हाल ही में मेघालय सरकार ने मेनिंगोकोकल संक्रमण की आशंका के मद्देनज़र एक परामर्श जारी किया है। इसमें नागरिकों से भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूरी बनाए रखने तथा निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की अपील की गई है।
मेनिंगोकोकल संक्रमण क्या है ?
- मेनिंगोकोकल संक्रमण एक गंभीर और तीव्र गति से बढ़ने वाली बीमारी है, जिसका कारण Neisseria meningitidis नामक जीवाणु है।
- यह संक्रमण प्रायः दो खतरनाक स्थितियों को जन्म देता है—
- मेनिन्जाइटिस: मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली झिल्लियों में सूजन।
- मेनिंगोकोसीमिया: रक्त में संक्रमण, जिसे रक्त विषाक्तता भी कहा जाता है।
- जब यह बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है, तो मस्तिष्क और मेरुरज्जु को आवृत करने वाली झिल्लियाँ (मेनिंजीज़) प्रभावित होकर सूज जाती हैं, जिससे स्थिति अत्यंत गंभीर हो सकती है।
संक्रमण कैसे फैलता है ?
- यह रोगाणु संक्रमित व्यक्ति की लार या गले के स्राव के संपर्क से फैलता है।
- संक्रमण के प्रसार के लिए आमतौर पर निकट या लंबे समय तक संपर्क आवश्यक होता है।
- सामान्य जुकाम या फ्लू की तुलना में यह उतना आसानी से नहीं फैलता।
प्रमुख लक्षण
- मेनिंगोकोकल संक्रमण के लक्षण अचानक और तीव्र रूप में प्रकट हो सकते हैं, जैसे—
- तेज बुखार
- तेज और लगातार सिरदर्द
- गर्दन में जकड़न
- त्वचा पर ऐसे चकत्ते या दाने जो दबाने पर रंग नहीं बदलते
उपचार और चिकित्सा
- इस संक्रमण का मुख्य उपचार एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है।
- गंभीर मामलों में अतिरिक्त चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ सकती है, जैसे—
- ऑक्सीजन के माध्यम से श्वास सहायता
- निम्न रक्तचाप को नियंत्रित करने वाली दवाएं
- क्षतिग्रस्त ऊतकों या मृत त्वचा के उपचार हेतु शल्य चिकित्सा
- मेनिंगोकोकल संक्रमण एक चिकित्सीय आपात स्थिति है। लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जीवन रक्षक सिद्ध हो सकता है।