चर्चा में क्यों ?
पूर्वी सिक्किम में त्सोमगो झील के पास भारी बर्फबारी के कारण फंसे 2,700 से अधिक पर्यटकों को हाल ही में बचाया गया।

त्सोमगो झील के बारे में
- पूर्वोत्तर भारत के खूबसूरत राज्य सिक्किम के पूर्वी भाग में स्थित त्सोमगो झील, जिसे त्सोंगमो या चांगू झील भी कहा जाता है, एक प्रसिद्ध हिमनदी (ग्लेशियल) झील है।
- समुद्र तल से लगभग 3,753 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह झील गंगटोक से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर है और अपने प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और धार्मिक महत्व के लिए जानी जाती है।
हिमनदी से निर्मित झील
- त्सोमगो झील का निर्माण आसपास की पहाड़ियों पर जमी बर्फ के पिघलने से हुआ है।
- झील को वर्षभर पहाड़ों की बर्फ और वर्षा का पानी मिलता है।
- सर्दियों में यह झील पूरी तरह जम जाती है, जबकि गर्मियों में इसका स्वच्छ नीला पानी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
फूलों की रंगीन दुनिया
- मई के मध्य में जब शीत ऋतु समाप्त होती है, तब झील के आसपास का क्षेत्र रंग-बिरंगे फूलों से भर उठता है।
- यहाँ रोडोडेंड्रोन (सिक्किम का राजकीय वृक्ष), प्रिमूला, नीले और पीले पोपी तथा आइरिस जैसे सुंदर फूल खिलते हैं।
- यह दृश्य प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
पक्षी और वन्यजीव
- झील के आसपास का क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध है। यहाँ ब्राह्मणी बत्तख सहित कई प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं।
- इसके अलावा, इस क्षेत्र में दुर्लभ लाल पांडा भी पाया जाता है, जो सिक्किम की वन्यजीव पहचान का प्रतीक है।
आस्था और मान्यताएँ
- त्सोमगो झील स्थानीय सिक्किमी लोगों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
- मान्यता है कि मौसम के अनुसार झील का रंग बदलता है और यह भविष्य की घटनाओं का संकेत देता है।
- प्राचीन समय में बौद्ध भिक्षु झील के बदलते रंगों का अध्ययन कर भविष्यवाणी किया करते थे।
बदलते रंगों का अद्भुत नजारा
- मौसम और प्रकाश के अनुसार झील की सतह अलग-अलग रंगों को प्रतिबिंबित करती है-कभी गहरा नीला, कभी हरा तो कभी हल्का धूसर।
- यही विशेषता इसे अन्य झीलों से अलग बनाती है। त्सोमगो झील केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक आस्था का जीवंत प्रतीक है।
- सिक्किम की यात्रा त्सोमगो झील के दर्शन के बिना अधूरी मानी जाती है।