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उल्लास (ULLAS) कार्यक्रम

चर्चा में क्यों ? 

हाल ही में, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और उल्लास (समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ) कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है।  

उल्लास (साक्षर भारत की ओर एक कदम) कार्यक्रम के बारे में

  • उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम, जिसे न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) के नाम से भी जाना जाता है, केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एक पहल है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप है। 
  • इसका उद्देश्य सभी पृष्ठभूमियों के 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन वयस्कों को सशक्त बनाना है जिन्होंने औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की है, ताकि वे समाज में एकीकृत हो सकें और राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें।
  • यह कार्यक्रम पढ़ने, लिखने और अंकगणित कौशल सहित कार्यात्मक साक्षरता प्रदान करने पर केंद्रित है, और शिक्षार्थियों को महत्वपूर्ण जीवन कौशल से समृद्ध करता है, जिससे आजीवन सीखने को बढ़ावा मिलता है। 

विजन:

  • उल्लास योजना का उद्देश्य भारत को जन-जन साक्षर बनाना है। यह योजना कर्तव्यबोध की भावना पर आधारित है और स्वयंसेवा के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है। 

कार्यान्वयन अवधि:

  • भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2022-2027 के दौरान इस योजना को लागू करने की मंजूरी दे दी है।

वित्तीय व्यय:

  • उल्लास परियोजना का वित्तीय परिव्यय 1037.90 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 700 करोड़ रुपये और राज्य सरकार का हिस्सा 337.90 करोड़ रुपये है। 

उद्देश्य:

  • सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के निरक्षरों को शामिल करना।
  • वित्तीय वर्ष 2022-27 के लिए मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान का लक्ष्य 5 करोड़ शिक्षार्थी हैं, जिनमें से प्रति वर्ष 1 करोड़ शिक्षार्थियों को ऑनलाइन शिक्षण, अधिगम और मूल्यांकन प्रणाली (OTLAS) का उपयोग करके प्रशिक्षित किया जाएगा। 
  • ओटलस (OTLAS) एक कंप्यूटर एप्लिकेशन है जो राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित उल्लास (ULLAS) के अंतर्गत वेब पोर्टल/मोबाइल ऐप में अंतर्निहित है। 

उल्लास पहल के घटक:

  • बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान,
  • जीवन के लिए आवश्यक कौशल (जिनमें वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, कानूनी साक्षरता, स्वास्थ्य देखभाल और जागरूकता, बाल देखभाल और शिक्षा, परिवार कल्याण आदि शामिल हैं)।
  • उचित समतुल्यता प्रदान करने हेतु बुनियादी शिक्षा
  • व्यावसायिक कौशल (स्थानीय रोजगार प्राप्त करने के लिए नवसाक्षरों के लिए सतत अधिगम प्रक्रिया के एक भाग के रूप में कौशल विकास को शामिल किया जाएगा)।
  • सतत शिक्षा (इसमें कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, खेल और मनोरंजन के साथ-साथ स्थानीय शिक्षार्थियों के लिए रुचि या उपयोग के अन्य विषयों में समग्र वयस्क शिक्षा पाठ्यक्रम शामिल हैं) 

प्रमुख विशेषताएं:

इस योजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • इस योजना के कार्यान्वयन के लिए विद्यालय एक इकाई के रूप में कार्य करेगा।
  • लाभार्थियों और स्वयंसेवकों का सर्वेक्षण करने के लिए विद्यालयों का उपयोग किया जाएगा।
  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को नवाचारी गतिविधियों को करने के लिए लचीलापन प्रदान किया जाएगा।
  • 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के सभी निरक्षरों को मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान के साथ-साथ महत्वपूर्ण जीवन कौशल भी प्रदान किए जाएंगे।
  • योजना के व्यापक कवरेज के लिए वयस्क शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।
  • सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सहायता प्रदान करके, स्वयंसेवी सहायता उपलब्ध कराकर, शिक्षार्थियों के लिए सुविधा केंद्र खोलकर और आर्थिक रूप से कमजोर शिक्षार्थियों को मोबाइल फोन आदि के रूप में आईटी तक पहुंच प्रदान करके सीएसआर/परोपकारी सहायता प्राप्त की जा सकती है।
  • वयस्क शिक्षा से तुरंत और पर्याप्त रूप से लाभान्वित होने वाले वर्ग के लोगों , जैसे कि लड़कियां और महिलाएं, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/अल्पसंख्यक, विशेष आवश्यकता वाले व्यक्ति (दिव्यांगजन), हाशिए पर रहने वाले/घुमंतू/निर्माण श्रमिक/मजदूर आदि को प्राथमिकता दी जाएगी। 
  • स्थान/क्षेत्र के संदर्भ में, नीति आयोग के सभी आकांक्षी जिलों, राष्ट्रीय/राज्य औसत से कम साक्षरता दर वाले जिलों, 2011 की जनगणना के अनुसार 60% से कम महिला साक्षरता दर वाले जिलों, बड़ी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अल्पसंख्यक आबादी वाले जिलों/ब्लॉकों, शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉकों और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
  • योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए मंत्रालयों/विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। 
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