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विक्रम-1 रॉकेट

संदर्भ 

  • भारत में निजी क्षेत्र द्वारा विकसित पहला कक्षीय श्रेणी (ऑर्बिटल-क्लास) का रॉकेट अपने प्रथम प्रक्षेपण के लिए पूरी तरह तैयार है। हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष प्रक्षेपण कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने 2 जुलाई को घोषणा की कि उसके विक्रम-1 रॉकेट की पहली परीक्षण उड़ान, जिसे मिशन आगमन नाम दिया गया है, 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच निर्धारित प्रक्षेपण अवधि (Launch Window) के दौरान संपन्न की जाएगी।

विक्रम-1 रॉकेट के बारे में 

  • विक्रम-1 भारत का एक अत्याधुनिक और बहु-चरणीय (Multi-stage) कक्षीय प्रक्षेपण यान है। 
  • लगभग सात मंजिला ऊंचे इस रॉकेट की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह से कार्बन कंपोजिट (मिश्रित) संरचना से निर्मित होना है, जो इसे वजन में बेहद हल्का और मजबूत बनाता है।

मुख्य उद्देश्य:

भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट के सभी चरणों को प्रक्षेपण स्थल (लॉन्च पैड) पर सफलतापूर्वक एकीकृत (Assembled) और व्यवस्थित कर दिया गया है। यह आगामी मिशन स्काईरूट के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है, क्योंकि इसके माध्यम से वाहन के प्रदर्शन से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े (Data) जुटाए जाएंगे। इस मिशन के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं: 

  • प्रणोदन और पृथक्करण (Propulsion & Separation) : रॉकेट की प्रणोदन प्रणाली और उड़ान के दौरान इसके विभिन्न चरणों के अलग होने (स्टेज सेपरेशन) की प्रक्रिया की सटीकता की जांच करना।
  • मार्गदर्शन और नियंत्रण (GNC) : रॉकेट के मार्गदर्शन (Guidance), नेविगेशन (Navigation) और नियंत्रण (Control) प्रणालियों के वास्तविक प्रदर्शन का आकलन करना। 
  • समग्र वाहन प्रदर्शन : पूरे अंतरिक्ष यान की तकनीकी क्षमता और उसकी दक्षता का व्यापक डेटा एकत्र करना। 

तकनीकी विशेषताएं:

1. स्वदेशी एवं उन्नत प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System)

  • विक्रम-1 पूरी तरह से भारत में ही विकसित (स्वदेशी) प्रणालियों से संचालित है। 
  • इसमें उच्च-थ्रस्ट वाले ठोस-ईंधन रॉकेट बूस्टर और अत्याधुनिक 3डी-मुद्रित (3D-printed) लिक्विड इंजन शामिल हैं। यह अनूठा संयोजन रॉकेट को तीव्र गति से असेंबल (निर्मित) करने और बहुत कम समय में लॉन्च के लिए तैयार करने की सुविधा देता है। 

2. पेलोड क्षमता और मिशन का लक्ष्य

यह रॉकेट विशेष रूप से छोटे उपग्रहों के बाजार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है :

  • वजन क्षमता : यह निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO - Low Earth Orbit) में 350 किलोग्राम तक के उपग्रहों को स्थापित करने में सक्षम है।
  • पहला मिशन : अपने पहले प्रक्षेपण में यह रॉकेट 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित कक्षा को लक्षित करेगा, जिसका कक्षीय झुकाव (Orbital Inclination) 60 डिग्री होगा।

स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के बारे में  

  • स्काईरूट एयरोस्पेस हैदराबाद स्थित एक निजी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए प्रक्षेपण यान (लॉन्च व्हीकल) विकसित कर रही है। 
  • यह भारत के उभरते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक मानी जाती है। 
  • इस कंपनी की स्थापना वर्ष 2018 में इसरो (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिकों एवं अभियंताओं पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी। 
  • स्काईरूट एयरोस्पेस का मुख्य उद्देश्य छोटे उपग्रहों के लिए कम लागत वाली, लचीली और व्यावसायिक प्रक्षेपण सेवाएँ उपलब्ध कराना है।
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