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प्रहार - आतंकवाद विरोधी नीति

संदर्भ 

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में एक युगांतकारी परिवर्तन करते हुए केंद्र सरकार ने 'प्रहार' नामक पहली व्यापक आतंकवाद-विरोधी नीति का अनावरण किया है। यह नीति 'शून्य-सहिष्णुता' (Zero Tolerance) के सिद्धांत पर टिकी है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य केवल आतंकवादियों को समाप्त करना ही नहीं, बल्कि उनके वित्तीय स्रोतों, हथियारों की आपूर्ति और वैचारिक समर्थकों के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को ध्वस्त करना है। 

प्रहार: एक एकीकृत सुरक्षा दर्शन 

  • यह नीति 'खुफिया जानकारी आधारित सक्रियता' (Intelligence-led Proactivity) पर जोर देती है, ताकि आतंकी घटनाओं को घटित होने से पहले ही रोका जा सके। 

मार्गदर्शक सिद्धांत

  • अखंड शून्य-सहिष्णुता: किसी भी आधार या तर्क पर आतंकवाद को स्वीकार न करना।
  • पीड़ित-केंद्रित न्याय: आतंकवाद से प्रभावित नागरिकों के अधिकारों और पुनर्वास को प्राथमिकता देना।
  • धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण: यह स्पष्ट करना कि आतंकवाद का किसी भी धर्म, पंथ या सभ्यता से कोई संबंध नहीं है।
  • राज्य-प्रायोजित आतंकवाद पर प्रहार: उन पड़ोसी देशों को चिन्हित करना जो आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के हथियार के रूप में उपयोग करते हैं। 

प्रहार के सात रणनीतिक स्तंभ (P.R.A.H.A.R.) 

इस संक्षिप्त नाम का प्रत्येक अक्षर भारत की सुरक्षा घेरे की एक विशेष परत को परिभाषित करता है:

  • P - Prevention (रोकथाम): सक्रिय खुफिया तंत्र के माध्यम से हमलों को साजिश के स्तर पर ही विफल करना।
  • R - Response (जवाब): त्वरित, आनुपातिक और सुनियोजित सैन्य व नागरिक प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना।
  • A - Aggregation of Internal Capabilities (आंतरिक क्षमता का एकत्रीकरण): केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाना और सुरक्षा बलों का आधुनिक तकनीक (AI, ड्रोन) से लैस करना।
  • H - Human Rights & Rule of Law (मानवाधिकार और विधि का शासन): कानूनी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और न्यायसंगत अपील प्रणाली सुनिश्चित करना। 
  • A - Attenuating Enabling Conditions (क्षीण करने वाली स्थितियाँ): कट्टरपंथ को रोकने के लिए युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ना और समाज के प्रभावशाली वर्गों (डॉक्टर, धार्मिक नेता) का सहयोग लेना।
  • R - Realigning International Efforts (अंतर्राष्ट्रीय समन्वय): संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से वैश्विक सहयोग, अपराधियों का प्रत्यर्पण और विदेशी धरती पर सक्रिय आतंकी नेटवर्क पर नकेल कसना।
  • R - Recovery & Resilience (पुनर्प्राप्ति और लचीलापन): आतंकी हमले के बाद समाज को मानसिक और भौतिक रूप से पुनः सशक्त बनाना।

उभरते हुए खतरे और तकनीकी चुनौतियाँ 

नीति में आधुनिक युग के 'हाइब्रिड' खतरों को गंभीरता से लिया गया है:

  • तकनीकी दुरुपयोग: सीमावर्ती क्षेत्रों (पंजाब और जम्मू-कश्मीर) में हथियारों की तस्करी के लिए ड्रोन का उपयोग।
  • डिजिटल आतंकवाद: डार्क वेब, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से वित्त पोषण और भर्ती। 
  • CBRNED जोखिम: रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु सामग्री के साथ-साथ डिजिटल हमलों (साइबर वॉरफेयर) का बढ़ता खतरा।
  • अपराध-आतंक गठजोड़: संगठित अपराधी गिरोहों और आतंकी समूहों के बीच बढ़ता लॉजिस्टिक तालमेल। 

रणनीतिक मार्ग और भविष्य की राह 

'प्रहार' नीति भारत को एक 'सुरक्षा प्रदाता' के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके सफल कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित कदम अनिवार्य हैं:

  • क्षमता निर्माण: राज्य पुलिस बलों और जिला स्तर की सुरक्षा इकाइयों को उन्नत प्रशिक्षण देना।
  • सार्वजनिक-निजी साझेदारी: सुरक्षा तकनीक विकसित करने के लिए निजी तकनीकी उद्यमों के साथ सहयोग।
  • मानकीकृत संचालन प्रक्रिया (SOP): पूरे देश में आतंकी खतरों से निपटने के लिए एक समान प्रोटोकॉल लागू करना। 

निष्कर्ष 

प्रहार केवल एक रक्षात्मक नीति नहीं है, बल्कि यह भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए एक आक्रामक और संगठित संकल्प है। यह 'संपूर्ण सरकार' (Whole of Government) के दृष्टिकोण को अपनाकर आतंकी नेटवर्क की जड़ों पर प्रहार करती है। 

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