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स्कूली शिक्षा प्रणाली पर नीति आयोग की रिपोर्ट

संदर्भ 

  • हाल ही में नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी और सीईओ श्रीमती निधि छिब्बर ने 'भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली: गुणवत्ता संवर्धन के लिए सामयिक विश्लेषण और नीतिगत रूपरेखा' शीर्षक से एक व्यापक रिपोर्ट जारी की।  

नीति आयोग की रिपोर्ट से संबंधित प्रमुख बिंदु 

  • भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली, जो 14.71 लाख स्कूलों और 24.69 करोड़ से अधिक छात्रों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली है, वर्तमान में एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। 
  • यह रिपोर्ट पिछले एक दशक के आंकड़ों (जैसे UDISE+ 2024-25 और NAS 2021) और राष्ट्रीय कार्यशालाओं से प्राप्त निष्कर्षों का एक निचोड़ है, जो भविष्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक ठोस खाका तैयार करती है। 

पिछले दशक की उपलब्धियाँ: एक नज़र में 

  • रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे और पहुंच में अभूतपूर्व प्रगति की है। डेटा विश्लेषण और हीट मैप्स के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख सुधारों को रेखांकित किया गया है: 
    • डिजिटल विस्तार: स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्ट कक्षाओं की पहुंच में भारी वृद्धि हुई है। 
    • बुनियादी सुविधाएं: बिजली और कार्यात्मक स्वच्छता (Toilets) की व्यवस्था अब अधिकांश स्कूलों में सुनिश्चित की जा चुकी है।
    • समानता और समावेशन: स्कूली छात्राओं की भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के नामांकन अनुपात में भी सकारात्मक वृद्धि देखी गई है। 
    • सीखने के परिणाम (Learning Outcomes): महामारी के बाद की चुनौतियों के बावजूद, निपुण भारत मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभाव से बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) में सुधार के संकेत मिले हैं। 

भविष्य की चुनौतियां और रणनीतिक सिफारिशें 

रिपोर्ट में 11 प्रमुख चुनौतियों की पहचान की गई है और उनके समाधान के लिए 13 व्यापक अनुशंसाएं दी गई हैं, जिन्हें दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है: 

1. प्रणालीगत सुधार (Systemic Recommendations) 

  • साक्ष्य-आधारित युक्तिकरण (Rationalization) के माध्यम से स्कूलों को अधिक समग्र बनाना।
  • शासन में सुधार और जिला स्तर पर कार्य बल (Task Force) का गठन करना।
  • शिक्षकों की पारदर्शी तैनाती और उनके निरंतर व्यावसायिक विकास पर जोर।
  • विद्यालय प्रबंधन समितियों (SMCs) को सशक्त बनाना। 

2. शैक्षणिक बदलाव (Academic Recommendations) 

  • शैक्षणिक नवाचार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग।
  • व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा के साथ जोड़ना।
  • बचपन की देखभाल और शिक्षा (ECCE) को सुदृढ़ करना।
  • रटने की क्षमता के बजाय समझ और कौशल आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देना। 

कार्यान्वयन की रूपरेखा 

  • नीति आयोग ने केवल सुझाव ही नहीं दिए हैं, बल्कि उनके कार्यान्वयन के लिए 33 सूत्रीय मार्ग भी तैयार किए हैं। इन्हें अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक दृष्टिकोण में बांटा गया है।
  • इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जवाबदेही है। रिपोर्ट में केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। प्रगति को मापने के लिए 125 से अधिक प्रदर्शन सफलता संकेतक (KPIs) निर्धारित किए गए हैं, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि नीतियां केवल कागजों तक सीमित न रहें। 

निष्कर्ष 

  • नीति आयोग की यह रिपोर्ट भारतीय स्कूली शिक्षा को केवल साक्षरता से आगे ले जाकर गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा की ओर ले जाने का एक साहसिक प्रयास है। यदि इन 13 अनुशंसाओं को सही ढंग से लागू किया जाता है, तो भारत वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से अग्रसर होगा।
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