पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने कोच्चि स्थित सेंटर फॉर मरीन लिविंग रिसोर्सेज एंड इकोलॉजी (CMLRE) के भवसागर रेफरल सेंटर को जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत गहरे समुद्री जीवों के लिए राष्ट्रीय भंडार का दर्जा प्रदान किया है। यह निर्णय भारत के समुद्री अनुसंधान और संरक्षण प्रयासों को एक नई दिशा देता है।
भवसागर रेफरल सेंटर क्या है ?
भवसागर रेफरल सेंटर एक उन्नत वैज्ञानिक संस्थान है, जिसे गहरे समुद्र में पाए जाने वाले जीवों के संरक्षण, अध्ययन और व्यवस्थित अभिलेखीकरण के लिए विकसित किया गया है।
यह न केवल जैविक नमूनों को सुरक्षित रखता है, बल्कि उनसे संबंधित आनुवंशिक जानकारी को भी संरक्षित करता है, जिससे भविष्य के शोध कार्यों को आधार मिलता है।
संरचना और प्रशासन
यह केंद्र कोच्चि (केरल) स्थित सेंटर फॉर मरीन लिविंग रिसोर्सेज एंड इकोलॉजी (CMLRE) के अंतर्गत संचालित होता है।
इसका संचालन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) द्वारा किया जाता है।
30 मार्च 2026 को इसे औपचारिक रूप से राष्ट्रीय भंडार के रूप में मान्यता दी गई।
मुख्य उद्देश्य
इस केंद्र का उद्देश्य गहरे समुद्र से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान को सशक्त बनाना है।
यह समुद्र वैज्ञानिकों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर समुद्री रहस्यों को समझने में सहायता करता है। साथ ही, यह भारत की ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने और समुद्री जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके अतिरिक्त, यह केंद्र संयुक्त राष्ट्र के महासागर विज्ञान दशक (2021–2030) के लक्ष्यों के अनुरूप गहरे समुद्री वर्गीकरण में विशेषज्ञता विकसित करने का प्रयास करता है।
प्रमुख विशेषताएँ
केंद्र में 3,500 से अधिक वैज्ञानिक रूप से वर्गीकृत और स्थान-चिह्नित नमूने सुरक्षित रखे गए हैं।
इसमें अकशेरुकी (जैसे निडेरियन, एनेलिड, मोलस्क, आर्थ्रोपोड, एकाइनोडर्म) और कशेरुकी जीव (जैसे शार्क समूह और टेलीओस्ट मछलियाँ) शामिल हैं।
जैविक नमूनों के साथ-साथ डीएनए जैसी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी भी सुरक्षित रखी जाती है।
भारतीय समुद्री क्षेत्रों में खोजी गई नई गहरे समुद्री प्रजातियों के आधिकारिक अभिलेख (टाइप स्पेसिमेन) यहीं संरक्षित किए जाते हैं।
यह केंद्र वैज्ञानिकों और शैक्षणिक संस्थानों को गहरे समुद्र से जुड़े अध्ययन के लिए एक साझा प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।
महत्व
भवसागर रेफरल सेंटर भारत की समुद्री जैव विविधता के संरक्षण और दस्तावेजीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह न केवल गहरे समुद्र के पारिस्थितिक तंत्र को समझने में मदद करता है, बल्कि समुद्री संसाधनों के सतत और जिम्मेदार उपयोग के लिए आवश्यक वैज्ञानिक आधार भी प्रदान करता है।
इस प्रकार, यह केंद्र भविष्य में समुद्री अनुसंधान और आर्थिक विकास दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित हो सकता है।