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बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (Bacille Calmette-Guerin - BCG) वैक्सीन

चर्चा में क्यों ? 

  • भारत ने मानवीय सहायता के अंतर्गत अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय को 13 टन बीसीजी (BCG) वैक्सीन और संबंधित चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराई है। वस्तुतः यह कदम न केवल क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। 

बीसीजी (BCG) वैक्सीन के बारे में  

  • बीसीजी एक जीवित क्षीणीकृत (Live-attenuated) टीका है, जो मुख्य रूप से तपेदिक (टीबी) के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है। 
  • यह वैश्विक स्तर पर टीबी के लिए स्वीकृत एकमात्र टीका है और अनिवार्य टीकाकरण कार्यक्रमों का एक अभिन्न अंग है। 
  • इस टीके का विकास फ्रांसीसी वैज्ञानिकों अल्बर्ट कैलमेट और कैमिल गुएरिन द्वारा पाश्चर संस्थान में किया गया था। 13 वर्षों के गहन शोध के पश्चात 1921 में इसका प्रथम मानवीय परीक्षण हुआ। 

वैक्सीन की संरचना 

  • सक्रिय घटक : इसमें माइकोबैक्टीरियम बोविस का जीवित लेकिन कमजोर (क्षीणीकृत) रूप होता है। यह जीवाणु सामान्यतः मवेशियों में टीबी का कारण बनता है, किंतु मानव उपयोग के लिए इसे सुरक्षित रूप से कमजोर किया जाता है। 
  • सहायक पदार्थ : वैक्सीन में ग्लिसरॉल, साइट्रिक एसिड तथा सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे विभिन्न लवण शामिल होते हैं, जो इसकी स्थिरता और प्रभावशीलता बनाए रखने में सहायक होते हैं। 
  • शुष्क रूप : प्रायः यह टीका फ्रीज-ड्राइड (लायोफिलाइज्ड) रूप में उपलब्ध कराया जाता है, जैसा कि अफगानिस्तान भेजी गई खेप में देखा गया। उपयोग से पहले इसे एक विशेष घोल (डायल्यूएंट) मिलाकर पुनः तैयार किया जाता है। 

यह कैसे कार्य करता है ?

  • यह वैक्सीन शरीर में बैक्टीरिया के एक कमजोर रूप को प्रवेश कराती है, जिससे प्रतिरक्षा तंत्र मायकोबैक्टीरियल प्रोटीन को पहचानना सीखता है।
  • इसके परिणामस्वरूप शरीर में बिना वास्तविक रोग उत्पन्न किए टी-कोशिकाओं और एंटीबॉडी का निर्माण होता है। बाद में यदि शरीर माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के संपर्क में आता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली पहले से तैयार होने के कारण तेज़ और प्रभावी प्रतिक्रिया देकर संक्रमण से रक्षा कर पाती है। 

प्रमुख विशेषताएँ  

  • इसे त्वचा की ऊपरी परत के भीतर (इंट्राडर्मल) इंजेक्शन द्वारा बाएं ऊपरी बांह में लगाया जाता है।
  • टीकाकरण के पश्चात इंजेक्शन स्थल पर एक छोटा घाव बनता है, जो ठीक होने के बाद जीवनभर के लिए एक स्थायी निशान (BCG Scar) छोड़ देता है।
  • यह बच्चों में मृत्यु दर कम करने और वैश्विक टीबी बोझ को नियंत्रित करने की आधारशिला है।
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