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बीजान्टिन साम्राज्य (Byzantine Empire)

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में पुरातत्वविदों और शोधकर्ताओं ने दक्षिण-पूर्वी स्पेन की एक पहाड़ी पर एक दुर्गम परिसर खोजा है, जिसे छठी शताब्दी के उत्तरार्ध का एक दुर्लभ बीजान्टिन सैन्य गढ़ माना जा रहा है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, इस सामरिक केंद्र की स्थापना बीजान्टिन सैनिकों और पादरियों (मिशनरियों) के एक संयुक्त समूह द्वारा की गई थी।  

बीजान्टिन साम्राज्य के बारे में  

  • बीजान्टिन साम्राज्य की नींव 330 ईस्वी में पड़ी, जब सम्राट कॉन्स्टेंटाइन ने विशाल रोमन साम्राज्य को प्रशासनिक कुशलता के लिए दो भागों में विभाजित किया।
  • जहाँ पश्चिमी रोमन साम्राज्य समय के थपेड़ों के साथ बिखर गया, वहीं इसका पूर्वी हिस्सा बीजान्टिन या पूर्वी रोमन साम्राज्य अगले एक हजार वर्षों तक सभ्यता का केंद्र बना रहा। 

सामरिक शक्ति और विस्तार 

  • इस साम्राज्य की राजधानी कॉन्स्टेंटिनोपल (आधुनिक इस्तांबुल) था। बोस्फोरस जलडमरूमध्य पर स्थित होने के कारण यह शहर यूरोप और एशिया के बीच व्यापार और संस्कृति का सबसे बड़ा सेतु बना।
  • इसका शासन अपने चरमोत्कर्ष पर दक्षिणी स्पेन के तटों से लेकर सीरिया के रेगिस्तानों तक फैला हुआ था।
  • दिलचस्प बात यह है कि यूनानी भाषा बोलने और रोम पर नाममात्र का नियंत्रण होने के बावजूद, यहाँ के नागरिक अंत तक खुद को गर्व से रोमन ही कहते रहे। 

जस्टिनियन युग: वैभव का शिखर 

  • सम्राट जस्टिनियन (527-565 ईस्वी) के शासन को बीजान्टिन इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। उनके नेतृत्व में साम्राज्य ने अपनी खोई हुई पश्चिमी जमीनों को वापस पाया और वास्तुकला के क्षेत्र में इतिहास रचा। 
  • उनके काल में निर्मित हागिया सोफिया विशाल कैथेड्रल बीजान्टिन इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है, जो आज एक मस्जिद के रूप में अपनी भव्यता बिखेर रहा है। 

शासन व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत 

  • बीजान्टिन शासन दैवीय अधिकार के सिद्धांत पर चलता था, जहाँ सम्राट को ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता था। इस साम्राज्य के शासकों ने न केवल एक जटिल राजनीतिक प्रणाली विकसित की, बल्कि कला, कानून और धार्मिक परंपराओं (ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स) का एक ऐसा ढांचा तैयार किया जिसने पूरे पूर्वी यूरोप और रूस को प्रभावित किया। 

पतन का क्रम 

एक लंबे समय तक शक्ति का केंद्र रहने के बाद, बीजान्टिन साम्राज्य को कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ा :

  • धार्मिक विभाजन : आंतरिक मतभेदों के कारण ईसाई धर्म दो हिस्सों - रोमन कैथोलिक और ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स में बंट गया।
  • बाहरी आक्रमण : उभरती हुई मुस्लिम शक्तियों के साथ निरंतर संघर्ष ने साम्राज्य की सीमाओं को सीमित कर दिया। 
  • 1204 का विश्वासघात : चौथे धर्मयुद्ध (Crusades) के दौरान पश्चिमी देशों की सेनाओं ने अपनी ही आस्था के इस गढ़ कॉन्स्टेंटिनोपल को बेरहमी से लूटा, जिससे साम्राज्य की कमर टूट गई। 

अंत: अंततः 1453 ईस्वी में ऑटोमन सुल्तान मोहम्मद द्वितीय (Mehmed the Conqueror) ने एक ऐतिहासिक घेराबंदी के बाद कॉन्स्टेंटिनोपल पर विजय प्राप्त की, जिसके साथ ही इस महान मध्यकालीन साम्राज्य का सूर्यास्त हो गया।  

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