संदर्भ
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत कर लिया है, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की 15वीं वर्षगांठ पर संबंधों के एक नए और परिपक्व चरण का प्रतीक है। ताशकंद में भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान हुए समझौतों ने इन द्विपक्षीय संबंधों को एक पारंपरिक राजनयिक दायरे से निकालकर बहुआयामी रणनीतिक सहयोग में बदल दिया है।
द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
सिविल परमाणु ऊर्जा और यूरेनियम आपूर्ति:
- भारत अपने बढ़ते नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उज्बेकिस्तान से यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति हेतु एक व्यवस्था को अंतिम रूप दे रहा है।
- यह विविधीकरण (Diversification) भारत को सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने और कम कार्बन वाले बेसलोड ऊर्जा स्रोत के रूप में परमाणु ऊर्जा का विस्तार करने में मदद करेगा।
व्यापार और आर्थिक साझेदारी:
- दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 1 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब अमेरिकी डॉलर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
- फोकस के प्रमुख क्षेत्र: व्यापार और निवेश, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आभूषण, खनन, बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी।
- इसे प्राप्त करने के लिए बाजार-पहुंच, कनेक्टिविटी अड़चनों और बैंकिंग-भुगतान तंत्रों को सुधारा जा रहा है।
रक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग:
- रक्षा संबंधों को पारंपरिक आदान-प्रदान से बढ़ाकर रक्षा-औद्योगिक सहयोग (सैन्य उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन) की ओर मोड़ा गया है।
- सैन्य सहयोग पर संयुक्त कार्य समूह सक्रिय है और 'डस्टलिक' (Dustlik) संयुक्त सैन्य अभ्यास परिचालन तालमेल को मजबूत कर रहा है।
- आतंकवाद पर 'शून्य सहिष्णुता' अपनाते हुए दोनों देशों ने खुफिया साझाकरण, कानून-प्रवर्तन, हिंसक उग्रवाद, आतंकवादी वित्तपोषण और साइबर खतरों के खिलाफ मिलकर काम करने पर सहमति जताई है।
महत्वपूर्ण खनिज और रणनीतिक संसाधन:
- उज्बेकिस्तान के प्रचुर खनिज संसाधन, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में भारत की विविधीकरण रणनीति में मदद करते हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होती हैं।
कनेक्टिविटी, डिजिटल एकीकरण और लोगों से लोगों के संबंध
भारत की मध्य एशिया तक सीधी जमीनी पहुंच न होने के बावजूद, यह साझेदारी 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति' के तहत महत्वपूर्ण है:
- वीजा मुक्त यात्रा: उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिनों तक की यात्रा पर वीजा आवश्यकताओं को समाप्त कर दिया है।
- डिजिटल भुगतान: उज्बेकिस्तान में यूपीआई-सक्षम अनुप्रयोगों के उपयोग से डिजिटल वित्तीय एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
- सांस्कृतिक और विरासत संबंध: फयाज टेपा और कारा टेपा के बौद्ध स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए आशय पत्र, 100 लाल बहादुर शास्त्री हिंदी छात्रवृत्तियां, और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओरिएंटल स्टडीज़ में आईसीसीआर संस्कृत चेयर की स्थापना जैसे कदम दोनों देशों के ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को जीवंत बनाते हैं।
संस्थागत तंत्र और पर्यावरण पहल
- मजबूत संस्थागत ढांचे: विदेश मंत्री-स्तरीय समन्वय समूह की स्थापना और मौजूदा संयुक्त आयोग को सचिव स्तर से मंत्री स्तर पर उन्नत किया जाना।
- पर्यावरण सहयोग: भारत ने अरल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर (1 million USD) के अनुदान की घोषणा की है, जो द्विपक्षीय सहयोग को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ता है।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
मध्य एशिया में रूस, चीन, तुर्किए और ईरान जैसी ताकतों के प्रभाव के बीच उज्बेकिस्तान की भू-राजनीतिक स्थिति भारत के लिए विशेष मायने रखती है। इस साझेदारी से भारत को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
- ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति में विविधता।
- अफगानिस्तान की अस्थिरता के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
- मध्य एशिया में आर्थिक पदचिह्न (फुटप्रिंट) का विस्तार और चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन।
- विस्तारित पड़ोस नीति (Extended Neighbourhood Policy) और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षमताओं का विस्तार।
निष्कर्ष
- भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों की यह नई ऊँचाई केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, आर्थिक लक्ष्यों और सुरक्षा प्राथमिकताओं का एक ठोस दस्तावेज है। इन समझौतों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि घोषित लक्ष्य कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारे जाते हैं।