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केरल में खोजी गई ततैया की नई प्रजाति:कृषि कीट प्रबंधन में बन सकती है उपयोगी हथियार

चर्चा में क्यों ?

भारत के वैज्ञानिकों ने जैव विविधता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ततैया (Wasp) की एक नई प्रजाति की खोज की है। स्पिलोमेना मलाबारिका (Spilomena malabarica) नामक यह नई प्रजाति केरल के कोझिकोड जिले में पाई गई है। यह खोज न केवल भारत की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करती है, बल्कि कृषि क्षेत्र में जैविक कीट नियंत्रण की संभावनाओं को भी मजबूत करती है।


भारतीय वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण उपलब्धि

  • इस नई प्रजाति की पहचान भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India - ZSI) के वैज्ञानिकों ने की है।
  • शोध के दौरान वैज्ञानिकों को एक विशेष पीले रंग के पैन ट्रैप (Yellow Pan Trap) में इस दुर्लभ कीट का नमूना प्राप्त हुआ। 
  • बाद में आधुनिक माइक्रोस्कोप और 3-डी इमेजिंग तकनीक की सहायता से इसकी संरचना का विस्तृत अध्ययन किया गया।

बेहद छोटी लेकिन विशेष ततैया

  • स्पिलोमेना मलाबारिका आकार में अत्यंत छोटी है। इसकी लंबाई लगभग 3.5 मिलीमीटर है तथा इसका शरीर काले और भूरे रंग का होता है। 
  • सामान्य आंखों से इसकी विशिष्ट पहचान करना कठिन है, इसलिए वैज्ञानिकों ने इसकी सूक्ष्म शारीरिक संरचना का गहन अध्ययन किया।
  • वैज्ञानिकों ने पाया कि इसके अग्र पंख (Forewing) में केवल एक सबमार्जिनल सेल मौजूद है, जो इसे अन्य संबंधित प्रजातियों से अलग बनाती है। पंखों की यह अनूठी बनावट इसकी पहचान का प्रमुख आधार है।

कृषि के लिए क्यों है महत्वपूर्ण ?

  • यह ततैया एफिड (Aphid) या माहू जैसे छोटे पौध-हानिकारक कीटों का शिकार करती है। 
  • एफिड्स कृषि फसलों, बागवानी पौधों तथा अन्य वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
  • ऐसे में यह नई प्रजाति प्राकृतिक रूप से इन कीटों की संख्या नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। 
  • विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसका उपयोग जैविक कीट नियंत्रण (Biological Pest Control) के क्षेत्र में किया जा सकता है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम हो सकती है।

अन्य प्रजातियों से कैसे अलग है ?

  • शोधकर्ताओं के अनुसार यह प्रजाति अपनी निकटतम रिश्तेदार प्रजाति स्पिलोमेना यूनस (Spilomena unus) से कुछ समानताएं रखती है, लेकिन इसके सिर और चेहरे की संरचना में महत्वपूर्ण अंतर पाए गए हैं।
  • इसका सिर अपेक्षाकृत कम लंबा है।
  • आंखों और सिर के ऊपरी भाग के बीच का अनुपात अलग है।
  • चेहरे का अग्रभाग (Clypeus) अपेक्षाकृत अधिक सपाट है।
  • यही विशेषताएं इसे अन्य ज्ञात प्रजातियों से अलग पहचान प्रदान करती हैं।

मलाबार क्षेत्र के सम्मान में रखा गया नाम

  • नई प्रजाति का नाम ‘मलाबारिका’ केरल के ऐतिहासिक मलाबार क्षेत्र के सम्मान में रखा गया है, जहां इसका नमूना प्राप्त हुआ था। वैज्ञानिकों के अनुसार नई प्रजातियों का नामकरण स्थानीय भौगोलिक और प्राकृतिक विरासत को सम्मान देने का महत्वपूर्ण माध्यम होता है।

वर्गीकरण पर उठे नए वैज्ञानिक प्रश्न

  • इस खोज ने वैज्ञानिकों के सामने एक नई चुनौती भी प्रस्तुत की है। 
  • स्पिलोमेना मलाबारिका में ऐसे गुण पाए गए हैं जो ततैयों के दो अलग-अलग समूहों के बीच की सीमाओं को धुंधला करते हैं। 
  • इससे संकेत मिलता है कि वर्तमान वर्गीकरण प्रणाली में भविष्य में संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • शोधकर्ताओं का मानना है कि डीएनए विश्लेषण और जीवन चक्र के विस्तृत अध्ययन से इस प्रजाति के विकासक्रम और वर्गीकरण को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। 

जैव विविधता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज इस बात का प्रमाण है कि भारत के जंगलों और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों में अभी भी अनेक ऐसी प्रजातियां मौजूद हैं, जिनकी पहचान होना बाकी है। एक छोटे से कीट की यह खोज न केवल देश की जैव विविधता को समृद्ध करती है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन, जीव विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ी वैज्ञानिक समझ को भी आगे बढ़ाती है।

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