हाल ही में भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘कुष्ठ रोग-मुक्त भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में कुष्ठ रोग के शून्य संचरण को प्राप्त करने के लिए कार्यक्रम प्रदर्शन की समीक्षा और केंद्रित रणनीतिक कार्रवाई पर दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
यह रोग त्वचा, परिधीय तंत्रिकाओं, ऊपरी श्वसन पथ की श्लेष्मा और आँखों को प्रभावित करता है। शारीरिक विकृति के अलावा, कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों को सामाजिक कलंक और भेदभाव का भी सामना करना पड़ता है। यदि इसका उपचार न किया जाए, तो यह रोग धीरे-धीरे बढ़कर स्थायी विकलांगता का कारण बन सकता है।
कुष्ठ रोग एक लाइलाज बीमारी है। वर्तमान में अनुशंसित उपचार पद्धति में तीन दवाएँ (डैप्सोन, रिफैम्पिसिन और क्लोफ़ाज़िमाइन) शामिल हैं, जिसे बहु-औषध चिकित्सा (एमडीटी) कहा जाता है।
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