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भारत-यूएई संबंध: वैश्विक ऊर्जा संकट और क्षेत्रीय सुरक्षा के बीच नई रणनीतिक संभावनाएँ

अवलोकन

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, निवेश, तकनीक, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति तक विस्तारित हो चुके हैं। पिछले एक दशक में भारत-यूएई संबंधों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) का रूप ले लिया है।

भारत-यूएई के बीच हुए प्रमुख समझौते(2026) 

1. रक्षा साझेदारी समझौता

भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए। इसमें संयुक्त सैन्य तकनीक विकास, सह-उत्पादन, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

2. रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) समझौता

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर MoU किया। इससे संकट के समय भारत को तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। ADNOC भारत के तेल भंडारण में महत्वपूर्ण भागीदार बना रहेगा।

3. LPG आपूर्ति समझौता

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच एलपीजी आपूर्ति समझौता हुआ। इससे भारत की लगभग 40 प्रतिशत घरेलू LPG जरूरतों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

4. वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर

गुजरात के वडिनार में जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित करने पर सहमति बनी। इससे भारत का समुद्री बुनियादी ढांचा मजबूत होगा और भारत क्षेत्रीय शिप रिपेयर हब के रूप में उभरेगा।

5. भारत में AI सुपरकंप्यूटर

यूएई की टेक कंपनी G42 भारत में 8 AI सुपरकंप्यूटर स्थापित करेगी। यह परियोजना AI रिसर्च, बड़े मॉडल ट्रेनिंग और भारत-केंद्रित तकनीकी विकास को बढ़ावा देगी।

6. 5 अरब डॉलर का निवेश

यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की। यह निवेश बुनियादी ढांचे, बैंकिंग और हाउसिंग फाइनेंस क्षेत्रों में किया जाएगा।

भारत-यूएई संबंधों के विभिन्न चरण

1. प्रारंभिक चरण : व्यापार एवं प्रवासी संबंध

भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी। भारत और यूएई के संबंध प्रारंभ में व्यापार और भारतीय प्रवासी समुदाय तक सीमित थे। खाड़ी देशों में भारतीय श्रमिकों और व्यापारियों की बड़ी उपस्थिति ने दोनों देशों के बीच सामाजिक और आर्थिक संपर्क को मजबूत किया।

2. ऊर्जा सहयोग का चरण

1990 के दशक के बाद भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं के कारण यूएई एक प्रमुख तेल एवं गैस आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा। आज यूएई भारत की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण साझेदार है।

3. रणनीतिक साझेदारी का विस्तार

वर्ष 2015 के बाद दोनों देशों के संबंधों में तेजी से विस्तार हुआ। नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा के बाद रक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिली।

4. व्यापक आर्थिक एवं वैश्विक सहयोग

दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू किया, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई गति मिली। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक गैर-तेल व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाना है। अब दोनों देश वैश्विक मंचों पर भी एक-दूसरे का समर्थन कर रहे हैं।

5. सामरिक और रक्षा सहयोग

भारत और यूएई के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। दोनों देश आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं। भारत और यूएई I2U2 समूह के सदस्य हैं, जिसमें भारत, इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। 

दोनों देशों के बीच ‘डेजर्ट ईगल’ और ‘गल्फ स्टार-1’ जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किए जाते हैं, जिससे रक्षा सहयोग और सामरिक समन्वय को मजबूती मिली है।

भारत के लिए यूएई का महत्व

1. ऊर्जा सुरक्षा

यूएई भारत के लिए कच्चे तेल और एलपीजी का प्रमुख स्रोत है। भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में यूएई की महत्वपूर्ण भूमिका है।

2. व्यापार एवं निवेश

यूएई भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। दुबई भारतीय व्यापार और निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र है।

3. भारतीय प्रवासी समुदाय

यूएई में लाखों भारतीय रहते और काम करते हैं। यह समुदाय भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा (Remittance) भेजता है।

4. सामरिक एवं समुद्री महत्व

यूएई पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के कारण इसका सामरिक महत्व और बढ़ जाता है।

5. आतंकवाद विरोधी सहयोग

दोनों देश आतंकवाद, कट्टरवाद और धन शोधन जैसी चुनौतियों के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं।

सहयोग की उभरती संभावनाएं

1. नवीकरणीय ऊर्जा

सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं।

2. रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उत्पादन और समुद्री सुरक्षा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।

3. डिजिटल एवं तकनीकी साझेदारी

फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं उभर रही हैं।

4. खाद्य सुरक्षा एवं कृषि

यूएई भारत में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है, जिससे दोनों देशों को लाभ हो सकता है।

5. कनेक्टिविटी एवं लॉजिस्टिक्स

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) जैसे प्रोजेक्ट दोनों देशों के रणनीतिक महत्व को बढ़ा सकते हैं।

आगे की राह

भारत और यूएई के संबंध भविष्य में और अधिक मजबूत होने की संभावना रखते हैं। दोनों देशों को ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और निवेश के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सहयोग पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा। भारत को अपनी ऊर्जा निर्भरता में विविधता लाने और रणनीतिक साझेदारी को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

वहीं यूएई के लिए भारत एक विशाल बाजार, भरोसेमंद साझेदार और उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में महत्वपूर्ण है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत-यूएई संबंध केवल द्विपक्षीय साझेदारी नहीं, बल्कि एशिया और पश्चिम एशिया की स्थिरता एवं आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बनते जा रहे हैं।

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