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ऑटिज्म का उपचार और स्टेम सेल थेरेपी

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के उपचार के लिए स्टेम सेल थेरेपी को किसी भी तरह से नियमित चिकित्सीय सेवा के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है। न्यायालय के अनुसार, इसे केवल विधिवत स्वीकृत और निगरानी में चल रहे नैदानिक परीक्षणों या शोध परिवेश तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।

प्रमुख बिंदु 

वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी पर चिंता 

  • ए.एस.डी. के उपचार में स्टेम कोशिकाओं के उपयोग से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी अभी अपूर्ण व अनिश्चित है। इसकी प्रभावशीलता और संभावित दुष्प्रभावों को लेकर ठोस प्रमाणों के अभाव में यदि डॉक्टर ऐसी थेरेपी प्रदान करते हैं तो यह मरीजों के प्रति उनके ‘उचित देखभाल मानक’ का उल्लंघन माना जाएगा।
  • न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर में स्टेम सेल आधारित उपचार की सुरक्षा और प्रभाव को साबित करने वाले स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में चिकित्सकों के पास मरीजों को सही व संपूर्ण जानकारी देने का आधार ही नहीं है।
  • वस्तुतः याचिकाओं में यह दलील दी गई थी कि सरकार ने स्टेम सेल थेरेपी की अनुमति न देकर चूक की है जिससे औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के अंतर्गत बनाए गए नए औषधि एवं नैदानिक परीक्षण नियम, 2019 तथा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा जारी राष्ट्रीय स्टेम सेल अनुसंधान दिशानिर्देश, 2017 का उल्लंघन हुआ है।

स्टेम सेल थेरेपी के बारे में  

  • स्टेम सेल थेरेपी या स्टेम सेल उपचार एक चिकित्सीय पद्धति है जिसमें विभिन्न चिकित्सीय स्थितियों के उपचार या प्रबंधन के लिए स्टेम कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है। 
  • स्टेम कोशिकाएँ अविभेदित कोशिकाएँ होती हैं जिनमें शरीर में विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं, जैसे- मांसपेशी, हड्डी या तंत्रिका कोशिकाओं में विकसित होने की क्षमता होती है। 
  • स्टेम सेल थेरेपी का लक्ष्य स्टेम कोशिकाओं की पुनर्योजी व मरम्मत करने की क्षमताओं का उपयोग करके उन बीमारियों और चोटों का उपचार या प्रबंधन करना है जिनके लिए वर्तमान में उपचार के सीमित विकल्प उपलब्ध हैं। 
  • यह अभिनव चिकित्सा पद्धति स्टेम कोशिकाओं के अद्वितीय गुणों का लाभ उठाती है जिनमें विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में विभेदित होने की उनकी क्षमता और प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने तथा सूजन को कम करने की उनकी क्षमता शामिल है। 

स्टेम सेल आधारित उपचारों का लक्ष्य 

  • स्टेम सेल थेरेपी का प्राथमिक लक्ष्य स्टेम कोशिकाओं की पुनर्योजी और मरम्मत क्षमताओं का उपयोग करके विभिन्न प्रकार की चिकित्सा स्थितियों का उपचार या प्रबंधन करना है। विशेष रूप से इस उपचार का उद्देश्य निम्नलिखित है:
    • ऊतक पुनर्जनन को बढ़ावा देना : स्टेम कोशिकाएँ विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में विभेदित हो सकती हैं जिससे मांसपेशियों, हड्डियों या तंत्रिका कोशिकाओं जैसे क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत व पुनर्जनन में सहायता मिलती है।
    • प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करना : स्टेम कोशिकाओं में प्रतिरक्षा-नियंत्रण गुण होते हैं जो असामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को कम करके स्वप्रतिरक्षित विकारों के प्रबंधन में मदद कर सकते हैं।
    • सूजन कम करना : स्टेम कोशिकाएँ सूजनरोधी कारक स्रावित कर सकती हैं जो प्रणालीगत व स्थानीय सूजन को कम करने में मदद करते हैं जिससे पुरानी सूजन संबंधी स्थितियों के लक्षणों से राहत मिलती है।
    • जीवन की गुणवत्ता में सुधार : अपक्षयी रोगों और चोटों के मूल कारणों को संबोधित करके स्टेम सेल थेरेपी का उद्देश्य रोगियों के लिए जीवन की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाना, लक्षणों से राहत प्रदान करना और संभावित रूप से रोग की प्रगति को धीमा करना है। 

चुनौतियाँ

  • स्टेम सेल थेरेपी में विभिन्न बीमारियों के उपचार की अपार संभावनाएँ हैं किंतु इसमें कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें शामिल है-
    • ट्यूमर बनने का खतरा 
    • प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा अस्वीकृत करना 
    • बड़ी संख्या में कोशिकाओं की आवश्यकता  
  • इन समस्याओं को दूर करने और स्टेम सेल थेरेपी की पूरी क्षमता का एहसास कराने के लिए अनुसंधान एवं नैदानिक ​​उपयोग में प्रगति महत्वपूर्ण होगी।
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