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मोनोक्लोनल एन्टीबॉडीज़ (Monoclonal Antibodies)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में, इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनिशिएटिव (IAVI) एवं सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया ने SARS-CoV-2  वायरस को बेअसर करने वाले मोनोक्लोनल एन्टीबॉडीज़ का उपयोग करने के लिये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ी कम्पनी, मर्क के साथ एक समझौते की घोषणा की है।
  • IAVI एक गैर-लाभकारी वैज्ञानिक अनुसंधान संगठन है, जो तत्काल रूप से उत्पन्न वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों को हल करने की दिशा में कार्य करता है। इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है। सीरम इंस्टिट्यूट दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता संस्थान है।

मोनोक्लोनल एन्टीबॉडीज़ क्या होते हैं?

  • एन्टीबॉडीज़/प्रतिरक्षी उत्पन्न करने वाली अधिकतर कोशिकाओं की प्रवृत्ति कभी-कभी कैंसरकारी (Cancerous) हो जाती है, क्योंकि इन कोशिकाओं में विभाजन की असीमित तथा अनियंत्रित क्षमता उत्पन्न हो जाती है।
  • कोशिकाओं के विभाजन (Division) से ऐसे अवयव को मायलोमा (Myeloma) कहते हैं। ये मायलोमा एकल कोशिका से प्राप्त होता है। अत: इस कोशिका से प्राप्त संतति कोशिकाओं (Daughter Cells) में एक समान जीन पाए जाते हैं, जिन्हें क्लोन कहते हैं। इस प्रकार से प्राप्त क्लोन की यह विशेषता होती है कि समस्त कोशिकाएँ एक ही प्रकार की एन्टीबॉडीज़ का उत्पादन करती हैं।
  • जर्मनी के जॉर्ज जे.एफ. कोहलर (Georges J.EKohler) एवं अर्जेन्टीना के सीज़र मिल्सटेन (Cesar Milstein) ने वर्ष 1975 में अनुसंधान शालाओं में मायलोमा के एकल क्लोन से एन्टीबॉडीज़ (Antibodies) के उत्पादन की विधि विकसित की थी तथा इन्हें एकल क्लोनी प्रतिरक्षी या मोनोक्लोनल एन्टीबॉडीज़ (Monoclonal Antibodies) नाम दिया। इसके लिये कोहलर एवं मिल्सटीन को वर्ष 1984 में नोबल पुरस्कार दिया गया था। दूसरी एन्टीबॉडीज की अपेक्षा मोनोक्लोनल एन्टीबॉडीज़ अधिक स्वच्छ एवं एक समान होती है।
  • इसके द्वारा ड्रोसीफिला (Drosophila) के गुणसूत्रों में Z-DNA को अंकित करने में सफलता प्राप्त की गई। कैंसर व प्रतिरोधी तंत्र के उपचार में मोनोक्लोनल एन्टीबॉडीज़ का उपयोग किया जाता है।
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