संदर्भ
- हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने एक दृष्टिकोण पत्र जारी किया है, जिसमें देश के औपचारिक सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को मासिक आधार पर मापने के लिए एक नए सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
सेवा उत्पादन सूचकांक (Index of Service Production) के बारे में
- इस प्रस्तावित सूचकांक के लिए वर्ष 2024-25 को आधार वर्ष के रूप में निर्धारित किया गया है और इसके निर्माण में जीएसटी नेटवर्क (GSTN) के आंकड़ों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। मंत्रालय ने इस मसौदे पर आम जनता और हितधारकों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।
- इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए मई 2025 में एक तकनीकी सलाहकार समिति टीएसी-आईएसपी का गठन किया गया था, जिसमें 24 विशेषज्ञ शामिल थे। विस्तृत विचार-विमर्श और विश्लेषण के बाद इसी समिति ने यह दृष्टिकोण पत्र तैयार किया है।
आईएसपी की आवश्यकता क्यों महसूस हुई ?
- प्रस्तावित सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का उद्देश्य भारत के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को नियमित रूप से, विशेष रूप से मासिक आधार पर, मापना है।
- इस समय भारत में दो प्रमुख उच्च-आवृत्ति आर्थिक संकेतक उपलब्ध हैं।
- पहला, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), जो विनिर्माण, खनन और बिजली जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के मासिक उत्पादन का आकलन करता है।
- दूसरा, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), जो खुदरा महंगाई को दर्शाता है और देश में मुद्रास्फीति मापने का मुख्य आधार है।
- इन संकेतकों पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों द्वारा लगातार नजर रखी जाती है, ताकि अर्थव्यवस्था की दिशा और रुझानों को समझा जा सके।
- इसके बावजूद, सेवा क्षेत्र (Service sector) के लिए कोई समान मासिक सूचकांक उपलब्ध नहीं है।
- वस्तुतः यह एक महत्वपूर्ण कमी मानी जाती है, क्योंकि सेवाएं भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में आधे से अधिक योगदान देती हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करती हैं। ऐसे में आईएसपी इस अंतर को भरने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का उद्देश्य
- सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) का मुख्य उद्देश्य सेवा क्षेत्र की अल्पकालिक आर्थिक गतिविधियों की नियमित निगरानी करना है। इसकी अवधारणा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के समान है, लेकिन यह विशेष रूप से सेवाओं पर केंद्रित होगा।
- इस सूचकांक को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा विकसित किया जाएगा।
आईएसपी का कवरेज
- इस पहल के तहत 40 से अधिक सेवा उप-क्षेत्रों को शामिल करने की योजना है। इनमें प्रमुख रूप से थोक और खुदरा व्यापार, परिवहन, बैंकिंग और बीमा, संचार सेवाएं, होटल एवं रेस्तरां, रियल एस्टेट, पेशेवर एवं तकनीकी सेवाएं, तथा मनोरंजन और अवकाश जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
- सूचकांक तैयार करते समय उत्पादन संबंधी आंकड़ों की उपलब्धता और मूल्य समायोजन (deflation) जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कार्यप्रणाली और वैश्विक मानकों के साथ तालमेल
- आईएसपी का निर्माण अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा, ताकि इसकी विश्वसनीयता और तुलनात्मकता सुनिश्चित हो सके।
- इसके अंतर्गत डेटा का मानकीकरण किया जाएगा और मूल्य अपस्फीति कारकों का उपयोग कर आंकड़ों को मुद्रास्फीति के प्रभाव से समायोजित किया जाएगा, जिससे वास्तविक उत्पादन स्तर का अधिक सटीक आकलन संभव हो सके।
आईएसपी के लिए प्रयुक्त डेटा स्रोत
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) के निर्माण हेतु तीन प्रमुख डेटा स्रोतों पर निर्भर रहने की योजना बना रहा है।
1. जीएसटी नेटवर्क (GSTN) डेटा
- जीएसटी नेटवर्क का डेटा विभिन्न क्षेत्रों में लेन-देन और आपूर्ति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है। इसे सेवा क्षेत्र के उत्पादन को मापने के लिए मुख्य स्रोत माना जा रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जीएसटी से बाहर रखे गए क्षेत्रों का आकलन इस माध्यम से संभव नहीं होगा।
2. प्रशासनिक डेटा
- विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी संगठनों से प्राप्त क्षेत्र-विशिष्ट प्रशासनिक आंकड़े उन क्षेत्रों के लिए पूरक भूमिका निभाएंगे, जो जीएसटी के दायरे में शामिल नहीं हैं। यह डेटा सेट सूचकांक को अधिक व्यापक बनाने में मदद करेगा।
3. ASISSE सर्वेक्षण
- सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा किया जा रहा कंपनियों का वार्षिक सेवा क्षेत्र सर्वेक्षण (ASISSE) अतिरिक्त और विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा। यह विशेष रूप से संगठित सेवा क्षेत्र से संबंधित आंकड़ों को मजबूत आधार देगा।
डेटा स्रोत की सीमाएं
- यह उल्लेखनीय है कि इन तीनों स्रोतों में अनौपचारिक सेवा क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है। आंकड़ों की अनुपलब्धता के कारण यह खंड सूचकांक से बाहर रहेगा, जबकि यह सेवा क्षेत्र के कुल सकल मूल्य वर्धन (GVA) का लगभग 33% हिस्सा है। विशेष रूप से, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र (सेवा क्षेत्र के जीवीए में संयुक्त योगदान लगभग 10%) को भी फिलहाल कंपनियों का वार्षिक सेवा क्षेत्र सर्वेक्षण के परिणाम उपलब्ध होने तक शामिल नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
- सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) के लागू होने के बाद भारत की सांख्यिकीय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिलेगा। इससे नीति-निर्माताओं, विशेषकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति को सेवा क्षेत्र की अधिक सटीक और समयबद्ध जानकारी उपलब्ध होगी, जो देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है।
- इसके साथ ही, यह सूचकांक निजी क्षेत्र के सर्वेक्षण-आधारित संकेतकों, जैसे पीएमआई, पर निर्भरता को भी कम करेगा। समग्र रूप से, यह पहल बेहतर और विश्वसनीय आंकड़ों के माध्यम से साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की दिशा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के प्रयासों को और मजबूत करती है।