चर्चा में क्यों ?
दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय (SADC) के 16 सदस्य देशों के ऊर्जा मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक और तकनीकी विशेषज्ञ जिम्बाब्वे के पर्यटन शहर Victoria Falls में आयोजित सतत ऊर्जा सप्ताह (SEW) सम्मेलन में एकत्रित हुए। 23 से 27 फरवरी तक चले इस सम्मेलन का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना और ऊर्जा गरीबी से जूझ रहे क्षेत्र के लिए ठोस समाधान तलाशना रहा।

उद्घाटन और मुख्य संदेश
- सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन जिम्बाब्वे के उपराष्ट्रपति कॉन्स्टेंटिनो चिवेंगा ने किया।
- उन्होंने कहा कि दक्षिणी अफ्रीका को वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
- उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र का आर्थिक और औद्योगिक विकास पर्याप्त और सस्ती ऊर्जा उपलब्धता पर निर्भर करता है।
- अफ्रीका के पास सौर, पवन, जल और बायोमास जैसे प्रचुर संसाधन होने के बावजूद, उप-सहारा क्षेत्र अभी भी ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है।
ऊर्जा गरीबी की स्थिति
- लगभग 40 करोड़ लोगों की आबादी वाला SADC क्षेत्र ऊर्जा निवेश की कमी से जूझ रहा है।
- करीब 50% आबादी अभी भी बिजली से वंचित
- केवल मॉरीशस और सेशेल्स ने सार्वभौमिक बिजली पहुंच हासिल की
- ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंच लगभग 32%
- यह स्थिति औद्योगीकरण और आर्थिक विकास में बड़ी बाधा बनी हुई है।
ऊर्जा मिश्रण में विविधता की आवश्यकता
- SADC के कार्यकारी सचिव Elias Magosi ने बताया कि क्षेत्र की कुल स्थापित क्षमता 83,055 मेगावाट है, लेकिन ऊर्जा उत्पादन अभी भी मुख्य रूप से:
- 53% कोयले पर
- 24% जलविद्युत पर निर्भर है
- हाल के सूखे के कारण जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता और बढ़ गई।
- प्रस्तावित विकल्पों में गैस आधारित उत्पादन, स्वच्छ कोयला तकनीक, परमाणु ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और छतों पर सौर पैनल शामिल हैं।
सौर ऊर्जा: सबसे बड़ा अवसर
- दक्षिणी अफ्रीका में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 12% हो गई है।
- फोटोवोल्टिक तकनीक की लागत में 80% से अधिक गिरावट आई है।
- International Energy Agency (IEA) के अनुसार, 2030 तक सौर ऊर्जा अफ्रीका की 15% बिजली आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, जो 2040 तक 30% तक पहुंच सकती है।
- क्षेत्र में प्रति वर्ष 3,000 से अधिक धूप के घंटे उपलब्ध हैं, जिससे सौर ऊर्जा एक व्यवहारिक और दीर्घकालिक समाधान बन सकती है।
मिशन 300 और राष्ट्रीय ऊर्जा समझौते
- SADC देश “मिशन 300” के तहत 2030 तक 30 करोड़ लोगों को बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
- यह पहल World Bank Group और African Development Bank की संयुक्त पहल है।
- अब तक 16 में से 11 देशों ने अपने राष्ट्रीय ऊर्जा समझौते पूरे कर लिए हैं।
दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय (SADC)

- दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय (SADC) अफ्रीका का एक प्रमुख क्षेत्रीय आर्थिक संगठन है।
- इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय एकीकरण और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
- यह संगठन दक्षिणी अफ्रीका में शांति, स्थिरता और आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है।
स्थापना और मुख्यालय
- स्थापना: 1980 (पहले SADCC के रूप में)
- पुनर्गठन: 1992 में SADC के रूप में
- मुख्यालय: गैबोरोन, बोत्सवाना
सदस्य देश (16)
- SADC में निम्नलिखित 16 देश शामिल हैं:
- अंगोला, बोत्सवाना, कोमोरोस, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, एस्वातिनी, लेसोथो, मेडागास्कर, मलावी, मॉरीशस, मोज़ाम्बिक, नामीबिया, सेशेल्स, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, ज़ाम्बिया और ज़िम्बाब्वे।
प्रमुख उद्देश्य
- आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन
- क्षेत्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा
- बुनियादी ढांचे का विकास (ऊर्जा, परिवहन, संचार)
- शांति और सुरक्षा बनाए रखना
- जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर सहयोग
प्रमुख कार्यक्षेत्र
- व्यापार एकीकरण: मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area) को मजबूत करना
- ऊर्जा सहयोग: क्षेत्रीय बिजली ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा
- कृषि एवं खाद्य सुरक्षा: सूखा और जलवायु जोखिम प्रबंधन
- परिवहन एवं अवसंरचना विकास
- स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग
ऊर्जा क्षेत्र में भूमिका
SADC क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख चुनौती है। संगठन ऊर्जा मिश्रण में विविधता, नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, और क्षेत्रीय बिजली पारेषण नेटवर्क को मजबूत करने पर कार्य कर रहा है।
महत्व
SADC लगभग 40 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और यह अफ्रीका के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठनों में से एक है। यह अफ्रीकी महाद्वीप के आर्थिक एकीकरण और अफ्रीकी संघ (AU) के लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करता है।
|
निष्कर्ष
SADC सतत ऊर्जा सप्ताह 2026 दक्षिणी अफ्रीका के ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। नवीकरणीय ऊर्जा, क्षेत्रीय सहयोग और निवेश को बढ़ावा देकर यह क्षेत्र ऊर्जा गरीबी को कम करने और एक स्वच्छ, टिकाऊ तथा समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।