चर्चा में क्यों ?
- पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने लसीका फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis - LF) के खिलाफ Mass Drug Administration (MDA) अभियान शुरू किया है।
- यह अभियान राज्य के 10 जिलों के 59 विकास खंडों और शहरी निकायों में चलाया जा रहा है।
- इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक फाइलेरिया का उन्मूलन करना है। अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर पात्र लोगों को निःशुल्क दवाएँ दे रहे हैं और उन्हें स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी (Directly Observed Treatment) में दवा खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

लसीका फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) क्या है ?
- लसीका फाइलेरिया, जिसे सामान्य भाषा में हाथीपाँव (Elephantiasis) कहा जाता है, एक परजीवी (Parasitic) संक्रमण है।
- यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Disease - NTD) की श्रेणी में रखा गया है।
- यह रोग मानव शरीर के लसीका तंत्र (Lymphatic System) को प्रभावित करता है, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों विशेषकर पैर, हाथ, स्तन तथा जननांगों में असामान्य सूजन हो जाती है।
- लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह स्थायी विकलांगता और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का कारण बन सकता है।
लसीका तंत्र (Lymphatic System) क्या है ?
लसीका तंत्र शरीर का एक महत्वपूर्ण नेटवर्क है, जिसमें लसीका वाहिकाएँ (Lymph Vessels), लसीका ग्रंथियाँ (Lymph Nodes) तथा लसीका द्रव (Lymph Fluid) शामिल होते हैं।
इसके प्रमुख कार्य हैं -
- शरीर से अतिरिक्त द्रव को हटाना।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत करना।
- संक्रमण से रक्षा करना।
- वसा एवं पोषक तत्वों के परिवहन में सहायता करना।
फाइलेरिया के परजीवी इसी तंत्र को क्षतिग्रस्त कर देते हैं, जिससे शरीर में द्रव जमा होने लगता है और सूजन उत्पन्न होती है।
फाइलेरिया के क्या कारण है ?
यह रोग फाइलेरियोडिडी (Filarioidea) परिवार के सूत्रकृमियों (Roundworms/Nematodes) के संक्रमण से होता है।
मुख्य परजीवी निम्न हैं —
1. Wuchereria bancrofti
- विश्व के लगभग 90% मामलों के लिए उत्तरदायी।
- भारत में भी अधिकांश संक्रमण इसी परजीवी से होता है।
2. Brugia malayi
- शेष अधिकांश मामलों का कारण।
- भारत के कुछ राज्यों में पाया जाता है।
3. Brugia timori
- अपेक्षाकृत दुर्लभ।
- मुख्यतः इंडोनेशिया के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है।
रोग का संचरण (Transmission)
- लसीका फाइलेरिया एक Vector-Borne Disease है।
- भारत में इसका मुख्य वाहक मादा क्यूलेक्स मच्छर (Female Culex Mosquito)
- हालाँकि विश्व के कुछ क्षेत्रों में Anopheles, Aedes तथा Mansonia मच्छर भी इसके वाहक हो सकते हैं।
फाइलेरिया संक्रमण कैसे फैलता है ?
- संक्रमित व्यक्ति के रक्त में Microfilariae (सूक्ष्म लार्वा) मौजूद होते हैं।
- जब मादा मच्छर ऐसे व्यक्ति को काटती है, तो माइक्रोफाइलेरिया उसके शरीर में पहुँच जाते हैं।
- मच्छर के भीतर ये लार्वा विकसित होकर संक्रामक अवस्था में पहुँच जाते हैं।
- बाद में वही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो लार्वा उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
- ये लार्वा लसीका वाहिकाओं में जाकर वयस्क कृमि (Adult Worms) बन जाते हैं।
- वयस्क कृमि वर्षों तक जीवित रहकर लाखों माइक्रोफाइलेरिया उत्पन्न करते रहते हैं।
क्या एक मच्छर के काटने से फाइलेरिया हो जाता है ?
- आमतौर पर एक बार मच्छर काटने से संक्रमण नहीं होता।
- रोग होने के लिए संक्रमित मच्छरों द्वारा कई महीनों या कई वर्षों तक बार-बार काटे जाने की आवश्यकता होती है।
फाइलेरिया रोग के लक्षण
प्रारंभिक अवस्था में अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते।
समय के साथ निम्न समस्याएँ विकसित हो सकती हैं —
- पैरों में अत्यधिक सूजन (Elephantiasis)
- हाथों में सूजन
- अंडकोश में सूजन (Hydrocele)
- स्तनों में सूजन
- त्वचा का मोटा एवं कठोर होना
- बार-बार बुखार आना
- लसीका वाहिकाओं में सूजन
- दर्द एवं चलने-फिरने में कठिनाई
हाथीपाँव (Elephantiasis) क्यों होता है ?
वयस्क कृमि लसीका वाहिकाओं में रहकर उन्हें अवरुद्ध कर देते हैं।
इसके परिणामस्वरूप —
- लसीका द्रव का सामान्य प्रवाह रुक जाता है।
- द्रव शरीर में जमा होने लगता है।
- प्रभावित अंग धीरे-धीरे अत्यधिक मोटे एवं सूजे हुए दिखाई देने लगते हैं।
इसी अवस्था को Elephantiasis (हाथीपाँव) कहा जाता है।
भारत में स्थिति
- भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ फाइलेरिया का सबसे अधिक बोझ रहा है।
- यह रोग विशेष रूप से उत्तर प्रदेश ,बिहार ,झारखंड ,पश्चिम बंगाल ,ओडिशा ,असम ,तमिलनाडु ,केरल ,आंध्र प्रदेश ,तेलंगाना ,के कई जिलों में स्थानिक (Endemic) है।
- भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक लसीका फाइलेरिया का उन्मूलन करना है।
फाइलेरिया का उपचार (Treatment)
फाइलेरिया का उपचार मुख्यतः दो स्तरों पर किया जाता है —
1. संक्रमण रोकना
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार संक्रमण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है—Mass Drug Administration (MDA)
2. रोगियों का उपचार
- सूजन की नियमित देखभाल ,
- संक्रमण की रोकथाम ,
- Hydrocele का शल्य चिकित्सा (Surgery) ,
- त्वचा की स्वच्छता ,
- व्यायाम एवं फिजियोथेरेपी ।
Mass Drug Administration (MDA) क्या है ?
MDA एक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है जिसमें —
संक्रमण वाले क्षेत्र के सभी पात्र लोगों को वर्ष में एक बार फाइलेरिया-रोधी दवाएँ दी जाती हैं, चाहे उनमें रोग के लक्षण हों या नहीं।
इसका उद्देश्य —
- रक्त में मौजूद माइक्रोफाइलेरिया को समाप्त करना।
- मच्छरों द्वारा संक्रमण का चक्र तोड़ना।
- नए संक्रमण रोकना।
- अंततः रोग का उन्मूलन करना।
MDA में कौन-सी दवाएँ दी जाती हैं ?
WHO की सिफारिश के अनुसार विभिन्न देशों में निम्न दवाओं का उपयोग किया जाता है —
- Diethylcarbamazine (DEC)
- Albendazole
- कुछ क्षेत्रों में Ivermectin भी
भारत में सामान्यतः DEC + Albendazole का उपयोग किया जाता है।
पश्चिम बंगाल का नया अभियान
हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने -
- 10 जिलों में अभियान शुरू किया।
- 59 विकास खंडों एवं शहरी निकायों को शामिल किया।
- स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर दवाएँ वितरित कर रहे हैं।
- लोगों से स्वास्थ्यकर्मी की उपस्थिति में दवा खाने की अपील की जा रही है।
- लक्ष्य—2030 तक राज्य से फाइलेरिया का उन्मूलन।
फाइलेरिया रोकथाम के उपाय
- मच्छरों से बचाव
- घर एवं आसपास जलभराव रोकना
- मच्छरदानियों का प्रयोग
- पूरी बाँह के कपड़े पहनना
- MDA अभियान में दी जाने वाली दवाएँ अवश्य लेना
- संक्रमित रोगियों का समय पर उपचार
FAQ (Frequently Asked Questions)
1. लसीका फाइलेरिया (Lymphatic Filariasis) क्या है ?
उत्तर :- यह एक परजीवी जनित उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Disease) है, जिसे सामान्यतः हाथीपाँव (Elephantiasis) कहा जाता है। यह शरीर के लसीका तंत्र को प्रभावित करता है।
2. भारत में यह रोग किस मच्छर से फैलता है ?
उत्तर :- मुख्यतः मादा क्यूलेक्स (Culex) मच्छर के काटने से।
3. फाइलेरिया शरीर के किस तंत्र को प्रभावित करता है ?
उत्तर :- यह लसीका तंत्र (Lymphatic System) को प्रभावित करता है
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