ग्रेट निकोबार परियोजना

संदर्भ 

  • केंद्र सरकार की ग्रेट निकोबार द्वीप समूह (जीएनआई) में प्रस्तावित विशाल अवसंरचना परियोजना के कारण प्रभावित निकोबारी आदिवासी समुदायों को उनकी पारंपरिक भूमि पर पुनर्वासित करने के लिए तैयार किए गए मसौदा योजना ने नई उलझनें पैदा कर दी हैं। इससे स्थानीय लोगों के बीच पहले से मौजूद चिंताएँ और गहरी हो गई हैं।
  • ये आदिवासी समुदाय वर्ष 2022 में अपनी सहमति वापस लेने के बाद से करीब चार वर्षों से 92,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके वन अधिकारों का अब तक उचित तरीके से समाधान नहीं किया गया है। 

ग्रेट निकोबार परियोजना के बारे में  

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम लिमिटेड (ANIIDCO) द्वारा प्रस्तावित यह योजना एक महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजना है। इसका लक्ष्य द्वीप का कायाकल्प करना है, जिसके चार मुख्य स्तंभ हैं: 
    • एक अत्याधुनिक अंतर्राष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT)।
    • 450 मेगावाट का हाइब्रिड (गैस और सौर) पावर प्लांट।
    • एक विस्तृत टाउनशिप और शहरी विकास क्षेत्र।
    • एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा। 
  • इस विशाल निर्माण के लिए लगभग 130.75 वर्ग किलोमीटर वन भूमि की आवश्यकता होगी, जो पूरे द्वीप के क्षेत्रफल का करीब 18% है। 
  • अनुमान है कि 2052 तक पूर्ण होने पर यह परियोजना 1.28 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करेगी। हालांकि, इसके पर्यावरणीय प्रभावों ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। 

विकास यात्रा और कानूनी प्रक्रिया 

  • इस परियोजना की आधिकारिक रूपरेखा मई 2021 में शुरू हुई। जिसके प्रमुख पड़ाव निम्नलिखित हैं:
  • अक्टूबर 2022 में परियोजना के प्रथम चरण को वन मंजूरी प्रदान की गई।
  • नवंबर 2022 में पर्यावरण और तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) की अनुमति मिली।
  • इन मंजूरियों को न्यायालय में चुनौती दी गई। अप्रैल 2023 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने प्रवाल भित्तियों (Corals) के संरक्षण और डेटा की कमी जैसे मुद्दों पर चिंता जताई और एक उच्चाधिकार समिति (HPC) का गठन किया।

परियोजना भारत की राष्ट्रीय आवश्यकता  

भारत सरकार इस परियोजना को रणनीतिक और रक्षात्मक दृष्टि से अपरिहार्य मानती है। इसके प्रमुख कारण हैं: 

  • सामरिक स्थिति: ग्रेट निकोबार मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 40 किमी दूर है। यह हिंद महासागर में वैश्विक शक्तियों की बढ़ती सक्रियता पर नजर रखने के लिए एक अग्रिम चौकी का काम करेगा। 
  • आर्थिक लाभ: एक बड़ा ट्रांसशिपमेंट हब बनने से भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार का केंद्र बनेगा। इससे विदेशी बंदरगाहों पर भारतीय माल की निर्भरता कम होगी और कीमती विदेशी मुद्रा की बचत होगी। 
  • संसाधन सुरक्षा: द्वीप पर स्थायी मानवीय उपस्थिति से समुद्री संसाधनों के अवैध दोहन और घुसपैठ पर लगाम लगेगी। 

पारिस्थितिकी और पर्यावरणीय चुनौतियाँ 

ग्रेट निकोबार की जैव विविधता अद्वितीय है, जो अब विकास के साथ द्वंद्व में है: 

  • प्रवाल भित्तियाँ (Corals): सर्वेक्षणों में 20,668 प्रवाल कॉलोनियों की पहचान हुई है। योजना के तहत 16,150 कॉलोनियों को अन्यत्र स्थानांतरित (Translocate) किया जाएगा। 
  • दुर्लभ प्रजातियाँ: यह द्वीप लेदरबैक कछुओं, निकोबार मेगापोड और खारे पानी के मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास है। वस्तुतः पर्यावरणविदों को डर है कि गलाथिया खाड़ी में निर्माण से इनका अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। 
  • भूकंपीय जोखिम: विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र अत्यधिक सक्रिय विवर्तनिक (Tectonic) ज़ोन में है, जिसका पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) में उचित विश्लेषण नहीं किया गया है।  

जनजातीय अधिकार और सामाजिक प्रभाव 

यह द्वीप शोम्पेन और निकोबारी जनजातियों का पैतृक निवास है। इस विषय पर एनजीटी के मुख्य बिंदु रहे:

  • विस्थापन नहीं: विशेषज्ञ समिति के अनुसार, किसी भी जनजातीय बस्ती को हटाया नहीं जाएगा। 
  • कानूनी संरक्षण: उनके अधिकारों की रक्षा वन अधिकार अधिनियम के तहत की जाएगी।
  • विवाद: हालांकि, कुछ जनजातीय नेताओं ने दबाव में सहमति प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम लिमिटेड (ANIIDCO) को इन समूहों के कल्याण के लिए अलग से बजट आवंटित करना होगा। 

एनजीटी (NGT) का निर्णय 

न्यायाधिकरण ने राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए परियोजना को हरी झंडी दे दी है। ट्रिब्यूनल के मुख्य तर्क थे: 

  • व्यावहारिक दृष्टिकोण: राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में केवल तकनीकी बारीकियों के आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
  • प्रवाल स्थिति: जेडएसआई (ZSI) की रिपोर्ट के आधार पर माना गया कि मुख्य कार्य क्षेत्र में केवल बिखरी हुई प्रवाल कॉलोनियाँ हैं, जिन्हें शिफ्ट किया जा सकता है।
  • क्षेत्रीकरण (Zoning): यह स्वीकार किया गया कि परियोजना का कोई भी हिस्सा सबसे संवेदनशील क्षेत्र में नहीं आता है। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT