संदर्भ
जल जीवन, कृषि एवं आर्थिक विकास का आधार है, किंतु बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन, भूजल के अत्यधिक दोहन और प्रदूषण के कारण भारत गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अटल भूजल योजना, NAQUIM, जल संचय जन भागीदारी तथा कैच द रेन जैसी पहलें संचालित की जा रही हैं। इनमें अटल भूजल योजना का पायलट 7 राज्यों की 8,203 जल-संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों में सफल रहा है, जो वैज्ञानिक एवं सहभागी जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण का महत्व
- जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से आशय सतही एवं भूजल संसाधनों के वैज्ञानिक नियोजन, उपयोग एवं संरक्षण से है। यद्यपि जल राज्य सूची का विषय है, फिर भी केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय, तकनीकी एवं डिजिटल सहयोग प्रदान कर मांग-आधारित जल प्रबंधन, जलभृत मानचित्रण तथा वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य जल उपयोग दक्षता बढ़ाना, भूजल पुनर्भरण तथा स्थानीय स्तर पर जल बजट को सुदृढ़ करना है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रमुख उपलब्धियाँ
हाल के वर्षों में भारत ने जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है -
- राष्ट्रीय जल निकाय गणना के तहत 24.2 लाख से अधिक जल निकायों की पहचान एवं जियो-टैगिंग कर उनके पुनर्जीवन का वैज्ञानिक आधार तैयार किया गया।
- जल संचय जन भागीदारी (JSJB) के अंतर्गत मई 2026 तक 1.55 करोड़ से अधिक कृत्रिम पुनर्भरण एवं जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण एवं जियो-टैगिंग की गई।
- अटल भूजल योजना के तहत 7 राज्यों के 80 जिलों, 229 विकास खंडों और 8,203 ग्राम पंचायतों में सहभागी भूजल प्रबंधन लागू किया गया।
- कैच द रेन अभियान के अंतर्गत 28 जुलाई 2026 तक 2 करोड़ से अधिक जल संरक्षण एवं कृत्रिम पुनर्भरण कार्य पूरे किए गए।
ये उपलब्धियाँ जल संरक्षण में जनभागीदारी, वैज्ञानिक तकनीक और डिजिटल प्रबंधन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती हैं।
जल प्रबंधन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक विधियाँ
भारत में जल प्रबंधन में आधुनिक डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
- सहभागी मांग-आधारित जल प्रबंधन (Participatory Demand-side Management): ग्राम पंचायतों की भागीदारी से जल बजट तैयार कर फसल विविधीकरण, सूक्ष्म सिंचाई तथा जल उपयोग दक्षता को बढ़ावा दिया जा रहा है। अटल भूजल योजना के अंतर्गत अनेक किसान ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई अपना रहे हैं।
- त्रि-आयामी जीआईएस आधारित जलभृत मानचित्रण (3D GIS Aquifer Mapping): NAQUIM 2.0 के तहत लगभग 25 लाख वर्ग किमी क्षेत्र का मानचित्रण कर संभावित भूजल पुनर्भरण क्षेत्रों की पहचान की गई है।
- डिजिटल टेलीमेट्री निगरानी: राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के अंतर्गत 24,000 से अधिक डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर (DWLR) वास्तविक समय में भूजल स्तर की निगरानी कर रहे हैं।
- जल विज्ञान पूर्वानुमान एवं उपग्रह निगरानी: गणितीय मॉडलिंग एवं उपग्रह तकनीक के माध्यम से फ्लड वॉच इंडिया ऐप 592 बाढ़ केंद्रों तथा 150 प्रमुख जलाशयों की वास्तविक समय में निगरानी करता है।
सरकार की प्रमुख पहलें
- राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण कार्यक्रम (NAQUIM 1.0 एवं 2.0): लगभग 25 लाख वर्ग किमी क्षेत्र का जलभृत मानचित्रण तथा जिला स्तरीय जलभृत प्रबंधन योजनाएँ तैयार की गईं।
- इंडिया-ग्राउंडवाटर रिसोर्स एस्टिमेशन सिस्टम (IN-GRES): भूजल नियोजन हेतु वेब-आधारित वैज्ञानिक मंच, जिसका उपयोग मनरेगा एवं जल शक्ति अभियान जैसी योजनाओं में किया जा रहा है।
- वाटर इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (WIMS): जल विज्ञान संबंधी आँकड़ों के संग्रह, भंडारण तथा नहर एवं जलाशय प्रबंधन हेतु एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म।
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY): हर खेत को पानी (HKKP) एवं RRR के अंतर्गत सिंचाई परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग एवं डिजिटल एसेट मैपिंग।
जल प्रबंधन के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
- जल राज्य सूची का विषय होने से राज्यों में कार्यान्वयन एवं नदी बेसिन प्रबंधन में असमानता।
- कृषि में भूजल का अत्यधिक दोहन, विशेषकर जल-गहन फसलों के कारण।
- वर्षा जल संचयन एवं कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं का अपर्याप्त रखरखाव।
- डिजिटल जल आँकड़ों का ग्राम स्तर पर प्रभावी उपयोग एवं तकनीकी क्षमता का अभाव।
आगे की राह
- सहभागी, वैज्ञानिक एवं तकनीक-आधारित जल शासन को बढ़ावा देना।
- अटल भूजल योजना का विस्तार सभी जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों तक करना।
- वर्षा जल संचयन तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित करना।
- IN-GRES, WIMS, NAQUIM एवं JSJB के आँकड़ों को एकीकृत कर रियल-टाइम निर्णय सहायता प्रणाली विकसित करना तथा ग्राम पंचायतों की क्षमता बढ़ाना।
निष्कर्ष
भारत की जल सुरक्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, तकनीकी नवाचार, डेटा-आधारित प्रबंधन तथा जनभागीदारी के समन्वय पर निर्भर करती है। अटल भूजल योजना, NAQUIM, IN-GRES, WIMS, जल संचय जन भागीदारी एवं कैच द रेन जैसी पहलें इस दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती हैं। स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक जल बजट और विकेंद्रीकृत जल शासन को सुदृढ़ कर भारत सतत एवं जलवायु-लचीली जल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।