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भारत-चीन की संयुक्त पहल: ह्वेनसांग की विरासत को UNESCO मान्यता दिलाने की तैयारी

चर्चा में क्यों ? 

  • हाल ही में BRICS देशों ने साझा सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण और वैश्विक पहचान को बढ़ावा देने के लिए UNESCO की विभिन्न सूचियों में संयुक्त नामांकन प्रस्तुत करने पर विचार किया है। इसी क्रम में भारत और चीन 7वीं शताब्दी के प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु एवं विद्वान ह्वेनसांग की यात्रा-वृत्तांत पुस्तक ‘The Great Tang Records on the Western Regions’ को UNESCO की मान्यता दिलाने के लिए संयुक्त नामांकन की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं।
  • यह पहल न केवल भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करती है, बल्कि साझा विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी मानी जा रही है।

क्या है ‘The Great Tang Records on the Western Regions’ ?

  • ‘The Great Tang Records on the Western Regions’ 7वीं शताब्दी के चीनी बौद्ध भिक्षु ह्वेनसांग द्वारा लिखित प्रसिद्ध यात्रा-वृत्तांत है। हिंदी में इसे सामान्यतः ‘सी-यू-की’ (Si-Yu-Ki) अथवा ‘पश्चिमी प्रदेशों का विवरण’ कहा जाता है।
  • इस ग्रंथ में भारत और मध्य एशिया की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का विस्तृत वर्णन मिलता है। 
  • ह्वेनसांग ने भारत में लगभग 15 से 19 वर्षों तक यात्रा और अध्ययन किया तथा बिहार स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध दर्शन का गहन अध्ययन किया। 
  • उनके विवरण प्रारंभिक मध्यकालीन भारत के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में गिने जाते हैं।

संयुक्त नामांकन का प्रस्ताव

  • इस प्रस्ताव का नेतृत्व चीन कर रहा है, जबकि भारत इसके समर्थन पर विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव वर्तमान में भारत के विदेश मंत्रालय के विचाराधीन है। चीन ने कूटनीतिक माध्यमों से UNESCO की सूची में इस ग्रंथ के संयुक्त नामांकन का सुझाव दिया है।
  • यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो यह भारत-चीन सांस्कृतिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

BRICS देशों की अन्य संयुक्त नामांकन योजनाएँ

  • BRICS देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासतों को UNESCO में मान्यता दिलाने के लिए कई अन्य प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है।
  • इनमें प्रमुख हैं -
    • पंचतंत्र - भारत और ईरान का संयुक्त नामांकन
    • सत्याग्रह का दर्शन - भारत और दक्षिण अफ्रीका का संयुक्त नामांकन

संयुक्त नामांकन क्यों महत्वपूर्ण है ?

1. UNESCO में सीमित नामांकन अवसर

  • UNESCO की विरासत सूचियों के लिए प्रत्येक देश को दो वर्षों में केवल दो नामांकन भेजने की अनुमति होती है। जबकि संयुक्त नामांकन पर ऐसी कोई सीमा लागू नहीं होती। इसलिए कई देश साझा विरासतों के लिए संयुक्त प्रस्तावों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

2. साझा सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण

  • कई सांस्कृतिक परंपराएँ और ज्ञान प्रणालियाँ एक से अधिक देशों में विकसित हुई हैं। संयुक्त नामांकन से इन विरासतों को वैश्विक स्तर पर व्यापक मान्यता मिलती है।
  • उदाहरण :
    • रामायण परंपरा - भारत एवं इंडोनेशिया
    • बौद्ध ग्रंथ - भारत एवं चीन
    • पंचतंत्र - भारत एवं ईरान

3. सांस्कृतिक दावों के विवाद से बचाव

  • संयुक्त नामांकन से किसी विरासत पर अलग-अलग देशों द्वारा किए जाने वाले समानांतर दावों और विवादों की संभावना कम हो जाती है।

सोवा-रिग्पा विवाद से मिली सीख

  • वर्ष 2017 में भारत ने पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा प्रणाली सोवा-रिग्पा को UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने के लिए प्रस्ताव भेजा था। उसी समय चीन ने भी इस विरासत पर अपना दावा प्रस्तुत किया था।
  • ऐसे विवादों से बचने के लिए BRICS देशों ने सांस्कृतिक विरासतों के संबंध में आपसी समन्वय बढ़ाने पर बल दिया है।

BRICS संस्कृति कार्य समूह की बैठक

  • जून 2026 में BRICS संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक वाराणसी में आयोजित हुई। इसमें ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया और ईरान सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • बैठक में साझा सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण और संयुक्त नामांकन को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। इसकी सिफारिशें अगस्त 2026 में भोपाल में आयोजित होने वाली BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक को भेजी जाएंगी।

कौन थे ह्वेनसांग ?

  • ह्वेनसांग (Xuanzang) 7वीं शताब्दी के प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु, दार्शनिक, अनुवादक और यात्री थे। उन्हें अक्सर "तीर्थयात्रियों का राजकुमार" कहा जाता है।

भारत यात्रा का उद्देश्य

  • ह्वेनसांग का मानना था कि चीन में उपलब्ध बौद्ध ग्रंथ अधूरे और त्रुटिपूर्ण हैं। इसलिए उन्होंने बौद्ध धर्म के मूल स्वरूप को समझने के लिए 629 ईस्वी में भारत की यात्रा प्रारंभ की।

नालंदा में अध्ययन

  • भारत में उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय में आचार्य शीलभद्र के मार्गदर्शन में बौद्ध दर्शन और योगाचार परंपरा का अध्ययन किया। बाद में वे स्वयं भी एक प्रतिष्ठित बौद्ध विद्वान बने।

हर्षवर्धन से संबंध

  • ह्वेनसांग सम्राट हर्षवर्धन के समकालीन थे। हर्षवर्धन ने कन्नौज में आयोजित एक विशाल धार्मिक सभा में उनका विशेष सम्मान किया था।

चीन वापसी और योगदान

  • 645 ईस्वी में चीन लौटते समय ह्वेनसांग अपने साथ अनेक बौद्ध ग्रंथ, प्रतिमाएँ और ज्ञान सामग्री लेकर गए। उन्होंने इन ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद किया, जिससे चीन में बौद्ध धर्म के प्रसार को नई दिशा मिली।

सांस्कृतिक विरासत क्या है ?

  • सांस्कृतिक विरासत वह धरोहर है जो किसी समाज की पहचान, इतिहास, परंपराओं, ज्ञान, कला, रीति-रिवाजों और जीवनशैली को दर्शाती है तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रहती है।

सांस्कृतिक विरासत के प्रकार

1. मूर्त सांस्कृतिक विरासत (Tangible Heritage)

  • ऐसी धरोहर जिसे देखा और छुआ जा सकता है।
  • उदाहरण :
    • ताजमहल
    • कुतुब मीनार
    • किले और स्मारक
    • प्राचीन पांडुलिपियाँ

2. अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Heritage)

  • ऐसी धरोहर जो परंपराओं, ज्ञान और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के रूप में जीवित रहती है।
  • उदाहरण :
    • योग
    • रामलीला
    • शास्त्रीय नृत्य
    • लोकगीत और लोककथाएँ
    • पारंपरिक हस्तशिल्प

ब्रिक्स समूह के बारे में:

  • इसे सितंबर 2006 में स्थापित किया गया था। 
  • शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे।
  • इसे मूल रूप से ब्रिक नाम दिया गया था।
  • दक्षिण अफ्रीका सितंबर 2010 में शामिल हुआ।
  • इसका नाम बदलकर ब्रिक्स (BRICS )कर दिया गया।(B-Brazil, R-Russia, I-India, C-China और S-South Africa)
  • इसका मुख्यालय चीन के शंघाई में है।
  • संगठन की अध्यक्षता BRICS के अल्फाबेट के क्रमानुसार सदस्यों के बीच प्रतिवर्ष बदलती है।
  • ब्रिक्स में शामिल हुए 6 नए पूर्ण सदस्य हैं; 
    • मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब ,संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया हैं।

निष्कर्ष

भारत और चीन द्वारा ह्वेनसांग की विरासत को UNESCO की मान्यता दिलाने के लिए किया जा रहा संयुक्त प्रयास सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह पहल न केवल दोनों देशों की साझा ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक पहचान दिला सकती है, बल्कि BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को भी नई दिशा प्रदान कर सकती है।

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