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समुद्री आपदाओं से निपटने की तैयारी

संदर्भ 

  • केरल के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर मंडराते पर्यावरणीय खतरों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। वर्ष 2025 में हुई दो प्रमुख जहाज दुर्घटनाओं (MSC Elsa 3 और MV Wan Hai 503) के बाद, केरल अब अपनी समुद्री सीमा की सुरक्षा के लिए एक समर्पित तेल रिसाव आकस्मिक योजना (OSCP) लागू करने की दहलीज पर है। हाल ही में केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सूचित किया कि इस सुरक्षा ढांचे का मसौदा (Draft) तैयार हो चुका है।  

संकट की पृष्ठभूमि: क्यों जरूरी हुई यह योजना ? 

मई और जून 2025 में हुए दो अलग-अलग हादसों ने राज्य की 590 किमी लंबी तटरेखा की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया था।

  • MSC Elsa 3 हादसा : 640 कंटेनरों के साथ डूबे इस जहाज में खतरनाक रसायन और कैल्शियम कार्बाइड मौजूद था।
  • पर्यावरणीय क्षति : इन घटनाओं के कारण दक्षिणी तटों पर भारी मात्रा में प्लास्टिक पैलेट्स (नर्डल्स) फैल गए, जिससे समुद्री जीवन और स्थानीय आजीविका पर संकट खड़ा हो गया। 
  • न्यायिक हस्तक्षेप : एनजीटी (NGT) की प्रधान पीठ द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान ने प्रशासन को एक व्यापक उपचारात्मक योजना बनाने के लिए विवश किया। 

राज्य-विशिष्ट नीति की अनिवार्यता  

केरल का तट अंतरराष्ट्रीय तेल परिवहन मार्ग (International Oil Route) के अत्यंत निकट है। सांख्यिकीय दृष्टि से :

  • राज्य के 14 में से 9 जिले सीधे तौर पर तेल रिसाव के जोखिम क्षेत्र में आते हैं।
  • योजना का दायरा तटरेखा से 12 समुद्री मील (24 किमी) तक और नदियों में 40 किमी भीतर तक फैला हुआ है।
  • बंदरगाहों पर आने वाले विशाल तेल टैंकरों की वजह से दुर्घटना की संभावना सदैव बनी रहती है।
  • यद्यपि इस योजना का विचार 2016 में ही रख दिया गया था, लेकिन तकनीकी और वित्तीय बाधाओं के कारण इसे अंतिम रूप अब दिया जा सका है। 

तेल रिसाव आकस्मिक योजना (OSCP) के बारे में 

  • यह योजना केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि संकट के समय त्वरित कार्रवाई का एक तकनीकी ब्लूप्रिंट है। 
  • इस योजना के तहत पूरे तट का पर्यावरणीय संवेदनशील सूचकांक (ESI) तैयार किया जाएगा, जिससे पता चलेगा कि किन क्षेत्रों को सबसे पहले सुरक्षा की जरूरत है। 
  • इसमें वन्यजीवों को बचाने, जहाज-स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण और तेल रिसाव को रोकने के लिए बूमिंग (Tactical Booming) जैसे सामरिक उपाय शामिल हैं।  
  • योजना के अंतर्गत आपात स्थिति में तत्काल उपयोग के लिए मशीनरी, उपकरणों और विशेषज्ञों की संपर्क सूची को इस योजना का हिस्सा बनाया गया है। 

प्रभावी तटरेखा प्रबंधन (Shoreline Response)

  • तटों की सफाई के लिए योजना में चेन ऑफ कमांड यानी जिम्मेदारी का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। किसी भी सफाई अभियान से पहले तेल की प्रकृति और ऑन-साइट स्थितियों का सटीक आकलन किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर के दिशा-निर्देशों (NOS-DCP 2024) के अनुरूप होगी।  

योजना का आगामी चरण 

  • वर्तमान में यह योजना ड्राफ्ट चरण में है, जिसमें हाइड्रोडायनामिक मॉडलिंग और समुद्री संवेदनशीलता विश्लेषण जैसे जटिल वैज्ञानिक पहलुओं को समाहित किया गया है।
  • अगले चरण में विशेषज्ञों की समिति द्वारा समीक्षा के बाद इसे भारतीय तट रक्षक (Indian Coast Guard) को भेजा जाएगा। वस्तुतः योजना को आवश्यक मंजूरी मिलते ही केरल के पास अपनी समुद्री संपदा की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच उपलब्ध होगा।
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