New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 8th June 2026, 6:30 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 1st June 2026, 5:30 PM English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 7th June 2026, 8:00 AM

भारत में हर 8 में से 1 व्यक्ति बीमार: 30 साल में दोगुनी हुई बीमारी की दर

हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी ‘घरेलू सामाजिक उपभोग: स्वास्थ्य’ रिपोर्ट भारत में स्वास्थ्य संबंधी एक चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत की है।रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर आठ में से एक व्यक्ति (लगभग 13.1%) बीमार है, जो पिछले 30 वर्षों में बीमारी की दर के दोगुना से अधिक बढ़ने को दर्शाता है।

रिपोर्ट का आधार

  • यह रिपोर्ट राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के 80वें दौर (जनवरी–दिसंबर 2025) पर आधारित है।
  • सर्वेक्षण में लोगों से पिछले 15 दिनों में बीमारी के बारे में पूछा गया। 
  • यह देश में बीमारी, उपचार और स्वास्थ्य व्यय का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। 

प्रमुख बिन्दु 

  • भारत में कुल बीमारी दर 13.1% है, यानी हर 8 में से 1 व्यक्ति बीमार है। 
  • शहरी क्षेत्रों में यह दर 14.9% है, जो ग्रामीण क्षेत्रों (12.2%) से अधिक है, जबकि लिंग के आधार पर महिलाओं (14.4%) में बीमारी की दर पुरुषों (11.8%) की तुलना में अधिक पाई गई है।
  • आयु-आधारित विश्लेषण
  • बच्चों और युवाओं में संक्रमण (बुखार, खांसी, गला) और श्वसन रोग अधिक पाए जाते हैं, जबकि युवाओं में मानसिक और पाचन संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। 
  • 30-59 वर्ष की आयु में हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे जीवनशैली संबंधी रोगों में वृद्धि देखी जाती है। 
  • वहीं बुजुर्गों में हृदय एवं चयापचय रोगों के साथ-साथ हड्डी और जोड़ों की समस्याएं अधिक पाई जाती हैं।

आयु वर्ग

बीमारी की स्थिति

0-4 वर्ष

9-10% (संक्रमण प्रमुख)

15–29 वर्ष

4-5% (सबसे कम)

45–59 वर्ष

20–25%

60+ वर्ष

42-45% (सबसे अधिक)

30 वर्षों का रुझान  

वर्ष

ग्रामीण (%)

शहरी (%)

1995-96

5.5

5.4

2004

8.8

9.9



2014

8.9

11.8

2017-18

6.8

9.1

2025

12.2

14.9

कारण  

  • शहरीकरण और प्रदूषण के बढ़ने, अस्वस्थ जीवनशैली (खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता), जनसंख्या के वृद्ध होने, बेहतर रिपोर्टिंग और जागरूकता में वृद्धि, तथा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते मामलों के कारण बीमारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

प्रभाव

  • स्वास्थ्य प्रणाली पर बढ़ते दबाव, परिवारों पर बढ़ते स्वास्थ्य व्यय, उत्पादकता में कमी और गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते खतरे के कारण यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।

आगे की राह  

  • इस स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, रोकथाम आधारित स्वास्थ्य नीति अपनाना, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाना, पोषण और जीवनशैली में सुधार लाना तथा डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना आवश्यक है।

निष्कर्ष

भारत में बढ़ता रोग-भार केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी है। एनएसओ की यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि यदि समय रहते रोकथाम, जागरूकता और स्वास्थ्य ढांचे में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR