चर्चा में क्यों ?
- भारत सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। यह निर्णय विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव, पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच लिया गया है।
- वित्त मंत्रालय ने सामाजिक कल्याण अधिभार (SWS) तथा कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) में संशोधन के माध्यम से इस बदलाव की अधिसूचना जारी की।
कारण क्या है ?
- सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रखने और चालू खाता घाटे पर दबाव कम करने के उद्देश्य से सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है।
- यह कदम अमेरिका-ईरान संघर्ष जैसे वैश्विक तनावों के बीच उठाया गया है, जब आयात बिल बढ़ने और रुपये पर दबाव पड़ने की स्थिति बनी हुई है।
ऐसे में सरकार कच्चे तेल, उर्वरक, रक्षा उपकरण और औद्योगिक सामग्री जैसे आवश्यक आयातों के लिए विदेशी मुद्रा सुरक्षित रखना चाहती है। सोने को गैर-आवश्यक आयात की श्रेणी में मानते हुए उसके आयात को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है।

क्यों केंद्रित किया गया सोने-चांदी के आयात पर ?
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता और चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। सोना और चांदी के आयात को सरकार गैर-जरूरी माने जाने वाले आयातों में प्रमुख मानती है, जो चालू खाता घाटे पर दबाव डालते हैं।
- पिछले वित्तीय वर्ष में सोने और चांदी के आयात पर खर्च रिकॉर्ड 84 अरब डॉलर पहुंच गया (एक दशक पहले यह 35.5 अरब डॉलर था)।
- वैश्विक कीमतों में वृद्धि के बावजूद मात्रा अपेक्षाकृत स्थिर रही, लेकिन कुल बिल बढ़ गया।
- चांदी का उपयोग आभूषणों के अलावा सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स में भी होता है, जबकि हाल के वर्षों में निवेश मांग (ETF आदि) बढ़ी है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नागरिकों से एक साल तक अनावश्यक सोने की खरीदारी टालने की अपील की थी। शुल्क बढ़ोतरी इस अपील के कुछ दिनों बाद आई है।
क्या शुल्क बढ़ाने से मांग घंटेगी?
ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि मांग पर असर सीमित रहने की संभावना अधिक है :
- पिछले दशक में घरेलू सोने की कीमतों में 443% की वृद्धि हुई, लेकिन वार्षिक खपत 666 से 803 मीट्रिक टन के बीच स्थिर रही।
- 2012-13 में शुल्क 2% से बढ़ाकर 10% किया गया था, तब भी मांग स्थिर बनी रही।
- 2025 में कीमतों में पहले ही 76.5% वृद्धि हो चुकी है। अतिरिक्त 9% शुल्क से उपभोक्ता खरीदारी में भारी कटौती नहीं करेंगे।
प्रमुख वजह:
- भारतीय परिवारों के लिए सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि दीर्घकालिक मूल्य भंडार, मुद्रास्फीति और रुपये के अवमूल्यन से सुरक्षा का साधन है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आपातकाल में इसे बेचकर या गिरवी रखकर ऋण लेते हैं। सोने पर आसानी से ऋण मिल जाता है।
विभिन्न क्षेत्र पर असर
- आभूषण :-बढ़ती कीमतों से पहले ही खरीदारी धीमी हुई है। अब और कम कैरेट वाले उत्पादों या छोटी मात्रा की ओर रुझान बढ़ सकता है। अल्पकालिक प्रभाव अधिक पड़ेगा।
- निवेश मांग (सिक्के, बार, ETF) : यह अलग व्यवहार करता है। बढ़ती कीमतें सोने को और आकर्षक "सुरक्षित निवेश" बनाती हैं। मार्च तिमाही में निवेश मांग आभूषण मांग से ज्यादा हो गई थी। गोल्ड ETF में निवेश मजबूत रहने की उम्मीद है।
तस्करी की आशंका
उच्च शुल्क से ग्रे मार्केट का मार्जिन बढ़ गया (लगभग 18%)। एक किलो सोने की तस्करी से 30 लाख रुपये तक मुनाफा हो सकता है।
- 2023 में अनौपचारिक आयात 156 टन था, जो 2024 में 69 टन और 2025 में 20 टन रह गया था (पिछले शुल्क कटौती के बाद)।
- अब फिर तस्करी बढ़ने का जोखिम है।
भारत में सोने-चांदी पर आयात ड्यूटी कौन तय करता है और कैसे काम करता है ?
- आयात शुल्क वह कर है जो विदेशों से आने वाली वस्तुओं पर लगाया जाता है।
- इसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों की रक्षा करना, व्यापार संतुलन बनाए रखना, सरकारी राजस्व बढ़ाना और विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षण करना होता है।
- भारत में आयात शुल्क का कानूनी ढांचा मुख्य रूप से सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 और सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 द्वारा संचालित होता है।
- भारत में आयात शुल्क (Customs Duty) तय करने और बदलने का अधिकार वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के अधीन राजस्व विभाग (Department of Revenue) के पास है।
- केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs )(CBIC) इसकी अधिसूचना जारी करता है। CBIC राजस्व विभाग के तहत काम करता है और कस्टम्स नियमों को लागू करता है।
- सरकार बजट, आर्थिक स्थिति (CAD, forex reserves, रुपये का मूल्य) या वैश्विक घटनाओं के आधार पर शुल्क बढ़ा या घटा सकती है। यह सीमा शुल्क अधिनियम (Customs Tariff Act) के तहत सूचनाओ के जरिए होता है।
- उदाहरण : हालिया बढ़ोतरी में 10% Basic Customs Duty + 5% Agriculture Infrastructure and Development Cess (AIDC) जोड़ा गया, जिससे प्रभावी दर 15% हो गई। IGST (Integrated GST) अलग से लागू होता है।
- प्रक्रिया: आर्थिक समीक्षा के बाद राजस्व विभाग प्रस्ताव तैयार करता है वित्त मंत्री/कैबिनेट की मंजूरी → CBIC गजट नोटिफिकेशन जारी करता है → प्रभावी तारीख से लागू।
- यह नीति लचीली है 2024 में शुल्क घटाकर 6% किया गया था (ज्वेलरी इंडस्ट्री और तस्करी कम करने के लिए), अब फिर बढ़ाया गया है।