अगले दशक में लगभग 40-50 ऐसे परमाणु रिएक्टर लगाने का लक्ष्य रखा है। 
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