हाल में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक
- SFDR एक उन्नत वायु-श्वास प्रणोदन प्रणाली है जिसमें ठोस ईंधन आधारित गैस जनरेटर का उपयोग किया जाता है।
- इस तकनीक का विकास हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से किया है।
कार्य सिद्धांत
- इस प्रणाली में तरल ईंधन के स्थान पर ठोस ईंधन का प्रयोग किया जाता है, जिससे इसका संचालन अधिक सरल, सुरक्षित तथा भंडारण और परिवहन के लिए सुविधाजनक हो जाता है।
- पारंपरिक रॉकेट प्रणालियों के विपरीत, SFDR में किसी ऑक्सीडाइज़र की आवश्यकता नहीं होती है जिससे इसका भार कम होता है और ईंधन दक्षता में वृद्धि होती है।
- यह तकनीक लंबे समय तक निरंतर थ्रस्ट उपलब्ध कराती है और उड़ान के दौरान थ्रस्ट को नियंत्रित (मॉड्यूलेट) करने की सुविधा भी देती है।
- SFDR से युक्त मिसाइलें परंपरागत रॉकेट-चालित मिसाइलों की तुलना में अधिक तेज गति, लंबी मारक दूरी और पूरी उड़ान अवधि में बेहतर पैंतरेबाज़ी क्षमता प्राप्त करती हैं।
SFDR तकनीक का महत्व
- SFDR प्रणाली मिसाइल की उड़ान के अधिकांश चरण में निरंतर प्रणोदन सुनिश्चित करती है, जिससे विशेष रूप से लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
- इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है।
- यह क्षमता लंबी दूरी की उन्नत मिसाइलों के विकास में सहायक होगी और संभावित विरोधियों पर रणनीतिक बढ़त प्रदान करेगी।
रैमजेट क्या है ?
- रैमजेट एक ऐसी प्रणोदन प्रणाली है जो उच्च गति से आगे बढ़ती मिसाइल में प्रवेश करने वाली हवा को स्वाभाविक रूप से संपीड़ित करती है।
- इसमें किसी यांत्रिक कंप्रेसर की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह उच्च गति पर कुशल और प्रभावी उड़ान संभव बनाती है।