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CURRENT AFFAIRS

भारत में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण

Environment & Ecology 05-Aug-2026

जल जीवन, कृषि एवं आर्थिक विकास का आधार है, किंतु बढ़ती जनसंख्या, जलवायु परिवर्तन, भूजल के अत्यधिक दोहन और प्रदूषण के कारण भारत गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अटल भूजल योजना, NAQUIM, जल संचय जन भागीदारी तथा कैच द रेन जैसी पहलें संचालित की जा रही हैं। इनमें अटल भूजल योजना का पायलट 7 राज्यों की 8,203 जल-संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों में सफल रहा है, जो वैज्ञानिक एवं सहभागी जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ग्लाव झील (Glaw Lake)

Environment & Ecology 04-Aug-2026

अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित ग्लाव झील (Glaw Lake) को रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत भारत की 101वीं अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर भूमि (Ramsar Site) का दर्जा प्रदान किया गया है। इसके साथ ही यह झील अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट बन गई है। यह उपलब्धि भारत में आर्द्रभूमियों के संरक्षण, जैव विविधता को सुरक्षित रखने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

यूरोप के जंगलों में बढ़ती आग की घटनाएँ

Environment & Ecology 03-Aug-2026

समसामयिक वैश्विक परिदृश्य में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव अब केवल आशंकाएँ नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष आपदाओं के रूप में सामने आ रहे हैं। यूरोप में विशेष रूप से ग्रीस, स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल और इटली जैसे देशों में भीषण जंगल की आग ने गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न किया है। इन घटनाओं में लाखों हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हुए हैं और बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा है। वर्तमान में ये वनाग्नि केवल मौसमी घटनाएँ नहीं रह गई हैं, बल्कि छठी पीढ़ी (Sixth Generation) की अत्यधिक तीव्र और विनाशकारी आपदाओं का रूप ले रही हैं, जो पारिस्थितिक तंत्र को व्यापक नुकसान पहुँचा रही हैं। 

लेपिडोप्टेरा (Lepidoptera)

Environment & Ecology 03-Aug-2026

हाल ही में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं द्वारा भारत में पाई जाने वाली तितलियों और पतंगों (लेपिडोप्टेरा) का एक व्यापक और विस्तृत कैटलॉग प्रकाशित किया गया है।  

क्लाउडबर्स्ट (बादल फटने) की घटना

Environment & Ecology 31-Jul-2026

पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर हिमालयी राज्यों में, भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के साथ क्लाउडबर्स्ट शब्द बार-बार सुनने को मिला है। किसी भी भीषण वर्षा की घटना को अक्सर क्लाउडबर्स्ट कह दिया जाता है, जबकि मौसम विज्ञान की दृष्टि से इसकी एक स्पष्ट और वैज्ञानिक परिभाषा है। 

विकास और पर्यावरण का संतुलन: सर्वोच्च न्यायालय के पूर्वव्यापी पर्यावरण स्वीकृति निर्णय के मायने

Environment & Ecology 30-Jul-2026

पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र की विकासात्मक आवश्यकताओं के बीच संतुलन साधना हमेशा से एक संवेदनशील और जटिल विषय रहा है। हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्वव्यापी या एक्स-पोस्ट फैक्टो (Ex-Post Facto) पर्यावरण स्वीकृतियों (ECs) से जुड़े एक अहम फैसले में केंद्र सरकार के 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन (OM) को खारिज कर दिया है, जिसके तहत बिना पूर्व अनुमति के निर्माण या संचालन शुरू करने वाली परियोजनाओं को नियमित करने की अनुमति दी गई थी।   

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस: भारत की संरक्षण यात्रा और वैश्विक नेतृत्व

Environment & Ecology 29-Jul-2026

प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस दुनिया को बाघ संरक्षण के महत्व का संदेश देता है। भारत के लिए यह केवल एक जागरूकता दिवस नहीं, बल्कि विज्ञान-आधारित संरक्षण, सतत विकास और जैव विविधता के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आज भारत विश्व के लगभग 70 प्रतिशत जंगली बाघों का घर है और यह उपलब्धि दशकों की दूरदर्शी नीतियों, वैज्ञानिक प्रबंधन तथा जनभागीदारी का परिणाम है। इसी कारण भारत आज वैश्विक स्तर पर बाघ संरक्षण का अग्रणी देश माना जाता है। 

वैश्विक खनन और जल संकट: ऊर्जा संक्रमण के समक्ष एक मूक चुनौती

Environment & Ecology 25-Jul-2026

अंतर्राष्ट्रीय परिषद ऑन माइनिंग एंड मेटल्स (ICMM) द्वारा जारी ग्लोबल माइनिंग एंड मेटल्स वाटर डेटासेट रिपोर्ट ने वैश्विक संधारणीयता और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक गंभीर चिंता को रेखांकित किया है। यह रिपोर्ट इस बात का प्रामाणिक दस्तावेज है कि विश्वभर की लगभग दो-तिहाई खनन और धातु प्रसंस्करण इकाइयां गंभीर भौतिक जल जोखिमों के साए में संचालित हो रही हैं। जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था जीवाश्म ईंधनों से हरित ऊर्जा की ओर अग्रसर हो रही है, यह जल संकट स्वच्छ ऊर्जा के वैश्वीकरण के मार्ग में एक अवरोधक के रूप में उभर रहा है।   

कुटकी (पिक्रोराइजा कुर्रोआ)

Environment & Ecology 24-Jul-2026

हिमालय के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में उगने वाली दुर्लभ औषधीय वनस्पति कुटकी (पिक्रोराइजा कुर्रोआ) को लंबे समय तक अंधाधुंध दोहन का सामना करना पड़ा। आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अत्यधिक मांग के कारण इस पौधे की जंगली आबादी तेजी से घटती गई, जिसके परिणामस्वरूप इसे प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में शामिल किया गया। अब हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में विकसित एक अभिनव खेती मॉडल इस बहुमूल्य वनस्पति के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय किसानों की आजीविका को भी नई दिशा दे रहा है। 

मानसबल झील

Environment & Ecology 18-Jul-2026

हाल ही में यह देखा गया कि मानसबल झील में प्रवासी पक्षियों की वापसी के साथ इसकी पारिस्थितिकी (इकोसिस्टम) में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

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