राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में प्रस्तावित संशोधन: अंत्योदय अन्न योजना (AAY) की पात्रता में बदलाव पर केंद्र-राज्य विवाद

चर्चा में क्यों ?

  • केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (National Food Security Act–NFSA) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। 
  • इस प्रस्ताव के तहत अंत्योदय अन्न योजना (Antyodaya Anna Yojana–AAY) के लाभार्थियों को मिलने वाले खाद्यान्न वितरण के तरीके में बदलाव किया जाएगा। 
  • प्रस्तावित संशोधन के अनुसार अब प्रत्येक पात्र व्यक्ति को 7 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह मिलेगा, लेकिन किसी भी परिवार को अधिकतम 35 किलोग्राम ही दिया जाएगा।
  • केंद्र सरकार का कहना है कि यह बदलाव खाद्यान्न वितरण को अधिक न्यायसंगत और प्रति व्यक्ति आधारित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। 
  • दूसरी ओर, तमिलनाडु और केरल सहित कई पक्षों का तर्क है कि इससे छोटे और गरीब परिवारों को मिलने वाला खाद्यान्न कम हो जाएगा तथा विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 क्या है ?

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 का उद्देश्य देश की बड़ी आबादी को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराकर खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है। 
  • यह अधिनियम लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Targeted Public Distribution System–TPDS) के माध्यम से लगभग दो-तिहाई भारतीय आबादी को खाद्यान्न उपलब्ध कराता है।

अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ

  • ग्रामीण क्षेत्रों की 75 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्रों की 50 प्रतिशत आबादी को कवर किया जाता है।
  • लाभार्थियों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है —
    • अंत्योदय अन्न योजना (AAY) – सबसे गरीब एवं अत्यंत वंचित परिवार।
    • प्राथमिकता परिवार (Priority Households–PHH)।
  • AAY परिवारों को वर्तमान में 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति परिवार प्रति माह दिया जाता है।
  • PHH लाभार्थियों को 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति माह खाद्यान्न मिलता है।
  • चावल ₹3 प्रति किलोग्राम, गेहूँ ₹2 प्रति किलोग्राम तथा मोटे अनाज ₹1 प्रति किलोग्राम की अत्यधिक रियायती दर पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • राशन कार्ड जारी करने के लिए परिवार की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे बड़ी महिला को परिवार का मुखिया माना जाता है।
  • गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के लिए विशेष पोषण सहायता तथा कम-से-कम ₹6,000 की मातृत्व सहायता का प्रावधान किया गया है।
  • छह वर्ष तक के बच्चों को आंगनवाड़ी के माध्यम से तथा छह से चौदह वर्ष तक के बच्चों को विद्यालयों में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
  • प्रत्येक राज्य में राज्य खाद्य आयोग, जिला शिकायत निवारण अधिकारी तथा सतर्कता समितियों की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लाभार्थियों की सूची और संबंधित अभिलेख सार्वजनिक करने का प्रावधान भी अधिनियम में शामिल है।

प्रस्तावित संशोधन क्या है?

  • केंद्र सरकार ने NFSA की धारा 3(1) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जो AAY परिवारों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने से संबंधित है।

वर्तमान व्यवस्था

  • प्रत्येक AAY परिवार को परिवार के आकार की परवाह किए बिना 35 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह मिलता है।

प्रस्तावित व्यवस्था

  • प्रत्येक पात्र सदस्य को 7 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह मिलेगा, लेकिन किसी भी परिवार को अधिकतम 35 किलोग्राम ही दिया जाएगा।

अर्थात —

  • दो सदस्यीय परिवार को 14 किलोग्राम,
  • तीन सदस्यीय परिवार को 21 किलोग्राम,
  • चार सदस्यीय परिवार को 28 किलोग्राम,
  • पाँच या उससे अधिक सदस्यों वाले परिवार को अधिकतम 35 किलोग्राम खाद्यान्न मिलेगा।

सरकार ने इस मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।

केंद्र सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है?

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग का तर्क है कि वर्तमान परिवार-आधारित व्यवस्था समान श्रेणी के लाभार्थियों के बीच असमानता उत्पन्न करती है।

उदाहरण के लिए —

  • दो सदस्यीय परिवार को 35 किलोग्राम मिलने का अर्थ है कि प्रत्येक व्यक्ति को 17.5 किलोग्राम खाद्यान्न प्राप्त हो रहा है।
  • जबकि सात सदस्यीय परिवार को भी केवल 35 किलोग्राम मिलने से प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से में मात्र 5 किलोग्राम आता है।

इस प्रकार छोटे परिवारों को प्रति व्यक्ति अधिक तथा बड़े परिवारों को अपेक्षाकृत कम खाद्यान्न मिलता है।

सरकार के अनुसार प्रस्तावित संशोधन के उद्देश्य

  • प्रति व्यक्ति आधार पर अधिक समान एवं न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना।
  • खाद्यान्न आवंटन को तर्कसंगत बनाना।
  • पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप खाद्यान्न वितरण करना।
  • AAY श्रेणी के भीतर मौजूद असमानताओं को समाप्त करना।

हालाँकि यह संशोधन उन अपात्र व्यक्तियों की पहचान और हटाने की समस्या का समाधान नहीं करता जो अभी भी NFSA का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

तमिलनाडु और केरल इस संशोधन का विरोध क्यों कर रहे हैं?

तमिलनाडु और केरल का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था से सबसे अधिक नुकसान उन राज्यों को होगा जहाँ अधिकांश परिवार छोटे या एकल (न्यूक्लियर) हैं।

1. छोटे परिवारों को कम खाद्यान्न मिलेगा

  • दोनों राज्यों में अधिकांश AAY परिवारों में पाँच से कम सदस्य हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें वर्तमान 35 किलोग्राम के बजाय कम खाद्यान्न मिलेगा।
  • उदाहरण के लिए चार सदस्यीय परिवार को 28 किलोग्राम,तीन सदस्यीय परिवार को 21 किलोग्राम,दो सदस्यीय परिवार को केवल 14 किलोग्राम मिलेगा इससे गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

2. गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा

तमिलनाडु सरकार के अनुसार

  • वर्तमान में राज्य को AAY के अंतर्गत लगभग 65,261 टन खाद्यान्न प्रति माह मिलता है।
  • संशोधन लागू होने पर यह घटकर लगभग 42,040 टन प्रति माह रह सकता है।
  • राज्य के लगभग 18.64 लाख AAY परिवारों में से 15.75 लाख परिवारों में पाँच से कम सदस्य हैं।

ऐसी स्थिति में गरीब परिवारों को अतिरिक्त चावल खुले बाजार से खरीदना पड़ेगा, जिससे उनका मासिक खर्च बढ़ जाएगा।

3. दक्षिण भारत के साथ असमानता की आशंका

  • 'राइट टू फूड अभियान' सहित कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि उत्तरी राज्यों में औसतन परिवारों का आकार बड़ा है। इसलिए वहाँ अधिक परिवार 35 किलोग्राम की अधिकतम सीमा तक पहुँच जाएंगे, जबकि दक्षिण भारत के अधिकांश छोटे परिवारों का खाद्यान्न आवंटन घट जाएगा।
  • इससे खाद्यान्न वितरण में उत्तर-दक्षिण असंतुलन (North-South Divide) बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

खाद्य राजनीति का ऐतिहासिक संदर्भ

तमिलनाडु

  • तमिलनाडु की राजनीति में खाद्य सुरक्षा और विशेष रूप से चावल वितरण का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
  • 1952 और 1967 में चावल की कमी राज्य की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनी। वर्ष 2011 से राज्य सरकार सार्वभौमिक मुफ्त चावल वितरण योजना संचालित कर रही है।
  • NFSA लागू होने के समय भी तमिलनाडु ने केंद्र से यह सुनिश्चित कराया था कि राज्य को मिलने वाला खाद्यान्न आवंटन कम नहीं किया जाएगा।

केरल

  • केरल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का इतिहास अत्यंत पुराना है। राज्य में संगठित खाद्यान्न वितरण व्यवस्था 1962 में प्रारम्भ हो गई थी, जो भारतीय खाद्य निगम (FCI) की स्थापना से भी पहले की है।
  • जब 2013 में NFSA लागू किया गया था, तब भी केरल सरकार ने आशंका व्यक्त की थी कि इससे अनेक गरीब परिवार लाभार्थियों की सूची से बाहर हो सकते हैं और राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

प्रस्तावित संशोधन से जुड़े प्रमुख मुद्दे

1. समानता बनाम सामाजिक सुरक्षा

  • प्रति व्यक्ति आधार पर खाद्यान्न वितरण अधिक न्यायसंगत दिखाई देता है, लेकिन इससे छोटे एवं गरीब परिवारों की वर्तमान सुरक्षा कमजोर हो सकती है।

2. सहकारी संघवाद का प्रश्न

  • राज्यों का तर्क है कि पूरे देश के लिए एक समान मानदंड लागू करना उचित नहीं है, क्योंकि विभिन्न राज्यों की जनसांख्यिकीय संरचना अलग-अलग है।

3. खाद्य एवं पोषण सुरक्षा पर प्रभाव

  • यदि गरीब परिवारों को कम खाद्यान्न मिलेगा तो उन्हें बाजार से महँगे दामों पर खाद्यान्न खरीदना पड़ेगा, जिससे उनकी पोषण सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

4. वित्तीय प्रभाव

  • इस संशोधन से केंद्र सरकार की खाद्य सब्सिडी पर व्यय कम हो सकता है, लेकिन इसका अतिरिक्त आर्थिक भार गरीब लाभार्थियों पर स्थानांतरित होने की आशंका है।

आगे की राह

  • विशेषज्ञों का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण संशोधन पर अंतिम निर्णय लेने से पहले राज्यों, नीति विशेषज्ञों, खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों और नागरिक समाज संगठनों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना चाहिए।

  • कुछ विशेषज्ञों ने एक मध्य मार्ग भी सुझाया है, जिसके अनुसार प्रत्येक AAY परिवार को 30 किलोग्राम खाद्यान्न प्रति माह दिया जाए, चाहे परिवार का आकार कुछ भी हो। इससे केंद्र सरकार की सब्सिडी पर भी नियंत्रण रहेगा और गरीब परिवारों की न्यूनतम खाद्य सुरक्षा भी बनी रहेगी।

  • इसके साथ ही लाभार्थियों की नियमित समीक्षा, अपात्र व्यक्तियों को सूची से हटाने, वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को शामिल करने तथा राज्यों की जनसांख्यिकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लचीली व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य AAY श्रेणी के भीतर प्रति व्यक्ति आधार पर खाद्यान्न वितरण को अधिक न्यायसंगत बनाना है। 
  • हालांकि यह कदम बड़े परिवारों के हित में दिखाई देता है, लेकिन इससे छोटे और अत्यंत गरीब परिवारों, विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों, को मिलने वाला खाद्यान्न कम हो सकता है। 
  • इस मुद्दे पर समानता, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता तथा सहकारी संघवाद के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक होगा। 
  • व्यापक परामर्श और राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान विकसित किया जाना चाहिए जिससे देश के सबसे कमजोर वर्गों की खाद्य सुरक्षा किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।

Q1. नेशनल फ़ूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA), 2013 क्या है?

उत्तर :- नेशनल फ़ूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA), 2013 एक वेलफेयर कानून है जो टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (TPDS) के ज़रिए भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को सब्सिडी वाला अनाज देता है, जिससे योग्य परिवारों के लिए खाने और न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी पक्की होती है। 

Q2. प्रस्तावित NFSA अमेंडमेंट का मकसद क्या है?

उत्तर :- प्रस्तावित अमेंडमेंट का मकसद हर व्यक्ति को अनाज का बराबर डिस्ट्रीब्यूशन पक्का करना, AAY परिवारों के अंदर फर्क को खत्म करना, अनाज के बंटवारे को सही बनाना और अनाज के हक को न्यूट्रिशनल ज़रूरतों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ना है। 

Q3. अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत अभी अनाज का हक क्या है?

उत्तर :- अभी, हर AAY परिवार को हर महीने 35 kg सब्सिडी वाला अनाज मिलता है, चाहे परिवार में कितने भी सदस्य हों। 

Q4. केंद्र ने AAY के बेनिफिशियरी के लिए क्या बदलाव सुझाए हैं?

उत्तर :- केंद्र ने हर महीने हर योग्य व्यक्ति को 7 kg अनाज देने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें हर परिवार को ज़्यादा से ज़्यादा 35 kg अनाज मिलेगा।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT