चीन ने हाल ही में एटलस नामक ड्रोन स्वार्म प्रणाली पेश की है। यह एक उन्नत सैन्य तकनीक है, जिसकी मदद से एक ही ऑपरेटर लगभग 100 ड्रोन को एक साथ लॉन्च करने और नियंत्रित करने में सक्षम होता है।
एटलस ड्रोन स्वार्म सिस्टम के बारे में
एटलस सिस्टम मूल रूप से एक स्वायत्त और गतिशील (Mobile) यूनिट है, जिसे पहियों पर चलता-फिरता युद्धक्षेत्र नेटवर्क कहना उचित होगा। यह बड़े पैमाने पर ड्रोन लॉन्च करने की क्षमता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ जोड़ता है।
इसका विकास चीन के सरकारी उपक्रम चाइना इलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉर्पोरेशन (CETC) द्वारा किया गया है।
इसका लक्ष्य एक ऐसी यूनिट तैयार करना जिसे ढूंढ पाना लगभग असंभव हो और जो दुश्मन को भ्रमित करने और सटीक हमला करने तक में सक्षम हो।
कार्यप्रणाली और संरचना
यह सिस्टम तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है -
स्वार्म-2 (कॉम्बैट वाहन),
कमांड वाहन और
सपोर्ट वाहन।
त्वरित प्रक्षेपण :स्वार्म-2 वाहन से प्रत्येक ड्रोन के बीच 3 सेकंड से भी कम के अंतराल पर लॉन्चिंग होती है।
स्व-चालित निर्णय क्षमता :कमांड सेंटर में बैठा ऑपरेटर केवल निगरानी करता है, जबकि ड्रोन के भीतर मौजूद इंटेलिजेंट एल्गोरिदम उन्हें आपस में तालमेल बिठाने, लक्ष्य की पहचान करने और स्वतंत्र रूप से हमला करने की शक्ति देते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
विशाल मारक क्षमता :यह सिस्टम एक बार में 96 लघु एवं मध्यम आकार के ड्रोनों को ले जाने और संचालित करने में सक्षम है।
अभूतपूर्व गति :महज 5 मिनट (300 सेकंड) के भीतर पूरे 96 ड्रोन आसमान में तैनात किए जा सकते हैं।
दुर्गम इलाकों में सक्रियता : अपने छोटे आकार और स्वतंत्र प्रकृति के कारण, इसे दुर्गम पहाड़ियों या जंगलों में आसानी से छिपाकर अचानक हमला किया जा सकता है।
संज्ञानात्मक बुद्धिमत्ता (AI-Driven) :पुराने मॉडलों के विपरीत, ये ड्रोन बिना किसी मानवीय निर्देश के युद्ध की बदलती स्थितियों के अनुसार अपनी फॉर्मेशन बदल सकते हैं।
रणनीतिक प्रभाव और चुनौतियाँ
रक्षा तंत्र को विफल करना : यह प्रणाली दुश्मन के एयर डिफेंस को ओवरलोड कर देती है। जब सैकड़ों ड्रोन एक साथ हमला करते हैं, तो दुश्मन को उन्हें गिराने के लिए अपनी महंगी और सीमित मिसाइलें खर्च करनी पड़ती हैं, जिससे उसका बचाव तंत्र आर्थिक और तकनीकी रूप से चरमरा जाता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर :विशेष रूप से तिब्बत जैसे सैन्य क्षेत्र में इसकी तैनाती भारत के लिए चिंता का विषय हो सकती है। बेहतर सड़क नेटवर्क का उपयोग कर ये ड्रोन भारतीय लॉजिस्टिक्स और सप्लाई लाइन को काट सकते हैं, जिससे सीमा पर स्थित अग्रिम चौकियां अलग-थलग पड़ सकती हैं।