संदर्भ
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में 25,016 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण परियोजना की आधारशिला रखी। यह परियोजना न केवल देश के औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी, बल्कि भारत को ऊर्जा और रासायनिक उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
लखनपुर परियोजना के बारे में
- लखनपुर परियोजना देश की पहली वाणिज्यिक स्तर की कोयला-से-अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन परियोजना होगी।
- इसका विकास भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के संयुक्त उपक्रम भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) द्वारा किया जा रहा है।
- यह संयंत्र बीएचईएल द्वारा विकसित स्वदेशी कोयला गैसीकरण तकनीक का उपयोग करेगा और प्रतिदिन लगभग 2,000 टन अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करेगा।
परियोजना को मिली आवश्यक मंजूरियां:
- हाल ही में बीसीजीसीएल और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) के बीच भूमि पट्टा समझौता संपन्न हुआ है। परियोजना एमसीएल के स्वामित्व वाली लगभग 350 एकड़ भूमि पर स्थापित की जाएगी, जिसके लिए आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं।
- कोयला मंत्रालय ने ऐसी परियोजनाओं के लिए कोयला युक्त भूमि के उपयोग को अनुमति प्रदान की है और प्रोत्साहन योजना के तहत 1,350 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई है।
आत्मनिर्भर औद्योगिक भारत की ओर:
- लखनपुर कोयला गैसीकरण परियोजना भविष्य की ऐसी परियोजनाओं के लिए एक मॉडल के रूप में उभरेगी। यह परियोजना स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, घरेलू संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने और मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आयात निर्भरता में कमी जैसे अनेक लाभों के साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
कोयला गैसीकरण: ऊर्जा और उद्योग का नया आधार
- कोयला गैसीकरण ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कोयले को सिंथेटिक गैस (सिनगैस) में परिवर्तित किया जाता है।
- इस गैस का उपयोग मेथनॉल, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस और अन्य महत्वपूर्ण रासायनिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इससे कोयले के पारंपरिक उपयोग से आगे बढ़कर उसे उच्च मूल्य वाले औद्योगिक उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक देश में औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने, आयात प्रतिस्थापन को प्रोत्साहित करने और रणनीतिक रसायनों एवं कच्चे माल के घरेलू उत्पादन को मजबूत करने में अत्यंत प्रभावी साबित होगी।
भारत के विशाल कोयला भंडार का बेहतर उपयोग
- भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता देश है। देश के पास 400 अरब टन से अधिक का कोयला भंडार है, जो विश्व में पाँचवें स्थान पर है। वहीं, कोल इंडिया लिमिटेड विश्व की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है।
- इन विशाल संसाधनों का वैज्ञानिक और औद्योगिक उपयोग करते हुए कोयला गैसीकरण देश के औद्योगिक परिदृश्य में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। इससे उन रसायनों और औद्योगिक उत्पादों के आयात में कमी आएगी, जिन पर वर्तमान में भारत काफी हद तक निर्भर है।
सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोत्साहन योजना
- कोयला गैसीकरण की संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने 46,000 करोड़ रुपये तक के कुल परिव्यय वाली प्रोत्साहन योजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य देशभर में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।
- यह पहल घरेलू कोयले के उपयोग को प्रोत्साहित करेगी, प्राकृतिक गैस, अमोनिया, मेथनॉल और अन्य औद्योगिक कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करेगी तथा देश की ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाएगी।
आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत
- वर्तमान में भारत हर वर्ष लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये मूल्य के अंतिम उपयोग और मध्यवर्ती रासायनिक उत्पादों का आयात करता है। कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के माध्यम से इन आयातों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
- इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बल मिलेगा और देश के औद्योगिक विकास को नई दिशा प्राप्त होगी। साथ ही, आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
- सरकार की कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन पहल से देश के विभिन्न कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 25 परियोजनाओं में 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश की संभावना है। इसके साथ ही लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है।
- यह पहल न केवल उद्योगों को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।