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उपग्रह दृष्टि (Drishti)

संदर्भ 

  • भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप GalaxEye ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपने पहले उपग्रह दृष्टि (Drishti) को स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया है। 

दृष्टि की वैश्विक विशिष्टता

  • वर्तमान में, दुनिया भर के उपग्रह मुख्य रूप से दो तरह की तकनीकों का उपयोग करते हैं - 
  • ऑप्टिकल (जो कैमरे की तरह स्पष्ट तस्वीरें लेता है) या एसएआर (SAR) (रडार तकनीक जो बादलों और अंधेरे में देख सकती है)। लेकिन दृष्टि दुनिया का पहला ऐसा उपग्रह है जो इन दोनों सेंसरों को एक साथ जोड़ता है  

ऑप्टो-सार (Opto-SAR) तकनीक के बारे में  

GalaxEye की इस स्वदेशी तकनीक ने अंतरिक्ष इमेजिंग की सबसे बड़ी चुनौती को हल कर दिया है :

  • सामान्यतः दो अलग-अलग उपग्रहों से प्राप्त डेटा को मिलाना मुश्किल होता है क्योंकि उनके कोण और समय अलग होते हैं। दृष्टि का टेक्नोलॉजी स्टैक दोनों सेंसरों को एक ही समय पर, एक ही स्थान की तस्वीर लेने के लिए सिंक्रोनाइज़ करता है। 
  • यदि घने बादलों के कारण ऑप्टिकल कैमरा विफल रहता है, तो इसका इन-बिल्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रडार डेटा को प्रोसेस करके उसे ऑप्टिकल जैसी स्पष्ट तस्वीर में बदल देता है। 

भारत और विकासशील देशों के लिए वरदान 

  • अधिकांश सैटेलाइट तकनीक पश्चिमी देशों में विकसित हुई है, जहाँ मौसम अपेक्षाकृत साफ रहता है। इसके विपरीत, भारत जैसे उष्णकटिबंधीय (Tropical) देशों में वर्ष के कई महीनों तक बादलों का डेरा रहता है।  ऐसे में दृष्टि उपग्रह यह सुनिश्चित करता है कि चाहे मानसून की भारी बारिश हो या घने बादल, जमीन की स्पष्ट तस्वीर हमेशा उपलब्ध रहे। 
  • इसके साथ-साथ विशेषज्ञों पर निर्भरता कम करते हुए यह तकनीक जटिल रडार डेटा को आम उपयोगकर्ताओं के लिए समझने योग्य बनाती है। 

बहुआयामी उपयोग: सीमा से लेकर खेत तक 

  • राष्ट्रीय सुरक्षा : सीमा पर घुसपैठ और रक्षा खुफिया जानकारी के लिए सटीक और रीयल-टाइम डेटा।
  • कृषि एवं आपदा : फसलों की सेहत की निगरानी और बाढ़ या चक्रवात जैसी आपदाओं के दौरान सटीक राहत कार्य।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर : शहरी नियोजन और बड़े निर्माण कार्यों की लगातार ट्रैकिंग।

भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का उदय 

दृष्टि की सफलता भारत के उभरते प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम की शक्ति को दर्शाती है। भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने निजी कंपनियों के लिए जो द्वार खोले हैं, उसी का परिणाम है कि आज भारत में:

  • Agnikul Cosmos जैसे स्टार्टअप 3D-प्रिंटेड इंजन बना रहे हैं। 
  • Skyroot निजी रॉकेट लॉन्च कर रहा है।
  • Pixxel और Dhruva Space उपग्रह प्रौद्योगिकी में वैश्विक मानक स्थापित कर रहे हैं। 

निष्कर्ष 

  • GalaxEye का दृष्टि उपग्रह केवल एक तकनीकी मशीन नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत और भारतीय मेधा का वह प्रमाण है जो वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की स्थिति को एक सेवा प्रदाता से बदलकर एक टेक्नोलॉजी लीडर के रूप में स्थापित कर रहा है।
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