संदर्भ
फरवरी 2026 में संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) ने भारत में यूनाइटेड नेशन रोड सेफ्टी फाइनेंसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत की। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सड़क सुरक्षा संबंधी विशेष दूत जीन टॉड की भारत यात्रा के अवसर पर प्रारंभ किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य चुनिंदा भारतीय राज्यों में सड़क सुरक्षा हेतु वित्तीय व्यवस्थाओं एवं संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ बनाना है।
परियोजना की आवश्यकता
- भारत दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की सर्वाधिक संख्या वाले देशों में शामिल है। सड़क हादसों से भारी मानवीय क्षति के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक नुकसान भी होता है।
- आकलन के अनुसार, इन दुर्घटनाओं से देश को हर वर्ष लगभग 3% GDP का नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करना केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं है बल्कि सतत विकास की अनिवार्य आवश्यकता भी है।
परियोजना के उद्देश्य
- यह परियोजना भारत सरकार को सड़क सुरक्षा वित्तपोषण के लिए एक व्यापक एवं दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने में सहयोग प्रदान करती है। इसके प्रमुख लक्ष्य निम्नलिखित हैं-
- राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर सड़क सुरक्षा कोष को सशक्त बनाना
- समन्वित और स्थिर वित्तीय ढांचा तैयार करना
- योजना निर्माण, बजट प्रबंधन एवं निगरानी के लिए संस्थागत क्षमता विकसित करना
- प्रभावी एवं जीवनरक्षक उपायों को विभिन्न राज्यों में विस्तारित करना
परियोजना का क्रियान्वयन एवं वित्तीय व्यवस्था
यह पहल सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनीसेफ (UNICEF) तथा सिविल सोसायटी संगठनों जैसे सेव लाइफ फाउंडेशन (Save LIFE Foundation) के सहयोग से लागू की जा रही है।
लक्षित राज्य
- प्रारंभिक चरण में परियोजना चार राज्यों में लागू की जा रही है-
- राजस्थान
- केरल
- तमिलनाडु
- असम
- इन राज्यों को ऐसे मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनके अनुभवों के आधार पर देशभर में टिकाऊ वित्तीय प्रणाली लागू की जा सके।
प्रमुख विशेषताएँ
- इस परियोजना के अंतर्गत नवाचार आधारित और विविध वित्तीय साधनों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जैसे-
- रोड सेफ्टी बॉन्ड
- विशेष कर या उपकर
- पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP)
- इन उपायों का उद्देश्य अल्पकालिक या असंगठित बजट प्रावधानों के स्थान पर दीर्घकालिक और सुनिश्चित वित्तपोषण उपलब्ध कराना है।
- यह पहल संयुक्त राष्ट्र की ‘सड़क सुरक्षा कार्रवाई दशक 2021–2030’ की वैश्विक कार्ययोजना के अनुरूप है जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों व चोटों में 50% की कमी लाना है।
संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) के बारे में
- संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष (UNRSF) एक अंतर्राष्ट्रीय ट्रस्ट फंड है जिसकी स्थापना वर्ष 2018 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा की गई थी।
- इसका उद्देश्य विशेष रूप से निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में सड़क सुरक्षा पहलों को समर्थन देना है।
प्रमुख उद्देश्य
- देशों को प्रभावी सड़क सुरक्षा नीतियाँ बनाने और लागू करने में सहयोग देना
- सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु और गंभीर चोटों को कम करना
- राष्ट्रीय कानूनों और नीतिगत ढांचे को सुदृढ़ करना
- टिकाऊ वित्तीय तंत्र को बढ़ावा देना
- सुरक्षित सड़क अवसंरचना, वाहन मानक और जिम्मेदार उपयोगकर्ता व्यवहार को प्रोत्साहित करना
कार्यप्रणाली
- संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा कोष विभिन्न देशों की सरकारों को अनुदान और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता है। यह संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, राष्ट्रीय सरकारों, सिविल सोसायटी और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में कार्य करता है। यह निम्नलिखित क्षेत्रों में परियोजनाओं का समर्थन करता है-
- गति नियंत्रण
- सुरक्षित सड़क अभिकल्प (डिजाइन)
- यातायात नियमों का सख्त प्रवर्तन
- दुर्घटना के बाद आपातकालीन सेवाएँ
- संस्थागत क्षमता निर्माण
भारत सरकार की सड़क सुरक्षा संबंधी पहलें
सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर की गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत में सड़क सुरक्षा को सार्वजनिक नीति की प्रमुख प्राथमिकता बनाया गया है। सरकार ने कानून, संस्थागत ढांचे, तकनीक और जन-जागरूकता के माध्यम से अनेक कदम उठाए हैं।
1. मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019
इस कानून के तहत यातायात उल्लंघनों पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया, गुड समैरिटन को कानूनी संरक्षण दिया गया, दुर्घटना पीड़ितों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाई गई तथा इलेक्ट्रॉनिक निगरानी को बढ़ावा मिला।
2. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति
यह नीति सड़क इंजीनियरिंग, कानून प्रवर्तन, वाहन सुरक्षा मानकों और जन-जागरूकता को मजबूत करने के लिए एक समग्र ढांचा प्रदान करती है।
3. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड (NRSB)
यह निकाय सड़क सुरक्षा मानकों, दुर्घटना रोकथाम रणनीतियों और सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन पर सरकार को सलाह देता है।
4. राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद
यह परिषद केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करने वाली शीर्ष सलाहकार संस्था के रूप में कार्य करती है।
5. ब्लैक स्पॉट की पहचान एवं सुधार
MoRTH राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना-प्रवण स्थलों (ब्लैक स्पॉट) की पहचान कर वहाँ संकेतक, सड़क पुनर्रचना और बेहतर प्रकाश व्यवस्था जैसे सुधारात्मक कदम उठाता है।
6. iRAD (Integrated Road Accident Database)
iRAD एप्लीकेशन के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं का डेटा रियल-टाइम में एकत्र और विश्लेषित किया जाता है जिससे नीतियों को साक्ष्य-आधारित बनाया जा सके।
7. गुड समैरिटन दिशा-निर्देश
सरकार ने ऐसे नागरिकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की है जो दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करते हैं, ताकि उन्हें अनावश्यक कानूनी परेशानियों का सामना न करना पड़े।
8. जन-जागरूकता अभियान
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का आयोजन, हेलमेट और सीटबेल्ट के उपयोग को बढ़ावा तथा नशे में वाहन चलाने के विरुद्ध अभियान जैसे कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जाते हैं।