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प्रगति प्रोजेक्ट

संदर्भ 

हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रगति (PRAGATI) नामक एक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया है।

प्रगति प्रोजेक्ट के बारे में 

  • यह बहु-साझेदार पहल भारत में समावेशी, टिकाऊ और जलवायु-संवेदनशील कृषि परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाली है। 

उद्देश्य और भौगोलिक दायरा:

  • इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य देश के 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कुशल कृषि-उद्यमी (Agri-Entrepreneurs) बनाना है। 
  • इसके माध्यम से देश भर के 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में व्यापक सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है।

पहल का विस्तार: 

  • शुरुआती चरण में यह पहल देश के 8 प्रमुख कृषि राज्यों में लागू की जाएगी:
    • मध्य प्रदेश  
    • उत्तर प्रदेश 
    • बिहार 
    • महाराष्ट्र, 
    • राजस्थान, 
    • पश्चिम बंगाल, 
    • असम और झारखंड 

कृषि-उद्यमी: ग्रामीण बदलाव की धुरी

इस कार्यक्रम के तहत तैयार किए जाने वाले कृषि-उद्यमी जमीनी स्तर पर (गांवों में) वन-स्टॉप सेंटर के रूप में कार्य करेंगे। वे किसानों को निम्नलिखित सेवाएं और अवसर उपलब्ध कराएंगे:

  • वैज्ञानिक सलाह और मिट्टी परीक्षण
  • आधुनिक मशीन सेवाएं
  • वित्तीय लिंक और बाजार कनेक्ट (Market Linkages)
  • वैकल्पिक आय के अवसर 

महिला सशक्तिकरण: कृषि सखी की भूमिका

  • प्रगति पहल में महिला भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, बड़ी संख्या में कृषि सखी और महिला उद्यमी इस बदलाव का मुख्य चेहरा बनेंगी। 
  • सरकार का मानना है कि एक-एक महिला उद्यमी पूरे गांव की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। यह योजना गांवों को आत्मनिर्भर, रोजगारयुक्त और सशक्त बनाने का एक बड़ा माध्यम बनेगी।

निजी क्षेत्र और वैश्विक संस्थाओं का महा-गठबंधन:

  • इस पहल को भारत में निजी क्षेत्र के नेतृत्व में अब तक के सबसे बड़े कृषि-उद्यमिता कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए इसमें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ साझेदार के रूप में जुड़ी हैं: 

भागीदार संस्थाएँ: 

  • पेप्सिको फाउंडेशन
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (एसबीआईएफ)
  • गेट्स फाउंडेशन
  • आईडीएच (आईडीएच – द सस्टेनेबल ट्रेड इनिशिएटिव)
  • हाइफ़र इंटरनेशनल
  • एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड (ईडीएफ)
  • ग्लोबल एग्री एंटरप्रेन्योरशिप अकादमी
  • सफिया (द सस्टेनेबल एग्रीकल्चर फाउंडेशन्स इंटरनेशनल एसोसिएशन)
  • एग्री एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (एईजीएफ) 
  • ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (टीआरआईएफ)

वस्तुतः यह पूरा नेटवर्क मिलकर ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन, बाजार संपर्क और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों (Regenerative Agriculture) को बढ़ावा देने के लिए एक समन्वित समर्थन तंत्र प्रदान करेगा। 

अनुभव की नींव और भविष्य के महत्वाकांक्षी लक्ष्य:

  • प्रगति कार्यक्रम एग्री-एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) द्वारा भारत के 14 राज्यों में चलाए गए पूर्ववर्ती सफल अनुभवों पर आधारित है। वर्तमान में मौजूद 26,000 से अधिक कृषि-उद्यमियों के नेटवर्क में अब 20,000 नए उद्यमियों को जोड़ा जाएगा।  

प्रगति पहल के प्रमुख निर्धारित लक्ष्य:

  • आय में वृद्धि: योजना से जुड़े किसानों की आय में न्यूनतम 30% वृद्धि का लक्ष्य।
  • उत्पादकता में सुधार: धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उपज में 15-20% वृद्धि करना।
  • पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture): पहल में भाग लेने वाले कम से कम 20% किसानों को पर्यावरण-अनुकूल और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना। 
  • वित्तीय सशक्तिकरण: किसानों को वित्तीय रूप से साक्षर बनाना और औपचारिक बैंकिंग/वित्तीय प्रणालियों तक उनकी पहुँच का विस्तार करना। 
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