संदर्भ
हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने 16वें वित्त आयोग की अवधि के दौरान एक नई व्यापक योजना सार्थक पीडीएस (राशन परिवहन और प्रबंधन में सहायता - सार्वजनिक वितरण में स्वचालन के साथ आय) को मंजूरी दी है।
सार्थक-पीडीएस योजना के बारे में
- यह योजना 31 मार्च, 2031 तक संचालित रहेगी।
- इस योजना का कुल परिव्यय ₹25,530 करोड़ है।
- यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के लिए दो मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करती है:
- एनएफएसए के तहत खाद्यान्नों के अंतर-राज्यीय आवागमन और उचित दर दुकान (FPS) डीलरों के मार्जिन के लिए राज्य एजेंसियों को सहायता।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिकीकरण और सुधार की योजना (SMART-PDS)।
योजना के मुख्य उद्देश्य
सार्थक-पीडीएस योजना का मूल दर्शन लास्ट-माइल डिलीवरी (अंतिम छोर तक वितरण) और लीकेज-मुक्त व्यवस्था पर आधारित है। इसके दो मुख्य स्तंभ हैं:
- वित्तीय सुदृढ़ता (Financial Viability): राज्यों को खाद्यान्न के अंतर-राज्यीय परिवहन, हैंडलिंग और एफपीएस (राशन दुकान) डीलरों के मार्जिन के लिए एक सुनिश्चित वित्तीय सहायता ढाँचा प्रदान करना ताकि आपूर्ति श्रृंखला निर्बाध बनी रहे।
- एकीकृत एवं नागरिक-केंद्रित संरचना: एक ऐसी अंतरसंचालनीय (Interoperable) और तार्किक पीडीएस संरचना का निर्माण करना जो नागरिकों के लिए सुलभ हो और प्रणाली की दक्षता को बढ़ाए।
उन्नत प्रौद्योगिकियों का समावेशन (Tech-Driven Governance)
यह योजना चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) की तकनीकों का उपयोग करके पारंपरिक पीडीएस को एक स्मार्ट नेटवर्क में बदलती है:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML): इसके माध्यम से खाद्यान्न की मांग का पूर्वानुमान लगाने, आपूर्ति श्रृंखला को बुद्धिमत्तापूर्वक अनुकूलित (Optimize) करने और धोखाधड़ी वाले लेन-देन की पहचान करने में मदद मिलेगी।
- स्वाभाविक भाषा प्रसंस्करण (NLP): एआई-संचालित शिकायत निवारण प्रणालियों में एनएलपी का उपयोग किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं में भी नागरिक अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज और ट्रैक कर सकेंगे।
- ब्लॉकचेन (Blockchain) तकनीक: खाद्यान्न के उठाव से लेकर वितरण तक के पूरे चक्र को ब्लॉकचेन पर दर्ज किया जाएगा, जिससे डेटा के साथ छेड़छाड़ (Tampering) असंभव होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
- राज्य कमांड कंट्रोल केंद्र (Command and Control Centers): वास्तविक समय (Real-time) में डेटा-संचालित निरीक्षण और निगरानी के लिए राज्यों में अत्याधुनिक नियंत्रण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- मानकीकरण: संपूर्ण प्रसंस्करण संरचना को सुरक्षित और टिकाऊ बनाने के लिए आईएसओ (ISO) - प्रमाणन से लैस किया जाएगा।
योजना का महत्व
कल्याणकारी राज्य की प्रतिबद्धता और पोषण सुरक्षा
- भारत सरकार की यह पहल देश के 81.35 करोड़ लाभार्थियों को भोजन और पोषण सुरक्षा की कानूनी और सामाजिक गारंटी देती है।
- यह संविधान के अनुच्छेद 47 (पोषण और जीवन स्तर को ऊपर उठाने का राज्य का कर्तव्य) और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-2 (Zero Hunger) को प्राप्त करने की दिशा में बड़ा कदम है।
सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)
- योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों की एजेंसियों और परिवहन व्यय को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। यह केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय और प्रशासनिक समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
लीकेज और बिचौलियों का उन्मूलन
- अतीत में पीडीएस प्रणाली डाइवर्जन (अनाज का खुले बाजार में चला जाना) और फर्जी लाभार्थियों की समस्या से ग्रसित रही है। सार्थक-पीडीएस का तकनीकी ढांचा वास्तविक समय में ट्रैकिंग सुनिश्चित कर लीकेज को न्यूनतम स्तर पर लाएगा।
चुनौतियाँ
- डिजिटल विभाजन (Digital Divide): सुदूर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा: करोड़ों नागरिकों के आधार और व्यक्तिगत डेटा को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना।
- क्षमता निर्माण (Capacity Building): एफपीएस डीलरों और स्थानीय स्तर के अधिकारियों को उन्नत तकनीकों (AI/ML) के उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना।
निष्कर्ष
सार्थक-पीडीएस योजना न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन (Minimum Government, Maximum Governance) और सबका साथ, सबका विकास के विज़न को चरितार्थ करती है। यह योजना वैधानिक ढांचे को अत्याधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर, न केवल वित्तीय घाटे को कम करेगी बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि देश का कोई भी नागरिक भूखा न सोए और उसे सम्मानजनक जीवन (अनुच्छेद 21) का अधिकार मिले।