संदर्भ
वैश्विक जलवायु परिवर्तन के दौर में शून्य कार्बन उत्सर्जन (Net Zero) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारतीय रेलवे ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। रेलवे ने उत्तर रेलवे के जिंद-सोनीपत खंड (हरियाणा) पर 10 डिब्बों वाली भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल (Hydrogen Fuel Cell) आधारित ट्रेन के परिचालन को मंजूरी दे दी है। यह कदम न केवल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण को दर्शाता है, बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा का नेतृत्व करने वाले अग्रणी देशों की कतार में खड़ा करता है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल (Hydrogen Fuel Cell) आधारित ट्रेन के बारे में
- प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System): यह ट्रेन 1200 किलोवाट (kW) हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणाली द्वारा संचालित होगी।
- गति: परिचालन के दौरान यह ट्रेन अधिकतम 75 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ने में सक्षम होगी।
- कार्यप्रणाली: हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच एक रासायनिक प्रतिक्रिया कराई जाती है, जिससे बिजली (विद्युत ऊर्जा) उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में उप-उत्पाद (By-product) के रूप में केवल जल वाष्प (Water Vapor) का उत्सर्जन होता है। इसमें किसी भी प्रकार की हानिकारक ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन नहीं होता।
बुनियादी ढांचा और सुरक्षा प्रोटोकॉल (Infrastructure & Safety)
चूंकि हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए इसके सुरक्षित संचालन के लिए भारतीय रेलवे ने एक कड़ा और अत्याधुनिक ढांचा तैयार किया है:
ईंधन भरने की व्यवस्था (Refueling Infrastructure)
- पायलट मार्ग: हरियाणा के जिंद-सोनीपत खंड को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है।
- भंडारण संयंत्र: जिंद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और ईंधन भरने की सुविधा स्थापित की गई है। इसके लिए पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण का वैधानिक लाइसेंस जारी किया जा चुका है।
- बैकअप सिस्टम: निर्बाध परिचालन सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सहायता, महत्वपूर्ण पुर्जों और आपातकालीन स्थितियों के लिए एक अतिरिक्त (स्पेयर) कंप्रेसर यूनिट की व्यवस्था की गई है।
त्रि-स्तरीय सुरक्षा ढाँचा
- सेंसर आधारित निगरानी: हाइड्रोजन उत्पादन और वितरण केंद्र पर अत्याधुनिक हाइड्रोजन रिसाव (Leakage) सेंसर और फायर डिटेक्टर लगाए गए हैं। धूल जमने के कारण सेंसर बाधित न हों, इसके लिए नियमित सफाई और जाँच का कड़ा नियम बनाया गया है।
- मानकीकरण: अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) द्वारा अनुमोदित संचालन एवं रख-रखाव नियमावली (Manuals) तैयार की गई है। दिल्ली के शकुरबस्ती में इसके लिए विशेष रख-रखाव सुविधा (Maintenance Depot) बनाई जा रही है, जहाँ नियमित सुरक्षा ऑडिट होंगे।
- 24/7 निगरानी और मानव संसाधन: ईंधन भरने की प्रणाली की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। शुरुआत में सुचारू संचालन के लिए प्रमाणित और विशेष रूप से प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी ट्रेन के भीतर ही मौजूद रहेंगे।