संदर्भ
- 3 मई, 2026 की सुबह पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने नौ लोगों की जान ले ली। शुरुआती जांच में एयर कंडीशनर में विस्फोट या शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना गया। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस बड़े संकट का संकेत है जो भारत के शहरों में तेजी से आकार ले रहा है - बिजली से लगने वाली आग का बढ़ता खतरा।
- दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार राजधानी में होने वाली 80 प्रतिशत से अधिक आग की घटनाओं के पीछे विद्युत दोष जिम्मेदार हैं। मुंबई अग्निशमन विभाग के अध्ययन भी इसी ओर इशारा करते हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में विस्तृत फोरेंसिक जांच नहीं हो पाती, इसलिए वास्तविक कारण अक्सर अनुमान तक सीमित रह जाते हैं।
बिजली की बढ़ती मांग और कमजोर ढाँचा
- भारत में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। अप्रैल 2026 में देश की अधिकतम बिजली मांग 256 गीगावाट से अधिक दर्ज की गई। भीषण गर्मी और तेजी से बढ़ते एयर कंडीशनर उपयोग ने ऊर्जा खपत को अभूतपूर्व स्तर पर पहुँचा दिया है।
- अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार 2030 तक भारत में एयर कंडीशनरों की संख्या 24 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। लेकिन समस्या यह है कि अधिकांश पुराने घर और इमारतें इस अतिरिक्त विद्युत भार को सहन करने के लिए डिजाइन ही नहीं की गई थीं।
- 1980 और 1990 के दशक में बनी वायरिंग व्यवस्था पंखे और बल्ब जैसे सीमित उपकरणों के लिए बनाई गई थी। आज उन्हीं सर्किटों पर एसी, गीजर, इंडक्शन कुकर, इन्वर्टर और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर चलाए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप ओवरलोडिंग, अत्यधिक गर्मी के कारण आग का जोखिम तीव्रगति से बढ़ता जा रहा है।
एयर कंडीशनर: आराम का साधन या संभावित खतरा ?
- आधुनिक एयर कंडीशनर घरों में सबसे भारी विद्युत भारों में शामिल हैं।
- इनका स्टार्ट-अप करंट सामान्य संचालन करंट से कई गुना अधिक होता है। यदि इन्हें साझा या कम क्षमता वाले सर्किट पर लगाया जाए तो तार तेजी से गर्म होने लगते हैं।
- इसके अलावा इन्वर्टर तकनीक वाले एसी हार्मोनिक डिस्टॉर्शन उत्पन्न करते हैं। यह तकनीकी समस्या धीरे-धीरे वायरिंग और न्यूट्रल तारों को गर्म करती रहती है। कई बार यह प्रक्रिया महीनों तक चलती रहती है और अंततः आग का कारण बन जाती है।
हार्मोनिक डिस्टॉर्शन (विरूपण) क्या है ?
- हार्मोनिक विरूपण एक गंभीर विद्युत गुणवत्ता समस्या है, जिसमें बिजली की धारा या वोल्टेज की तरंगें अपने सामान्य आकार से बदल जाती हैं।
- इसका एक प्रमुख कारण पावर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बढ़ता उपयोग है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत (RES) भी ऐसे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं, जो इस प्रकार की विकृति पैदा करते हैं।
- इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि पीसीसी (पॉइंट ऑफ कॉमन कपलिंग) पर हार्मोनिक विरूपण का स्तर कम रहे, सख्त नियम और मानक लागू किए गए हैं।
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बिजली से लगने वाली आग के वास्तविक कारण
आमतौर पर हर आग को शॉर्ट सर्किट कहकर छोड़ दिया जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। विशेषज्ञों के अनुसार विद्युत आग के प्रमुख कारण हैं:
- ओवरलोड सर्किट
- ढीले या जंग लगे कनेक्शन
- नकली तार और ब्रेकर
- पुराने उपकरण
- आर्क फॉल्ट
- खराब रखरखाव
- हार्मोनिक डिस्टॉर्शन
- कई बार स्विचबोर्ड का एक छोटा-सा ढीला कनेक्शन महीनों तक गर्म होता रहता है और धीरे-धीरे इन्सुलेशन को जला देता है। आग तब दिखाई देती है जब नुकसान बहुत बढ़ चुका होता है।
पुरानी वायरिंग पर संचालित नवीन उपकरण
- भारत में बड़ी संख्या में ऐसे मकान हैं जिनकी विद्युत व्यवस्था दशकों पुरानी है। इन घरों में आधुनिक हाई-पावर उपकरण जोड़ दिए गए हैं, लेकिन वायरिंग और सुरक्षा प्रणाली को अपग्रेड नहीं किया गया।
- कम आय वर्ग के किराएदार सबसे अधिक जोखिम में हैं क्योंकि वे अक्सर पुराने और खराब रखरखाव वाले भवनों में रहते हैं।
- यूरोप में भी यह समस्या सामने आई है, जहाँ करोड़ों पुराने विद्युत उपकरण अब भी उपयोग में हैं। भारत में स्थिति और गंभीर है क्योंकि यहां बिजली की खपत तेज गति से बढ़ रही है, जबकि सुरक्षा निरीक्षण लगभग नगण्य हैं।
वैश्विक सीख
जापान और दक्षिण कोरिया से सीख
- जापान ने 1960 के दशक में हर चार साल में घरेलू विद्युत निरीक्षण अनिवार्य किया था। दक्षिण कोरिया ने भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की। परिणामस्वरूप दोनों देशों में विद्युत आग की घटनाओं में भारी कमी आई।
- यूरोपीय संघ ने भी आधुनिक विद्युत उपकरणों और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सिस्टम को संभावित अग्नि जोखिम के रूप में मान्यता दी है।
- इसके विपरीत भारत में नियमित विद्युत निरीक्षण की संस्कृति अभी विकसित नहीं हो सकी है।
भारत में सुरक्षा मानकों की बड़ी कमी
- अमेरिका में आर्क-फॉल्ट सर्किट इंटरप्टर (AFCI) वर्षों से अनिवार्य हैं। ये उपकरण खतरनाक विद्युत आर्क का पता लगाकर बिजली आपूर्ति तुरंत बंद कर देते हैं और आग लगने से रोकते हैं।
- भारत में ऐसे उपकरण बहुत कम इस्तेमाल होते हैं। न तो भवन नियमों में इन्हें अनिवार्य बनाया गया है और न ही आम उपभोक्ताओं में इनके प्रति जागरूकता है।
आर्क-फॉल्ट सर्किट इंटरप्टर (AFCI) क्या है?
- आर्क-फॉल्ट सर्किट इंटरप्टर (AFCI) एक विशेष विद्युत सुरक्षा उपकरण है, जिसे बिजली के तारों में होने वाली खतरनाक आर्किंग (चिंगारी या स्पार्क) का पता लगाने और आग लगने से पहले बिजली आपूर्ति रोकने के लिए बनाया गया है।
- जब किसी विद्युत तार, ढीले कनेक्शन, टूटे इन्सुलेशन या खराब वायरिंग के कारण बिजली अनियंत्रित रूप से स्पार्क पैदा करती है, तो उसे “आर्क फॉल्ट” कहा जाता है। यह स्पार्क बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न करता है और धीरे-धीरे आग का कारण बन सकता है।
- एएफसीआई लगातार विद्युत धारा के पैटर्न की निगरानी करता है। यदि उसे असामान्य स्पार्किंग या खतरनाक आर्किंग का संकेत मिलता है, तो वह तुरंत सर्किट की बिजली काट देता है। इससे आग लगने की संभावना काफी कम हो जाती है।
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फोरेंसिक जांच की कमजोरी
- भारत में अग्निशमन-फोरेंसिक इंजीनियरों की भारी कमी है। अधिकतर मामलों में विस्तृत वैज्ञानिक जांच नहीं हो पाती और घटनाओं को शॉर्ट सर्किट बताकर बंद कर दिया जाता है। इससे न केवल वास्तविक कारण छिप जाते हैं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा नीतियां भी कमजोर हो जाती हैं।
आग का तकनीकी समाधान क्या है ?
- अमेरिका में स्मार्ट सेंसर आधारित उपकरण घरों में सूक्ष्म विद्युत आर्किंग का पता लगाकर आग लगने से पहले चेतावनी देते हैं। वस्तुतः बीमा कंपनियां भी ऐसे उपकरण मुफ्त में उपलब्ध करा रही हैं।
- भारत में ऐसी तकनीक अभी शुरुआती स्तर पर है। उपभोक्ताओं के पास यह जानने का भी कोई भरोसेमंद तरीका नहीं है कि कौन-सा उपकरण वास्तव में सुरक्षित है।
आग से बचाव के व्यावहारिक उपाय
- केवल आईएसआई-प्रमाणित वायरिंग और ब्रेकर का उपयोग करें
- एसी को अलग सर्किट पर लगाएं
- हर 2-3 साल में थर्मोग्राफी स्कैन करवाएं
- एसी की नियमित सर्विस कराएं
- जलने की गंध या झिलमिलाहट को नजरअंदाज न करें
- पुराने भवनों की वायरिंग समय-समय पर बदलें
आगे का रास्ता: नीति और निगरानी दोनों जरूरी
1. नियमित विद्युत निरीक्षण अनिवार्य करना : जापान और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर पुराने भवनों का समय-समय पर निरीक्षण हो।
2. आधुनिक सुरक्षा मानकों को लागू करना : एएफसीआई और हार्मोनिक मॉनिटरिंग जैसे सुरक्षा उपायों को भवन नियमों का हिस्सा बनाया जाए।
3. फोरेंसिक जांच प्रणाली मजबूत करना : प्रत्येक आग की घटना की वैज्ञानिक जांच हो और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
4. राष्ट्रीय डेटा प्रणाली विकसित करना : अग्निशमन विभाग, एनसीआरबी और बीआईएस के आंकड़ों को एकीकृत किया जाए।
निष्कर्ष
- भारत तेजी से विद्युतीकरण और आधुनिक जीवनशैली की ओर बढ़ रहा है। लाखों नए एयर कंडीशनर लोगों को गर्मी से राहत दे रहे हैं, लेकिन वे एक ऐसे विद्युत ढांचे पर निर्भर हैं जो कई जगहों पर पुराना और असुरक्षित है। यदि ऊर्जा सुरक्षा के साथ विद्युत सुरक्षा को समान प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आने वाले वर्षों में बिजली से लगने वाली आग की घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।