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PARIVARTAN योजना: दिल्ली-NCR में 2 लाख से अधिक प्रदूषणकारी ट्रक और बसों को बदलने की केंद्र की योजना

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): PARIVARTAN योजना, भारत स्टेज उत्सर्जन मानक, BS-VI, इलेक्ट्रिक वाहन, NCRPB, वाहन प्रदूषण
मुख्य परीक्षा (Mains): GS Paper III – पर्यावरण, वायु प्रदूषण, सतत परिवहन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी एवं सरकारी नीतियाँ

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार PARIVARTAN योजना के क्रियान्वयन में तेजी ला रही है। इस योजना का लक्ष्य दिल्ली-NCR में पंजीकृत 2 लाख से अधिक पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों और बसों को स्वच्छ और आधुनिक वाहनों से बदलना है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • योजना के तहत BS-IV या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले व्यावसायिक वाहनों को शामिल किया गया है।
  • इन पुराने वाहनों को BS-VI या उससे अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) से बदला जाएगा।
  • सरकार का लक्ष्य लगभग एक वर्ष के भीतर सभी पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा करना है, ताकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्वच्छ व्यावसायिक परिवहन को तेजी से बढ़ावा दिया जा सके।
  • 27 अगस्त 2026 तक PARIVARTAN Portal पर 1,300 से अधिक लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया था। इसके अलावा 42 बैंक एवं NBFCs और 15 ऑटोमोबाइल Original Equipment Manufacturers (OEMs) को भी योजना से जोड़ा गया था।

PARIVARTAN योजना क्या है?

PARIVARTAN का पूरा नाम है: Programme for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions 

  • यह मुख्य रूप से दिल्ली-NCR में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए शुरू किया गया Vehicle Fleet Modernisation Programme है।
  • इसके तहत पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले व्यावसायिक वाहनों को हटाकर उनकी जगह कम प्रदूषण वाले आधुनिक वाहन या इलेक्ट्रिक वाहन लाने को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस कार्यक्रम को 3 जून 2026 को मंजूरी दी थी और इसे 14 जुलाई 2026 को लॉन्च किया गया।
  • योजना का कुल वित्तीय परिव्यय ₹9,585 करोड़ है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से ₹5,041 करोड़ की बजटीय सहायता शामिल है।
  • योजना का क्रियान्वयन सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए वित्तीय सहायता आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) के माध्यम से दी जा रही है।

PARIVARTAN योजना की प्रमुख विशेषताएँ

विशेषता

विवरण

पूरा नाम

Programme for Accelerated Renewal and Incentivization of Vehicle Assets for Reducing Transport Air Pollution and Network Emissions

मंजूरी

3 जून 2026

लॉन्च

14 जुलाई 2026

लक्षित वाहन

2 लाख से अधिक ट्रक और बसें

पात्र पुराने वाहन

BS-IV और उससे पुराने उत्सर्जन मानक वाले वाहन

नए विकल्प

BS-VI या उससे कड़े मानक वाले वाहन / इलेक्ट्रिक वाहन

कुल परिव्यय

₹9,585 करोड़

केंद्र सरकार की सहायता

₹5,041 करोड़

क्रियान्वयन मंत्रालय

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय

वित्तीय व्यवस्था

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB)

क्षेत्र

दिल्ली तथा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR जिले

किन वाहनों को योजना में शामिल किया गया है?

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (NCT Delhi) और हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के NCR जिलों में पंजीकृत ट्रकों और बसों को लक्षित करता है। योजना से लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें लगभग:

1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं।

  • BS-IV या उससे पुराने मानकों वाले वाहन, जिनमें Pre-BS, BS-I, BS-II और BS-III वाहन शामिल हैं, योजना के दायरे में आते हैं।
  • BS-III या उससे पुराने वाहनों को Registered Vehicle Scrapping Facility में स्क्रैप कराना अनिवार्य है।
  • BS-IV वाहनों को स्क्रैप किया जा सकता है या योजना की शर्तों के अनुसार NCR के बाहर पात्र गैर-NCAP शहरों अथवा कस्बों में बेचा जा सकता है।

PARIVARTAN योजना में क्या प्रोत्साहन मिलेंगे?

पुराने व्यावसायिक वाहनों को बदलने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक नया ट्रक या बस खरीदने की अधिक लागत है। इसलिए PARIVARTAN योजना में पर्यावरणीय नियमों के साथ आर्थिक प्रोत्साहनों को भी जोड़ा गया है।

  1. ब्याज में सहायता: पात्र लाभार्थियों को नए वाहन के लिए लिए गए योग्य ऋण पर पाँच वर्षों तक 5% ब्याज सहायता मिल सकती है। इससे छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों और व्यावसायिक वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
  2. रोड टैक्स में छूट: पात्र नए वाहनों को भाग लेने वाले राज्यों द्वारा जारी अधिसूचनाओं के तहत 10 वर्षों तक 100% रोड टैक्स छूट मिल सकती है।
  3. Registration Fee में छूट: पात्र नए वाहनों पर Registration Fee माफ की जाएगी, जिससे नया वाहन खरीदने की शुरुआती लागत कम होगी।
  4. OEM Discount: योजना में भाग लेने वाली वाहन निर्माता कंपनियाँ पात्र नए वाहनों की Ex-showroom Price पर कम से कम 8% की छूट देंगी।
  5. Fuel Vouchers: पात्र BS-VI Diesel या CNG वाहन खरीदने वालों को वाहन की श्रेणी के अनुसार लगभग ₹1,200 से ₹4,800 प्रति माह तक के Fuel Vouchers पाँच वर्षों तक मिल सकते हैं।
  6. Electric Vehicles के लिए प्रोत्साहनइलेक्ट्रिक वाहन चुनने वाले लाभार्थियों को वाहन की श्रेणी के अनुसार ₹64,000 से ₹2.56 लाख तक का एकमुश्त प्रोत्साहन मिल सकता है।

दिल्ली के लिए विशेष प्रावधान

PARIVARTAN योजना में दिल्ली के भीतर Electric Mobility को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

  • दिल्ली में बदले जाने वाले Light Goods Vehicles (LGVs) का इलेक्ट्रिक होना आवश्यक है।
  • दिल्ली में बसों के लिए नए वाहन के विकल्प BS-VI CNG या Electric Vehicles तक सीमित रखे गए हैं।

यह नीति केवल वाहनों की Fuel Efficiency सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि धीरे-धीरे Zero-Emission Mobility की ओर बढ़ने का संकेत देती है।

PARIVARTAN योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

1. वाहन प्रदूषण में कमी: पुराने डीजल ट्रक और बसें आधुनिक वाहनों की तुलना में अधिक प्रदूषक तत्वों का उत्सर्जन कर सकते हैं। पुराने वाहनों को बदलने से निम्न प्रदूषकों के उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है:

  • Particulate Matter (PM)
  • Nitrogen Oxides (NOx)
  • Carbon Monoxide (CO)
  • Hydrocarbons एवं अन्य परिवहन संबंधी प्रदूषक

2. दिल्ली-NCR की Air Quality में सुधार: दिल्ली-NCR का वायु प्रदूषण किसी एक राज्य की प्रशासनिक सीमा तक सीमित नहीं रहता। ट्रक और बसें लगातार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच आवाजाही करती हैं। इसलिए केवल दिल्ली के भीतर प्रदूषणकारी वाहनों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा।

3. पुराने वाहन बेड़े का आधुनिकीकरण: यह योजना पुराने व्यावसायिक वाहनों को तेजी से हटाने और देश के Commercial Vehicle Fleet को आधुनिक बनाने में मदद कर सकती है। आधुनिक वाहनों में सामान्यतः बेहतर Fuel Efficiency, Emission Control और Safety Technologies उपलब्ध होती हैं।

4. Electric Mobility को बढ़ावा: इलेक्ट्रिक व्यावसायिक वाहनों के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक प्रोत्साहन और दिल्ली में कुछ श्रेणियों के लिए EV को अनिवार्य करने से भारत के Clean Mobility Transition को गति मिल सकती है।

5. Vehicle Scrapping Ecosystem को मजबूती: कुछ श्रेणियों के पुराने वाहनों की अनिवार्य Scrapping से Registered Vehicle Scrapping Facilities (RVSFs) के विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे पुराने वाहनों में मौजूद Steel, Aluminium और अन्य सामग्रियों की Recycling को बढ़ावा देकर Circular Economy को भी मजबूती मिल सकती है।

Digital Implementation

PARIVARTAN को बड़े स्तर पर Digital Programme के रूप में लागू किया जा रहा है।

इसके लिए एक समर्पित PARIVARTAN Portal बनाया गया है, जिसके माध्यम से:

  • वाहन की पात्रता की जाँच
  • लाभार्थी पंजीकरण
  • Incentive Application
  • Application Tracking
  • योजना से संबंधित जानकारी

जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके Digital Ecosystem को VAHAN, V-Scrap, DigiELV और Public Financial Management System (PFMS) जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।

प्रमुख चुनौतियाँ

  1. नए वाहन की अधिक लागत: Subsidy और Incentives के बावजूद नया ट्रक या बस खरीदना छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के लिए महंगा हो सकता है।
  2. Charging Infrastructure: बड़े स्तर पर Electric Commercial Vehicles अपनाने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय Charging Infrastructure की आवश्यकता होगी।
  3. Finance तक पहुँच: Interest Support के बावजूद छोटे वाहन मालिकों को बैंक या NBFC से Loan प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।
  4. राज्यों के बीच समन्वयDelhi-NCR कई राज्यों में फैला हुआ है। इसलिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच बेहतर प्रशासनिक समन्वय आवश्यक होगा।
  5. Scrapping Infrastructure: लाखों पुराने वाहनों को हटाने के लिए पर्याप्त संख्या में Registered Vehicle Scrapping Facilities की आवश्यकता होगी।
  6. वाहन मालिकों की अनिच्छा: कुछ वाहन मालिक पुराने वाहनों को चलाना जारी रखना चाह सकते हैं क्योंकि वे पहले ही वाहन की शुरुआती लागत निकाल चुके होते हैं।

आगे की राह

  • PARIVARTAN की सफलता के लिए Vehicle Replacement Incentives को व्यापक Transport और Air Quality Policies से जोड़ना आवश्यक है।
  • Commercial Electric Vehicles के लिए Charging Infrastructure का तेजी से विस्तार करना होगा।
  • छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को आसान और सस्ता Vehicle Finance उपलब्ध कराना होगा।
  • Registered Vehicle Scrapping Facilities की संख्या बढ़ानी होगी।
  • दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा।
  • केवल बदले गए वाहनों की संख्या नहीं, बल्कि योजना के कारण वास्तविक उत्सर्जन में कितनी कमी आई, इसका भी नियमित आकलन होना चाहिए।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

प्रश्न. PARIVARTAN योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसका उद्देश्य दिल्ली-NCR में BS-IV और उससे पुराने ट्रकों एवं बसों को बदलना है।
  2. पात्र पुराने वाहनों को BS-VI या उससे कड़े मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदला जा सकता है।
  3. यह योजना केवल दिल्ली में पंजीकृत वाहनों तक सीमित है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

मुख्य परीक्षा प्रश्न 

प्रश्न. दिल्ली-NCR में वाहन प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने में PARIVARTAN योजना की भूमिका की चर्चा कीजिए। इसके क्रियान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों का भी उल्लेख कीजिए।

FAQs

PARIVARTAN योजना क्या है?

PARIVARTAN केंद्र सरकार का एक कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य दिल्ली-NCR में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों एवं बसों को BS-VI या उससे अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना है।

योजना से कितने वाहनों को लाभ मिलने की उम्मीद है?

इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 2.07 लाख ट्रकों और बसों को शामिल किए जाने की उम्मीद है।

PARIVARTAN योजना का कुल वित्तीय परिव्यय कितना है?

योजना का कुल परिव्यय ₹9,585 करोड़ है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से ₹5,041 करोड़ की बजटीय सहायता शामिल है।

कौन से वाहन पात्र हैं?

मुख्य रूप से BS-IV या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले व्यावसायिक ट्रक और बसें, जो योजना की अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।

क्या पुराने वाहनों को Electric Vehicles से बदला जा सकता है?

हाँ। Electric Vehicles पात्र स्वच्छ विकल्पों में शामिल हैं और EV खरीदने पर योजना में विशेष आर्थिक प्रोत्साहन का भी प्रावधान है।

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