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पाखल वन्यजीव अभ्यारण्य

भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) के वैज्ञानिकों ने तेलंगाना के पाखल वन्यजीव अभ्यारण्य में पुष्पों की एक नवीन प्रजाति खोजी है जिसे ‘डिक्लीप्टेरा पाखालिका (Dicliptera pakhalica)’ नाम दिया गया है। 

पाखल वन्यजीव अभ्यारण्य के बारे में 

  • यह अभ्यारण्य तेलंगाना के वारंगल जिले में स्थित है। यहाँ प्रसिद्ध पाखल झील स्थित है जिसका निर्माण 1213 ईस्वी में काकतीय शासक राजा गणपति देव के काल में किया गया था। 
  • यहाँ मुख्य रूप से ‘मिश्रित पर्णपाती वन’ पाए जाते हैं। इनमें सागौन और बांस के साथ-साथ टर्मिनलिया, टेरोकार्पस एवं महुआ जैसे वृक्षों की प्रचुरता है। इसके अतिरिक्त, यह क्षेत्र जड़ी-बूटियों और लताओं की विविधता से समृद्ध है।
  • यह अभ्यारण्य तेंदुआ, पैंथर, लकड़बग्घा, स्लॉथ बियर (Sloth Bear), चीतल, कृष्ण हिरण एवं पर्वतीय गज़ेल जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। 

डिक्लीप्टेरा पाखालिका के बारे में 

  • यह एक पुष्पीय पौधा है जो एकैंथेसी (Acanthaceae) कुल से संबंधित है। यह विशिष्ट रूप से नदी-नालों के किनारे और पथरीले इलाकों में विकसित होता पाया गया है।
  • इस पौधे में फूल आने का समय नवंबर से जनवरी के मध्य होता है जबकि इसमें फलों का विकास दिसंबर से मार्च तक देखा जाता है।
  • यह प्रजाति क्षेत्र के अन्य देशी पौधों, जैसे- टैरेन्ना एशियाटिका, रुएलिया प्रोस्ट्राटा एवं मैलोटस फिलिपेंसिस के साथ मिलकर उगती है। 
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