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महिलाएं और भारत का विकसित होता ऋण बाजार

संदर्भ 

  • भारत के वित्तीय परिदृश्य में एक युगांतरकारी परिवर्तन देखा जा रहा है। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने नई दिल्ली में ऋण लेने वालों से निर्माता तक: महिलाएं और भारत का विकसित होता ऋण बाजार रिपोर्ट का दूसरा संस्करण जारी किया। वस्तुतः यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारतीय महिलाएं अब केवल ऋण प्राप्तकर्ता नहीं रह गई हैं, बल्कि वे देश की अर्थव्यवस्था में निर्माता और उद्यमी के रूप में उभर रही हैं। 

रिपोर्ट का आधार 

  • यह व्यापक मूल्यांकन लगभग 16 करोड़ सक्रिय महिला क्रेडिट ब्यूरो डेटा और 161 ग्रामीण महिला उद्यमियों के प्राथमिक शोध पर आधारित है। इसे महिला उद्यमिता मंच (WEP) के फाइनेंसिंग वूमेन कोलैबोरेटिव (FWC) के तहत विकसित किया गया है। 

रिपोर्ट के मुख्य आकर्षण  

  • ट्रांसयूनियन सीआईबीएल और माइक्रोसेव कंसल्टिंग (एमएससी) द्वारा तैयार यह रिपोर्ट महिलाओं के उधार लेने के व्यवहार में आए महत्वपूर्ण बदलावों को रेखांकित करती है। 

वित्तीय समावेशन से सशक्तिकरण तक 

  • रिपोर्ट के अनुसार, औपचारिक ऋण प्रणाली में महिलाओं की भागीदारी पहुंच-आधारित समावेशन से बदलकर अब प्रगति-आधारित भागीदारी की ओर बढ़ चुकी है।

ऋण पोर्टफोलियो में ऐतिहासिक उछाल 

  • ऋण पोर्टफोलियो : भारत में महिला उधारकर्ताओं का कुल ऋण पोर्टफोलियो 76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
  • बाजार हिस्सेदारी : यह राशि देश की कुल ऋण प्रणाली का 26 प्रतिशत है। 
  • अभूतपूर्व वृद्धि : 2017 की तुलना में महिलाओं की ऋण क्षमता में 4.8 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है। 2017 में यह आंकड़ा मात्र 16 लाख करोड़ रुपये था। 

ऋण बाजार के बदलते रुझान

  • सक्रिय उधारकर्ताओं में वृद्धि : 2017 से 2025 के बीच सक्रिय महिला उधारकर्ताओं की संख्या में 9% सीएजीआर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) की वृद्धि हुई। 
  • ऋण पहुंच : महिलाओं के बीच ऋण की पहुंच 19% से बढ़कर 36% हो गई है। 
  • वाणिज्यिक ऋण (Commercial Credit) : महिला व्यावसायिक उधारकर्ताओं के ऋण में 2022-25 के बीच 31% की वृद्धि हुई, जो कुल वाणिज्यिक ऋण वृद्धि (17%) से कहीं अधिक है।
  • सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) से संक्रमण : सूक्ष्म वित्त लेने वाली 19% महिलाएं अब व्यक्तिगत खुदरा और वाणिज्यिक ऋणों की ओर स्थानांतरित हो रही हैं। 

भौगोलिक विस्तार और लोकप्रिय उत्पाद 

रिपोर्ट बताती है कि ऋण की पहुंच अब केवल विकसित राज्यों तक सीमित नहीं है :

  • विस्तार : दक्षिण और पश्चिम के साथ-साथ बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में भी ऋण पहुंच का भौगोलिक विस्तार हुआ है।
  • पसंदीदा उत्पाद : व्यक्तिगत ऋण और स्वर्ण ऋण (Gold Loan) की मांग सबसे अधिक है।
  • संपत्ति स्वामित्व : आवास ऋण (Housing Loan) में वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि महिलाओं के बीच संपत्ति के स्वामित्व की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं। 

भविष्य की राह: डिजिटलीकरण और क्षमता 

  • भारत में वर्तमान में लगभग 45 करोड़ ऋण-पात्र महिलाएं हैं, जो भविष्य में ऋण विस्तार की अपार संभावनाओं को दर्शाती हैं। रिपोर्ट में डिजिटल क्रांति की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है:
  • पहचान, भुगतान और बीमा का डिजिटलीकरण प्रवेश बाधाओं को कम कर रहा है।
  • अनौपचारिक ऋण (साहूकारों) से औपचारिक बैंकिंग प्रणाली की ओर महिलाओं का तेजी से संक्रमण हो रहा है।

निष्कर्ष 

  • नीति आयोग की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत की नारी शक्ति अब देश के आर्थिक पहिये को गति देने वाली एक प्रमुख शक्ति बन चुकी है। औपचारिक ऋण तक महिलाओं की पहुंच न केवल उनके परिवारों को सशक्त बना रही है, बल्कि विकसित भारत के संकल्प को भी सिद्ध कर रही है।

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