चर्चा में क्यों ?
जैसे-जैसे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने की गति तेज हो रही है, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी एक बड़ी चुनौती बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान नीति शहरी उच्च इमारतों और सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट्स पर अत्यधिक केंद्रित है, जबकि अधिकांश चार्जिंग वास्तव में घरों में होती है, खासकर टियर 2 और टियर 3 शहरों तथा छोटे कस्बों में।

घर पर चार्जिंग की आवश्यकता:
- काज़म के सह-संस्थापक अक्षय शेखर के अनुसार, “आवासीय चार्जिंग सिर्फ शीर्ष पांच महानगरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
- भारत में छोटे शहर और कस्बे भी इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में तेजी दिखा रहे हैं, जैसे बरेली, आगरा, लखनऊ और सिमिगुडी।”
- सारांश में, घर पर चार्जिंग की सुविधा केवल सुविधा का मामला नहीं है,
- बल्कि ईवी अपनाने की दर को बढ़ाने और शहरों के बाहर ईवी उपयोग को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण उपाय है।
प्रमुख चुनौतियां
- शहरी पूर्वाग्रह और सीमित पैमाना:
- सरकार द्वारा सार्वजनिक चार्जिंग पॉइंट्स स्थापित करने के प्रयासों के बावजूद, व्यापक पैमाने पर हर वाहन को चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराना मुश्किल है। दिल्ली का उदाहरण लें-10,000 चार्जिंग पॉइंट्स की योजना के बावजूद यह केवल बुनियादी ढांचा है, असली समाधान नहीं।
- ऊंची इमारतों में संरचनात्मक बाधाएं:
- आरडब्ल्यूए का प्रतिरोध
- अस्पष्ट लागत साझा करने का मॉडल
- भविष्य की बिजली खपत की अनिश्चितता
- किराए पर रहने वाले निवासियों के लिए चार्जिंग सुविधा का खर्च
- उपयोगिताओं पर विनियामक प्रतिबंध:
- डिस्कॉम सीधे चार्जिंग हार्डवेयर में निवेश नहीं कर सकते। इसके बजाय, सहयोगात्मक मॉडल अपनाया जाता है: डिस्कॉम जमीन और बिजली मुहैया कराता है, जबकि निजी ऑपरेटर चार्जर लगाते हैं।
- तकनीकी बाधाएं:
- टियर 2 और टियर 3 शहरों में ग्रिड की विश्वसनीयता कम
- वोल्टेज उतार-चढ़ाव और खराब अर्थिंग
- प्रशिक्षित तकनीशियनों की कमी
समाधान और उद्योग दृष्टिकोण
- बंडल मॉडल
- कज़ाम कंपनी जैसे उद्योग विशेषज्ञ ईवी के साथ होम चार्जर बंडल कर रही हैं। यह व्यावसायिक रूप से लाभदायक है और सुनिश्चित करता है कि चार्जर उपलब्ध हो और डेटा डिजिटल तरीके से संग्रहीत हो।
- उपयोग आधारित शुल्क
- नीति विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि आवासीय चार्जिंग के लिए समय आधारित मूल्य निर्धारण अपनाना चाहिए। इससे ऑफ-पीक चार्जिंग को प्रोत्साहन मिलेगा और नियामक बाधाओं में कमी आएगी।
- क्रमिक भार नियोजन
- डिस्कॉम्स आरडब्ल्यूए को सलाह देते हैं कि प्रारंभ में कम संख्या में चार्जिंग पॉइंट्स लगाएं और धीरे-धीरे विस्तार करें।
- यह ग्रिड पर अनावश्यक दबाव को कम करता है।
आगे का रास्ता:
- छोटे शहरों और कस्बों में घर पर चार्जिंग को प्राथमिकता दी जाए
- बंडलिंग और समय आधारित शुल्क से चार्जिंग को अधिक लचीला बनाया जाए
- तकनीकी प्रशिक्षण और ग्रिड अपग्रेडेशन पर ध्यान दिया जाए
- सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का सहयोग बढ़ाया जाए।
- प्रदत्त आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में 3,800 से अधिक ईवी बसें चल रही हैं, लेकिन ईवी कुल बिजली खपत का केवल 1% इस्तेमाल कर रही हैं।
- इसका मतलब है कि सही योजना और रणनीति से ईवी अपनाने में वृद्धि होती है, बिना ग्रिड पर अत्यधिक दबाव डाले।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्या है ?
- इलेक्ट्रिक वाहन वह वाहन होता है जो चलने के लिए पेट्रोल, डीज़ल या अन्य पारंपरिक ईंधन के बजाय बिजली का उपयोग करता है।
- इसमें इंजन की जगह इलेक्ट्रिक मोटर होती है, जो बैटरी या अन्य इलेक्ट्रिक ऊर्जा स्रोत से संचालित होती है।
प्रमुख विशेषताएँ:
- ईंधन: बैटरी से बिजली प्राप्त करता है, जिसे चार्जिंग स्टेशनों या घर पर चार्ज किया जा सकता है।
- पर्यावरण-अनुकूल: धुएँ, CO₂ और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं करता।
- शोर कम: पारंपरिक इंजन की तुलना में आवाज़ बहुत कम होती है।
- रख-रखाव कम: इसमें कम चलने वाले भाग होते हैं, जिससे मरम्मत और रख-रखाव सस्ता और आसान होता है।
प्रकार:
- Battery Electric Vehicle (BEV): केवल बैटरी से चलता है, जैसे टेस्ला, मिड-एनर्जी ई-रिक्शा।
- Hybrid Electric Vehicle (HEV): बैटरी और इंजन दोनों का इस्तेमाल करता है।
- Plug-in Hybrid Electric Vehicle (PHEV): बैटरी को चार्ज किया जा सकता है और इंजन भी रहता है।
निष्कर्ष
- भारत में ईवी अपनाने की सफलता का सबसे बड़ा निर्धारक घर पर चार्जिंग की सुविधा है।
- टियर 2 और टियर 3 शहरों में चार्जिंग को सुलभ बनाना न केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देगा, बल्कि यह ऊर्जा दक्षता और हरित परिवहन को भी मजबूती देगा।
- होम चार्जिंग ही ईवी अपनाने की कुंजी है—सही नीति, तकनीक और सहयोग के साथ।