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भारत का पावर ग्रिड और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग

चर्चा में क्यों?

एआई-संचालित डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार के कारण भारत की विद्युत प्रणाली में बड़े बदलाव आने वाले हैं। इन केंद्रों की बिजली खपत और तेजी से बदलते लोड ने ग्रिड संचालन में नई चुनौतियाँ पैदा की हैं। भारत की वर्तमान डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.2 गीगावॉट है, जो 2030 तक 8-10 गीगावॉट तक बढ़ने की संभावना है।

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डेटा सेंटर विस्तार से ग्रिड पर प्रभाव

  • उच्च बिजली खपत: एआई डेटा सेंटर आमतौर पर प्रत्यक्ष संचरण स्तर की कनेक्टिविटी की मांग करते हैं।
  • लोड परिवर्तनशीलता: अचानक बढ़ती या घटती मांग ग्रिड अस्थिरता का कारण बन सकती है।
  • अचानक लोड निकासी: 1-2 गीगावॉट की अचानक घटती खपत ग्रिड संचालन को प्रभावित कर सकती है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा सेंटर का लोड केवल ग्रिड पर निर्भर नहीं रह सकता; इसे मांग-साइड प्रबंधन के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।

योजना और संसाधन पर्याप्तता

  • सुदृढ़ कनेक्टिविटी: मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और समन्वित योजना।
  • संसाधन पर्याप्तता: ऊर्जा स्रोत, बैकअप और संतुलन उपाय सुनिश्चित करना।
  • AI लोड पूर्वानुमान: चरम प्रोसेसिंग चरणों में भविष्यवाणी करना कठिन।

रणनीतिक योजना के लाभ

  • हाइपरस्केल डेटा केंद्र: प्रत्येक लगभग 1 गीगावॉट मांग करता है।
  • बिना योजना के विस्तार: उच्च वोल्टेज सबस्टेशन पर दबाव और उपभोक्ता लागत में वृद्धि।
  • स्थिर बेसलोड आवश्यकता: लंबी अवधि तक निरंतर बिजली की जरूरत।

ऊर्जा मिश्रण और भंडारण समाधान

  • कैप्टिव उत्पादन + नवीकरणीय ऊर्जा + बैटरी भंडारण (6-9 घंटे): ग्रिड विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद।
  • डेटा सेंटर क्षेत्रों की पहचान: अराजक विस्तार और उच्च लागत से बचाव।
  • ओपन एक्सेस मार्ग: बड़े उपभोक्ता (1 मेगावॉट+) को सीधे आपूर्तिकर्ता से बिजली खरीदने की सुविधा।
  • पंप हाइड्रो परियोजनाएं: 24×7 हरित ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित।

सेमीकंडक्टर और दक्षता सुधार

  • इंटेल 18A प्रक्रिया और रिबनफेट तकनीक: लगभग 15% ऊर्जा दक्षता सुधार।
  • विषम एआई (Heterogeneous AI): ऊर्जा-गहन GPU की आवश्यकता हर कार्य के लिए नहीं।
  • कार्यभार अनुकूलन: कुल बिजली खपत में महत्वपूर्ण कमी।

हाइपरस्केल डेटा सेंटर की प्रमुख आवश्यकताएँ

  • नवीकरणीय ऊर्जा का प्राथमिक उपयोग
  • ग्रिड विश्वसनीयता और निरंतर आपूर्ति
  • नियामक स्पष्टता और दीर्घकालिक मूल्य निर्धारण
  • त्वरित और सतत बिजली उपलब्धता
  • भारत में एआई डेटा सेंटर का विस्तार अभी प्रारंभिक चरण में है। यह समय नियोजन और रणनीति बनाने के लिए उपयुक्त अवसर प्रदान करता है।

निष्कर्ष

  • भारत में एआई-संचालित डेटा सेंटरों का तेजी से विस्तार देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास के लिए आवश्यक है। हालांकि, इन केंद्रों की अत्यधिक और अप्रत्याशित बिजली खपत से ग्रिड पर दबाव बढ़ता है, जिससे संचालन अस्थिर हो सकता है।
  • इसलिए, डेटा सेंटर के सुरक्षित और सतत विस्तार के लिए रणनीतिक योजना, मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क, नवीकरणीय ऊर्जा का मिश्रण, ऊर्जा भंडारण समाधान और दक्षता सुधार आवश्यक हैं। इसके अलावा, हाइपरस्केल डेटा सेंटरों के लिए नियामक स्पष्टता, दीर्घकालिक मूल्य स्थिरता और आपूर्ति सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है।
  • संगठित और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने से न केवल ग्रिड की विश्वसनीयता बनी रहेगी, बल्कि भारत में डिजिटल और एआई आधारित उद्योगों का सतत विकास भी सुनिश्चित होगा।

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