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आईओएम ग्लोबल अपील 2026 रिपोर्ट

संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने वर्ष 2026 के लिए वैश्विक स्तर पर 4.1 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करने हेतु 4.7 अरब अमेरिकी डॉलर की अपील जारी की है। यह अपील ‘ह्यूमैनिटेरियन रीसेट’ के तहत प्राथमिकताओं के पुनर्संतुलन और सीमित वैश्विक वित्तीय संसाधनों की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत की गई है। 

IOM ग्लोबल अपील 2026 के बारे में

  • ग्लोबल अपील 2026 IOM का एक व्यापक एवं परिवर्तनकारी दस्तावेज है जो इसकी रणनीतिक योजना 2024–2028 के अनुरूप तैयार किया गया है। 
  • यह जीवनरक्षक मानवीय सहायता की आपूर्ति, विस्थापन से निपटने के लिए स्थायी समाधान विकसित करने तथा सुरक्षित, नियमित एवं सुव्यवस्थित प्रवासन मार्गों को बढ़ावा देने हेतु एक स्पष्ट कार्ययोजना प्रदान करता है जिससे विश्व की सर्वाधिक संवेदनशील जनसंख्या को संरक्षण मिल सके।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष और उभरती प्रवृत्ति

  • आंतरिक विस्थापन का ऐतिहासिक उच्च स्तर: वर्ष 2024 के अंत तक आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों की संख्या 8.34 करोड़ तक पहुँच गई जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।
  • जलवायु परिवर्तन से प्रेरित विस्थापन में तीव्र वृद्धि: आपदा-जनित विस्थापन वर्ष 2024 में बढ़कर 98 लाख हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29% अधिक है।
  • प्रवासियों के लिए सबसे घातक वर्ष: वर्ष 2024 में कम से कम 9,197 प्रवासियों की मृत्यु दर्ज की गई, जिससे यह 2014 के बाद सबसे घातक वर्ष सिद्ध हुआ।
  • प्रेषण का आर्थिक महत्व: वर्ष 2024 में प्रवासियों द्वारा 905 अरब अमेरिकी डॉलर की अंतर्राष्ट्रीय धनराशि भेजी गई जिसने अनेक देशों की अर्थव्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण सहारा प्रदान किया।
  • नियमित प्रवासन मार्गों की सीमित उपलब्धता: मूल्यांकन किए गए देशों में से 20% से भी कम देशों ने नियमित श्रम प्रवासन को सुगम बनाने वाले औपचारिक कार्यक्रम स्थापित किए हैं।
  • वैश्विक कार्यबल में प्रवासियों की अनिवार्य भूमिका: विश्वभर में 16.8 करोड़ प्रवासी श्रमिक स्वास्थ्य, नवाचार और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में श्रम की कमी को पूरा कर रहे हैं।
  • गंभीर वित्तीय अभाव: कुल 4.7 अरब अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता के मुकाबले केवल 1.3 अरब डॉलर ही उपलब्ध हो पाए हैं जिससे 3.4 अरब डॉलर का बड़ा वित्तीय अंतर बना हुआ है।

प्रवासन के प्रमुख प्रेरक तत्व

  • आर्थिक अवसरों की तलाश: लगभग 16.8 करोड़ लोग श्रम बाजार की मांग को पूरा करने और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रवासन करते हैं। 
  • संघर्ष एवं हिंसा: सूडान तथा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे क्षेत्रों में जारी अस्थिरता लाखों लोगों को विस्थापन के लिए विवश कर रही है।
  • पर्यावरणीय क्षरण: चरम मौसम घटनाएँ और जलवायु आपदाएँ परिवारों को सुरक्षित भविष्य की खोज में अपने घर छोड़ने पर मजबूर कर रही हैं।
  • दीर्घकालिक संकट: लंबे समय तक चला विस्थापन, जब स्थानीय संसाधन और सुरक्षा तंत्र विफल हो जाते हैं, तब आगे प्रवासन को प्रोत्साहित करता है।
  • असमानता व जीवन-कठिनाइयाँ: स्थायी आर्थिक विषमता लोगों को गरिमापूर्ण जीवन की तलाश में जोखिमपूर्ण और अनियमित प्रवासन मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित करती है। 

प्रवासन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियाँ

  • सामाजिक सुरक्षा तक सीमित पहुँच: अनेक प्रवासी असुरक्षित रोजगार में संलग्न रहते हैं और स्वास्थ्य व कल्याण सुविधाओं से वंचित रहते हैं। उदाहरण: ई-श्रम पोर्टल के बावजूद मुंबई जैसे महानगरों में असंगठित प्रवासी श्रमिकों को राज्य-स्तरीय कल्याण योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई होती है।
  • अपर्याप्त आवासीय स्थितियाँ: शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण प्रवासियों को खराब स्वच्छता वाली अनौपचारिक बस्तियों में रहना पड़ता है। उदाहरण: धारावी, मुंबई में आंतरिक प्रवासी स्वच्छ जल और कचरा प्रबंधन से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
  • शोषण और अल्प पारिश्रमिक: कानूनी संरक्षण के अभाव में प्रवासियों को असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और मजदूरी भुगतान में अनियमितताओं का सामना करना पड़ता है। उदाहरण: बिहार और उत्तर प्रदेश से आए मौसमी निर्माण श्रमिकों द्वारा असुरक्षित कार्यस्थल व भुगतान में देरी की शिकायतें प्राय: सामने आती हैं। 
  • अधिक कठोर वैश्विक नीतियाँ: अनेक मेज़बान देश आव्रजन नीतियों को लगातार सख्त बना रहे हैं। उदाहरण: वर्ष 2025 में H-1B वीज़ा नियमों में किए गए बदलावों, जैसे- अधिक शुल्क और वेतन-आधारित चयन ने अमेरिका में भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं।
  • नकारात्मक विमर्श और दुष्प्रचार: गलत सूचनाओं से प्रेरित प्रवासी-विरोधी धारणाएँ सामाजिक अलगाव को बढ़ावा देती हैं। उदाहरण: वर्ष 2025 में यू.के. एवं कनाडा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय छात्रों की संख्या सीमित करने तथा शुद्ध प्रवासन घटाने के निर्णयों से भारतीय प्रवासियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

आगे की दिशा

  • मार्ग-आधारित दृष्टिकोण: बिखरी हुई प्रतिक्रियाओं के स्थान पर संपूर्ण प्रवासन गलियारों में समन्वित, डेटा-आधारित रणनीतियों को अपनाना
  • स्थानीयकरण को सुदृढ़ करना: स्थानीय और राष्ट्रीय संस्थाओं की क्षमताओं को बढ़ाकर उन्हें मानवीय एवं विकासात्मक पहलों का नेतृत्व सौंपना
  • नियमित प्रवासन मार्गों का विस्तार: सदस्य देशों को श्रम बाजार की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप लचीले और सुरक्षित प्रवासन तंत्र विकसित करने में सहयोग देना
  • डेटा-आधारित नीति निर्माण: नीति-निर्माताओं को प्रभावी निर्णय लेने में सहायता देने हेतु डिस्प्लेसमेंट ट्रैकिंग मैट्रिक्स (DTM) के उपयोग का विस्तार करना
  • लचीला वित्तपोषण: क्षेत्रीय स्तर पर शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए गैर-निर्दिष्ट और लचीले वित्तीय संसाधनों को संगठित करना

निष्कर्ष

  • IOM ग्लोबल अपील 2026 यह रेखांकित करती है कि प्रवासन गरीबी, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक असमानताओं जैसी जटिल चुनौतियों के समाधान का एक अभिन्न हिस्सा है। 
  • मानवीय गरिमा, सुरक्षा और प्रणालीगत दक्षता को केंद्र में रखते हुए IOM का उद्देश्य प्रवासन को एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सभी के लिए लाभकारी प्रक्रिया में रूपांतरित करना है। 
  • इसके लिए वैश्विक समुदाय की साझा प्रतिबद्धता, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और प्रवासियों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा अनिवार्य होगी।
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