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हम्बोल्टिया नैरियाना (Humboldtia nairiana)

चर्चा में क्यों ? 

  • हाल ही में केरल के दक्षिणी पश्चिमी घाट से वैज्ञानिकों ने सदाबहार वृक्ष की एक नई प्रजाति की पहचान की है। यह महत्वपूर्ण खोज पालोड स्थित जवाहरलाल नेहरू उष्णकटिबंधीय वनस्पति उद्यान एवं अनुसंधान संस्थान (जेएनटीबीजीआरआई) के शोधकर्ताओं द्वारा की गई। नई प्रजाति को हम्बोल्टिया नैरियाना नाम दिया गया है। 

हम्बोल्टिया नैरियाना (Humboldtia nairiana) के बारे में 

  • यह नई प्रजाति हम्बोल्टिया वंश (Genus) से संबंधित है।
  • इस नई प्रजाति का नाम जेएनटीबीजीआरआई के पूर्व निदेशक तथा प्रसिद्ध पादप जैव प्रौद्योगिकीविद् जी.एम. नायर के सम्मान में रखा गया है।

विशेषताएँ  

  • स्वरूप: यह 5 से 8 मीटर की ऊंचाई वाला एक मध्यम आकार का सदाबहार (Evergreen) वृक्ष है। 
  • छाल और शाखाएं: इसकी छाल हल्की भूरी, मस्सेदार (Warty) होती है, जिस पर मलाईदार-सफेद रंग का विशिष्ट धब्बा दिखाई देता है। इसकी शाखाएं कोणीय और पूरी तरह चिकनी होती हैं।
  • समानता और अंतर: यह बनावट में हम्बोल्टिया पोनमुडियाना जैसी दिखता है, लेकिन इसके स्टिप्यूल (Stipules/अनुपर्ण) छोटे और कम बालों वाले होते हैं। इसके फूलों के डंठल (Pedicels) लंबे और फल छोटी चोंच वाले अंडाकार-लम्बे होते हैं। 

भौगोलिक अवस्थिति और पारिस्थितिक महत्व 

  • यह केवल केरल में पाई जाने वाली एक स्थानिक (Endemic) प्रजाति है।  
  • वर्तमान में यह जैव विविधता से समृद्ध अगस्त्यमाला जीवमंडल अभ्यारण्य (Agasthyamala Biosphere Reserve) में लगभग 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नदीतटीय पारिस्थितिकी तंत्र में पाई गई है।  
  • नदी के किनारे उगने वाले ये वृक्ष मिट्टी के कटाव को रोकने और जलीय-स्थलीय पारिस्थितिकी के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

संरक्षण की स्थिति 

वैज्ञानिकों के क्षेत्र सर्वेक्षण ने इस प्रजाति के अस्तित्व को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं:

  • भौगोलिक दायरा : कुल ज्ञात आवास क्षेत्र 2 वर्ग किलोमीटर से भी कम।
  • परिपक्व वृक्षों की संख्या : जंगलों में केवल 10 से भी कम परिपक्व पेड़ जीवित हैं।
  • आबादी की प्रकृति : अत्यंत नाजुक, संकीर्ण और संकटग्रस्त।
  • आईयूसीएन वर्गीकरण : शोधकर्ताओं द्वारा डेटा अपर्याप्त (Data Deficient) श्रेणी में सूचीबद्ध। 
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